इस तारीख से आम लोग कर पाएंगे Train-18 में सफर, मात्र 8 घंटे का सफर होगा दिल्ली से वाराणसी का

जल्द ही आम लोगों के लिए भारतीय रेलवे की सबसे आधुनिक और तेज रफ्तार ट्रेन ‘Train 18’की सेवा शुरू होने जा रही है। ट्रेन-18 का नई दिल्ली से वाराणसी के बीच 2 फरवरी को टाइम ट्रायल किया जाएगा। इस ट्रायल के दौरान रेलगाड़ी को निर्धारित समय में नई दिल्ली से वाराणसी पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

Money Bhaskar

Feb 01,2019 08:36:00 AM IST

नई दिल्ली। जल्द ही आम लोगों के लिए भारतीय रेलवे की सबसे आधुनिक और तेज रफ्तार ट्रेन ‘Train 18’की सेवा शुरू होने जा रही है। ट्रेन-18 का नई दिल्ली से वाराणसी के बीच 2 फरवरी को टाइम ट्रायल किया जाएगाइस ट्रायल के दौरान रेलगाड़ी को निर्धारित समय में नई दिल्ली से वाराणसी पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा इस गाड़ी को 8 घंटे में नई दिल्ली से वाराणसी की दूरी तय करनी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस रेलगाड़ी को 07 से 10 फरवरी के बीच किसी भी दिन नई दिल्ली से वाराणसी के लिए रवाना कर आम लोगों के लिए सेवा को शुरू कर दिया जाएगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस गाड़ी को नई दिल्ली से वाराणसी के लिए रवाना करेंगेयह रफ्तार और आराम का नया कीर्तिमान बनाएगी। 100 करोड़ में बनी इस ट्रेन को भारतीय रेलवे का चेहरा बदलने वाली ट्रेन कहा जा रहा है। इतनी सुविधाओं से लैस कोई ट्रेन अब तक देश की पटरियों पर नहीं दौड़ी है। बता दें कि हाल ही में Train 18 को देश भर में Vande Bharat Express (वंदे भारत एक्सप्रेस) नाम से चलाने की घोषणा की गई हैयह रेल यात्रियों के लिए रेल यात्रा का अनुभव ही बदल देगी

ये हो सकता है किराया


Train 18 में यात्रा करने के लिए रेल यात्रियों को अधिक पैसे खर्च करने होंगे इस गाड़ी को शताब्दी रेलगाड़ियों की जगह पर चलाया जाना है, लेकिन इस गाड़ी का किराया शताब्दी रेलगाड़ियों से कीं अधिक होगाइस गाड़ी का किराया गतिमान रेलगाड़ी के किराए के करीब हो सकता हैशताब्दी रेलगाड़ियों की तुलना में गतिमान एक्सप्रेस का किराया कहीं अधिक है

ऐसी है ट्रेन 18 ट्रेन में 16 कंपार्टमेंट हैं, जिसमें से दो फर्स्ट क्लास कोच हैं। इसमें 1,128 यात्री सफर कर सकते हैं। फर्स्ट क्लास कोच में 52 और सामान्य कोच में 78 यात्री ट्रैवल कर सकते हैं। ट्रेन में मेट्रो ट्रेन की तरह इलेक्ट्रीकली संचालित हाेने वाले ऑटोमैटिक स्लाइडिंग डोर हैं। इसमें कुशन वाली आरामदायक सीटें हैं, वैक्यूम टॉयलेट्स और शताब्दी व अन्य प्रीमीयम ट्रेनों से बेहतर इंटीरियर है। इसकी अधिकतम रफ्तार 180 किमी प्रति घंटा है, हालांकि ट्रायल्स में ट्रेन ने 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार का आंकड़ा छुआ था। फिलहाल यह ट्रेन सिटिंग चेयर ट्रेन है, लेकिन इसका स्लीपर वेरिएंट भी जल्दी लॉन्च किया जा सकता है।डेढ साल में हुई तैयार चेन्नई की इंडियन रेलवे इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) के इंजीनियरों और एक्सपर्ट्स ने 1.5 साल की कड़ी मेहनत से इस ट्रेन को तैयार किया। इसका डिजायन दुनिया की सबसे तेज ट्रेनों और बुलेट ट्रेन से प्रेरित है। इसे बनाने में यूरोपीय एक्सपर्ट्स से राय जरूर ली गई थी लेकिन इसे पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से बनाया गया है। इस ट्रेन को Linke Hofmann Busch कोच और शताब्दी ट्रेनों के स्थान पर लाया जाएगा। रेलवे ने शुुरुआत में ट्रेन के दो सेट बनाना तय किया था। इसमें से एक सेट बनकर तैयार हो चुका है। अगर ट्रेन-18 के अधिक सेट का निर्माण किया जाएगा तो ट्रेन में सफर करने का खर्च 30 से 40 फीसदी कम हो जाएगा। उम्मीद है कि ICF को 2019-20 में ऐसी 10 और ट्रेनों के निर्माण का ऑर्डर मिलेगा।
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