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80-85 रुपए लीटर तक पहुंच सकते हैं पेट्रोल के दाम, मोदी सरकार ने अगर कर दी देरी

अगर मोदी सरकार ने कीमतें थामने के लिए कमद नहीं उठाए तो पेट्रोल 80 से 85 रुपए प्रति लीटर बिक सकता है....

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नई दिल्‍ली. देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें 3 साल के टॉप लेवल पर हैं। मुंबई जैसे शहर में मंगलवार को पेट्रोल की कीमतें 79 रुपए 15 पैसे के लेवल पर पहुंच गईं। राजधानी दिल्‍ली में यह 71 रुपए 27 पैसे के लेवल पर पहुंच गया। दरअसल, इंटरनेशनल मार्केट में कीमतें बढ़ने का सीधा असर पेट्रोल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। इसके चलते देश के कई राज्‍यों में पेट्रोल की कीमतों का रिकॉर्ड टूट रहा है। अगर मोदी सरकार ने कीमतें थामने के लिए कदम नहीं उठाए तो पेट्रोल 80 से 85 रुपए प्रति लीटर बिक सकता है।    

3 साल का टूटा रिकॉर्ड 

सोमवार को दिल्ली और चेन्‍नई में पेट्रोल की कीमतें अगस्त 2014 के बाद सबसे ज्यादा पहुंच गुई। कोलकाता में कीमतें जुलाई 2015 के लेवल को पार कर चुकी हैं। मुंबई में पेट्रोल की कीमतें अक्टूबर 2017 का रिकॉर्ड तोड़ चुकी हैं। इंडियन ऑयल की वेबसाइट के मुताबिक, मंगलवार को दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 71.27 रुपए प्रति लीटर, कोलकाता में 74 रुपए, मुंबई में 79.17 रुपए और चेन्नई में 73.89 रुपए पहुंच गया।   

 

75 डॉलर तक जा सकती हैं क्रूड की कीमतें
इंडियन बास्‍केट में क्रूड 70 डॉलर प्रति बैलर पहुंच गया है। इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड की कीमतों पर नजर डालें तो इसमें तेजी लगातार बरकरार है। यूएस में इकोनॉमिक रिकवरी के साथ डिमांड बढ़ने, चीन के बेहतर डाटा और यूरोप के कुछ देशों सुधरी डिमांड लगातार क्रूड की कीमतें बढ़ा रही हैं। ओपेक देश भी प्रोडक्शन कट जारी रखने अब भी सहमत हैं। जियो-पॉलिटिकल टेंशन से भी अभी राहत नहीं है। इन वजहों से क्रूड अगले 2 महीनों में 75 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। पिछले 6 माह की बात करें तो क्रूड में 57 फीसदी से ज्यादा तेजी आ चुकी है। जून में क्रूड 44.48 डॉलर के लेवल पर था। 

 

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80 से 85 रुपए लीटर पहुंच सकती हैं कीमतें 
जैसा की पहले की बताया गया कि एक्‍सपर्ट पेट्रोल की कीमतें 75 डॉलर प्रति बैरल पर जाने का अंदेशा जता रहे हैं। अगर ऐसा हुआ तो देश में पेट्रोल 80 से 85 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से बिकेगा। एंजेल ब्रोकिंग कमो़डिटी के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट अनुज गुप्ता का कहना है कि क्रूड अगर मौजूदा दौर के 70 डॉलर प्रति डॉलर से 75 डॉलर प्रति बैरल के लेवल पर पहुंचा तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 8 से 10 रुपए की बढ़ोतरी हो सकती है। मतलब, अगर 70 डॉलर प्रति बैरल के लेवल पर अगर कीमतें 70 से 75 रुपए के बीच हैं, तो 75 डॉलर प्रति बैरल जाने पर ये 80 से 85 रुपए प्रति लीटर पर पहुंचनी तय है। 

 

सरकार को उठाने पड़ेंगे ये कदम 
अगर केंद्र सरकार एक्‍साइज ड्यूटी नहीं घटाती, राज्‍य वैट पहले जितना ही रखते हैं और इंटरनेशनल मार्केट में रुपया डॉलर के मुकाबले इसी लेवल पर रहता है तो पेट्रोल कीमतें 80 से 85 रुपए प्रति लीटर जाएंगी। मौजूदा परिस्थितियों के देखते हुए अगर उसे पेट्रोल की कीमतों में कमी करनी है तो मोदी सरकार को एक्‍साइज ड्यूटी घटानी होगी या फिर राज्‍यों से वैट घटाने की अपील करनी होगी। गुजरात चुनाव से पहले सरकार ने एक्‍साइज में 2 फीसदी की कमी की थी। इसके अलावा पेट्रोलिमय मिनिस्‍टर धर्मेंद्र प्रधान के आग्रह पर कई राज्‍यों ने वैट घटाया था, इसके चलत कीमतें काबू में हुईं थीं। अब ये फिर से बेकाबू होती दिख रही हैं। माना जा रहा है कि अगर पेट्रोल की कीमतें 80 रुपए प्रति लीटर से ऊपर गईं तो सरकार कदम जरूर उठाएगी।  

 

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देश में कैसे तय होती हैं पेट्रोल की कीमतें  
पेट्रोल की कीमतें अब खुले मार्केट से तय होती हैं। देश की सरकारी तेल कंपनियां इंटरनेशनल मार्केट की कीमतों के हिसाब से रोजाना कीमतें रिवाइज करती हैं। कंपनियां मार्केटिंग मार्जिन, डीलर कमीशन और सरकारी शुल्कों को जोड़कर पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमत तय करती हैं। अंतरराष्ट्रीय मार्केट में पेट्रोल और डीजल की कीमतें मोटे तौर पर क्रूड प्राइसेज की तर्ज पर चलती हैं, हालांकि किसी खास फ्यूल की डिमांड-सप्लाई समीकरण, रिफाइनिंग या ट्रांसपोर्टेशन कपैसिटी की दिक्कतों और अन्य कारोबार या भूराजनैतिक घटनाओं का भी इन पर असर दिखाई देता है। 

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