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Home » Economy » PolicyPer person debt increased in UP after formation of BJP Government

योगी सरकार बनने के बाद यूपी के लोगों पर बढ़ा कर्ज का बोझ, प्रति व्यक्ति इतने रुपए की हो गई बढ़ोतरी

सदन में दी जानकारी, नया कर्ज लेने की तैयारी में जुटी सरकार

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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश का कर्ज अगले वित्तीय वर्ष में 4,73,563.22 करोड़ तक पहुंच जाएगा। इस तरह राज्य में प्रति व्यक्ति कर्ज बढ़कर 20,589 रुपए हो गया है। यह जानकारी राज्य के वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने गुरुवार को विधानसभा में दी। हैरत की बात यह है कि राज्य पर कुल कर्ज अगले वित्तीय वर्ष के लिए 4.79 लाख करोड़ के बजट प्रस्तावों के आसपास ही है। यह खुलासा भी विधानसभा में बजट प्रस्तुत करते हुए वित्त मंत्री ने किया। 

2018-19 में राज्य पर 4,42,508.70 लाख करोड़ का कर्ज

सरकार ने मौजूदा वित्तीय वर्ष में राज्य पर कर्ज की राशि को 1000 करोड़ रुपए घटा दिया है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में राज्य पर कुल 4,42,508.70 लाख करोड़ का कर्ज था। इस तरह तब यहां प्रति व्यक्ति कर्ज की राशि 19,239 रुपए बनती थी। जबकि इससे पहले कर्ज 4,43,362.52 करोड़ था और राज्य की करीब 23 करोड़ की आबादी में हर व्यक्ति पर यह 20,152 रुपए आंकी गयी थी। 2017-18 में प्रति व्यक्ति 18,476 रुपए का कर्ज था। उस वक्त राज्य पर कुल कर्ज 406474.31 करोड़ था। इस तरह 2017 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सत्ता में आने और आधारभूत संरचना के विकास पर जोर देने के बाद प्रति व्यक्ति कर्ज की राशि में 1676 रुपये की और बढ़ोतरी हो गई। वित्त मंत्री ने बताया कि 2015-16 में प्रति व्यक्ति कर्ज की राशि 14,724 रुपए थी। उस वक्त राज्य पर 323935.66 करोड़ रुपए का कर्ज था। जबकि 2014-15 में प्रति व्यक्ति कर्ज की राशि 13341 रुपए थी। तब राज्य पर 26,68020.69 करोड़ रुपए कर्ज था।

 

जीएसडीपी के 30 फीसदी के आसपास कर्ज का बोझ

उन्होंने कहा कि 2.3 अरब की आबादी वाले राज्य में 2016-17 में कर्ज का बोझ सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 29 से 30 फीसदी के आसपास है, जोकि 2014-15 में 27.9 फीसदी था। हालांकि, कर्ज का बोझ 2017-18 में बढ़कर 29.6 फीसदी तक हो गया और वर्तमान वित्तीय वर्ष में यह 30 फीसदी से ऊपर जा सकता है। वित्त मंत्री ने उम्मीद जताई कि 2019-20 में कर्ज का बोझ इसी स्तर (30 फीसदी) पर रह सकता है।

अगले वित्त वर्ष में 279311.48 करोड़ रुपए का कर्ज लेगी सरकार

 

अगले वित्तीय वर्ष में उत्तर प्रदेश सरकार बाजार से सबसे ज्यादा 279311.48 करोड़ रुपए का कर्ज लेगी।इसके साथ ही राज्य सरकार 12247.09 करोड़ रुपए का कर्ज केंद्र से लेने का विचार कर रही है। वहीं वित्तीय संस्थानों से 15447.60 करोड़ रुपए और पावर बांड्स से 46592.26 करोड़ रुपए जुटाने की तैयारी सरकार कर रही है। बजटीय गणना के अनुसार, 2019-20 में राज्य को राजस्व से 470684.48 करोड़ रुपए की आमदनी होगी। इसमें से सबसे ज्यादा 31.8 फीसदी केंद्रीय करों के हिस्से से मिलेगा। इसके अलावा 29.2 फीसदी राज्य को मिलने वाले कर और 14.2 फीसदी आय केंद्र से मिलने वाली मदद के रूप में होगी।

कर्मचारियों की सैलरी-पेंशन पर सबसे ज्यादा खर्च


अग्रवाल ने सदन को बताया कि सरकार को इसके अलावा 15.2 फीसदी राजस्व जनता के कर्ज से मिलेगा। राज्य सरकार कुल 479701.10 करोड़ रुपए खर्च करेगी। जिसमें सबसे ज्यादा 35.6 फीसदी धन राज्य सरकार के कर्मचारियों की तनख्वाह, पेंशन और भत्तों के अलावा शैक्षिक संस्थानों और पेंशन पर खर्च होगा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार लिए गए कर्ज पर ब्याज चुकाने के लिए 7.4 फीसदी धन खर्च करेगी। इसके अलावा कर्ज चुकाने में भी 7.4 फीसदी धन खर्च होगा। वहीं 16.2 फीसदी धन पूंजीगत व्यय के मद में जाएगा। इसके अलावा राज्य सरकार सब्सिडी पर 3.1 फीसदी धन खर्च करेगी। 

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