Home » Economy » PolicyPNB scam Accused challenges PMLA court jurisdiction seeks case transfer to CBI court

PNB फ्रॉड: नीरव मोदी के सहयोगी ने PMLA कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को दी चुनौती, केस सीबीआई कोर्ट भेजने की मांग

एक अन्‍य आरोपी मनीष बोसामिया ने स्‍पेशल सीबीआई कोर्ट में सीबीआई-ED में तालमेल की कमी का उठाया मुद्दा

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मुंबई. पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले के मुख्‍य आरोपी नीरव मोदी की कंपनी के ऑथराइज्‍ड सिग्‍नेटरी हेमंत भट्ट ने PMLA कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को चुनौती देते हुए मामले को सीबीआई कोर्ट में ट्रान्‍सफर करने की याचिका दायर की है। भट्ट की ओर से यह याचिका एडवोकेट विजय अग्रवाल ने PMLA कोर्ट के स्‍पेशल जज एमएस आजमी के समक्ष पेश की। वहीं एक अन्‍य आरोपी मनीष बोसामिया ने स्‍पेशल सीबीआई कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के बीच तालमेल की कमी होने का दावा किया गया है। बोसामिया के वकील भी अग्रवाल ही हैं।

 

सीबीआई ने पीएनबी फ्रॉड से जुड़े होने के चलते हेमंत भट्ट व कुछ अन्‍य लोगों को IPC के सेक्‍शन 420 (बेईमानी) और प्रिवेंशन ऑफ करप्‍शन एक्‍ट से जुड़े सेक्‍शंस के तहत मुकदमा दर्ज किया था। ED द्वारा प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्‍ट (PMLA) के तहत दर्ज की गई एक अन्‍य एफआईआर में भी भट्ट का नाम शामिल था।

 

अब PMLA कोर्ट के पास नहीं रहा मामले पर आगे कार्रवाई का अधिकार

एडवोकेट अग्रवाल ने भट्ट की ओर से दायर याचिका में कहा कि पीएनबी फ्रॉड मामले को स्‍पेशल सीबीआई जज ने संज्ञान में लिया है, इसलिए अब PMLA कोर्ट के पास मामले पर आगे कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है। यह भी कहा गया कि अगर कोई इन्‍सान एक ही मामले में अलग-अलग कानूनों के तहत एक से ज्‍यादा अपराधों को दोषी है तो उसके खिलाफ सुनवाई एक ही ट्रायल कोर्ट में हो सकती है।

 

मुकदमों का आधार और गवाह हैं एक

याचिका में आगे कहा गया कि दोनों ही मामलों का आधार अनाधिकृत रूप से जारी किए गए लेटर ऑफ अंडरस्‍टैंडिंग (LoUs) हैं, जिनकी जांच अभी सीबीआई और ईडी द्वारा की जा रही है। इसके अलावा दोनों मामलों के गवाह भी एक ही हैं। इसलिए दोनों मामलों पर स्‍पेशल सीबीआई जज द्वारा एक ही ट्रायल कोर्ट में सुनवाई की जानी चाहिए। कोर्ट द्वारा इस बारे में 10 जुलाई को ऑर्डर पास किए जाने की संभावना है।

 

आगे पढ़ें- बोसामिया की याचिका में क्‍या

 

बोसामिया आरोपी और गवाह दोनों कैसे

वहीं दूसरी ओर मनीष बोसामिया द्वारा स्‍पेशल सीबीआई कोर्ट में दायर याचिका में एडवोकेट अग्रवाल ने कहा कि सीबीआई ने बोसामिया को आरोपी माना है, जबकि ईडी ने उन्‍हें गवाह बनाया है। जब दोनों मामले आपस में जोड़ने की कोशिश की जा रही है, तो ऐसे में एक ही इन्‍सान समान तथ्‍यों के आधार पर गवाह और आरोपी कैसे हो सकता है। इस याचिका के बाद कोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी किया है और 23 जुलाई तक जवाब मांगा है।

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