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चुनाव लड़ने वालों को बताना होगा अपनी इनकम का सोर्स, सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को निर्देश दिया कि चुनाव लड़ने वाले कैंडिडेट्स के लिए इनकम का सोर्स बताना अनिवार्य होगा।

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नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को निर्देश दिया कि चुनाव लड़ने वाले कैंडिडेट्स के लिए इनकम का सोर्स बताना अनिवार्य होगा। इसमें कैंडिडेट्स को अपने जीवन साथी और डिपेंडेंट्स की इनकम का सोर्स भी देना जरूरी होगा। शीर्ष कोर्ट ने एनजीओ लोक प्रहरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिए।

 

एनजीओ लोक प्रहरी ने अपनी याचिका के जरिए मांग की थी कि चुनाव लड़ने वाले कैंडिडैट को नॉमिनेशन फाइल करते समय अपनी इनकम के सोर्स का खुलासा करना चाहिए। सांसद-विधायकों की संपत्ति पर लोक प्रहरी की इस याचिका पर जस्टिस जे. चेलामेश्‍वर और अब्‍दुल नजीर की बेंच ने फैसला सुनाया।  

 

कानून में संशोधन पर संसद करेगी फैसला 

एनजीओ ने अपनी याचिका में कहा था कि नॉमिनेशन पेपर में कैंडिडेट्स अपनी संपत्ति, अपने जीवनसाथी, बच्‍चों और अन्‍य दूसरे डिपेंडेंट्स की संपत्ति का खुलासा करते हैं लेकिन वह सोर्स ऑफ इनकम की जानकारी नहीं देते हैं। याचिका में यह डिमांड की गई थी कि नॉमिनेशन फॉर्म में एक कॉलम शामिल किया जाए, जिसमें कैंडिडेट के सोर्स ऑफ इनकम की डिटेल दर्ज की जाए। याचिकाकर्ता की अपील को मंजूर करते हुए बेंच ने कहा कि उन चीजों की अनुमति नहीं है, जिसके लिए कानून में संशोधन की जरूरत है और इस पर फैसला संसद को करना है। 

 

सांसदों, विधायकों की चल रही जांच 

सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्‍ट टैक्‍सेस (सीबीडीटी) ने सितंबर 2017 में सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि 98 विधायक और 7 लोकसभा सांसदों की जांच चल रही है, इनकी संपत्ति में कम समय में कई गुना का इजाफा हुआ है। याचिकाकर्ता ने 26 लोक सभा सांसदों, 11 राज्‍य सभा सांसदों और 257 विधाकों की संपत्ति में अप्रत्‍याशित बढ़ोत्‍तरी का आरोप लगाया था। यह आरोप उनके इलेक्‍शन एफिडेविट के आधार पर थे। इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट भी 26 लोक सभा सांसदों में से 7 के संपत्ति की जांच करेगा, जिनकी संपत्ति में भारी बढ़ोत्‍तरी हुई थी। 

 

सोर्स ऑफ इनकम डिटेल पर केंद्र तैयार 

अप्रैल 2017 में अपने एफिडेविट में चुनाव सुधारों को लेकर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि नॉमिनेशन के वक्त कैंडिडेट्स द्वारा अपनी, अपने जीवन साथी और डिपेंडेंट्स की आय के स्रोत की जानकारी जरूरी करने को केंद्र तैयार है। केंद्र ने कहा कि काफी विचार करने के बाद इस मुद्दे पर नियमों में बदलाव का फैसला लिया गया है। जल्द ही इसके लिए नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। एफिडेविट में केंद्र ने यह भी कहा है कि उसने याचिकाकर्ता की ये बात भी मान ली है जिसमें कहा गया था कि प्रत्याशी से स्टेटमेंट लिया जाए कि वो जनप्रतिनिधि अधिनियम के तहत अयोग्य करार देने वाले प्रावधान में शामिल नहीं हैं। 

 

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