Utility

24,712 Views
X
Trending News Alerts

ट्रेंडिंग न्यूज़ अलर्ट

ईस्टर्न पेरिफेरल, दिल्‍ली-मेरठ एक्‍सप्रेसवे फेज- 1 का रविवार को मोदी करेंगे उद्घाटन, 11,800 करोड़ है लागत DFC का पहला हिस्सा 15 अगस्त को खुलेगा, तीन गुना तेज चलेंगी मालगाड़ी कॉरपोरेशन बैंक को Q4 में 1,838 करोड़ का घाटा पेट्रोलियम पदार्थों को GST में लाने पर कीमत में ज्यादा अंतर नहीं : सुशील मोदी देश में कमिटमेंट वाली सरकार, ब्‍लैकमनी पर फैसले से लोगों में आई बेचैनी : पीएम मोदी ऐंजल इन्‍वेटर को मिलेगी स्‍टार्ट अप में निवेश पर टैक्‍स छूट, नोटिफिकेशन जारी वेदांता के विरोध में लेबर पार्टी, लंदन स्‍टॉक एक्‍सचेंज से डीलिस्‍टेड करने की मांग जेटली: 4 साल में नोटबंदी,जीएसटी से ब्लैकमनी पर लगी रोक, 3.3% पर लाएंगे फिस्कल डेफिसिट मोदी के 4 साल : अमित शाह ने कहा गरीबों और उद्योगों को समर्पित है सरकार, गिनाईं उपलब्धियां 38 के पेट्रोल पर 40 रु टैक्स वसूलती हैं केंद्र,राज्य सरकारें, GST लगने पर घट जाएंगी कीमत ई-फाइलिंग के लिए सभी 7 ITR फॉर्म जारी, टैक्स भरना होगा आसान मोदी के वादों का 4 साल में हुआ ये हाल, आप खुद तय करें कि अच्‍छे दिन आए या नहीं Petrol Price: पेट्रोल 14 पैसे और डीजल 15 पैसे हुआ महंगा, लगातार 13वें दिन बढ़ी कीमतें 1400 रु की EMI पर आ जाएगा 32 इंच का LED टीवी, घर बैठे खरीदें फाइनेंशियल ईयर 2018 के लिए PF पर मिलेगा 8.55% ब्याज, 5 साल में सबसे कम
बिज़नेस न्यूज़ » Economy » PolicyCJI के खिलाफ विपक्ष ने उपराष्‍ट्रपति को सौंपा महाभियोग का नोटिस

CJI के खिलाफ विपक्ष ने उपराष्‍ट्रपति को सौंपा महाभियोग का नोटिस

नई दिल्‍ली। कांग्रेस और अन्‍य विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस  (CJI ) दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग लाने का नोटिस उपराष्‍ट्रपति वैंकेया नायडू को सौंप दिया। कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता गुलाम नबी आजाद के नेतृत्‍व में विपक्षी नेताओं ने उपराष्‍ट्रपति को महाभियोग प्रस्‍ताव का ज्ञापन सौंपा। उपराष्‍ट्रपति से मिलने के बाद आजाद ने कहा कि करीब 71 सांसदों ने महाभियोग प्रस्‍ताव के समर्थन में दस्‍तखत किए थे, इसमें से अब 7 रिटायर्ड हो चुके हैं। इसलिए यह संख्‍या घटकर 64 रह गई। आजाद ने दावा किया कि महाभियोग प्रस्‍ताव लाने के लिए 64 सांसदों की संख्‍या पर्याप्‍त है। आजाद ने कहा कि हमें उम्‍मीद है कि उनके प्रस्‍ताव में कदम उठाया जाएगा।  बता दें कि राज्‍यसभा का चेयरमैन होने के नाते विपक्ष ने यह नोटिस उपराष्‍ट्रपति वेंकैया नायडू को सौंपा है।  

 

     

कांग्रेस का दावा- ज्‍यूडीशियरी में सबकुछ ठीक नहीं 
इस मुलाकात के बाद हुई विपक्ष की साझा प्रेस कांन्‍फ्रेंस में कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता कपित सिब्‍बल ने कहा, "हम आशा करते हैं कि देश को यह दिन दोबारा नहीं देखना पड़े। जिस दिन से उन्‍होंने (दीपक मिश्रा) चीफ जस्टिस का पदभार संभाला है, जबसे उनके तौर तरीकों पर सवाल उठ रहे हैं।" 
"जब सुप्रीम कोर्ट के जज खुद मान रहे हैं कि न्‍यायपालिका की स्‍वतंत्रता खतरे में है। तो ये बात सीजीआई के कामकाज के तरीकों की ओर इशारा करती हैं। ऐसे में क्‍या देश खड़े होकर सिर्फ तमाशा देखेगा।"  सिब्‍बल के मुताबिक, सीजेआई के खिलाफ महाभियोग लाने के लिए नोटिस में 5 बातों को आधार बनाया गया है। 

 

 

डीएमके और तृणमूल कांग्रेस माहभियोग से पीछे हटीं  

बता दें कि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग मसौदा प्रस्ताव पर कई पार्टियों ने हस्ताक्षर किए। इसमें एनसीपी, लेफ्ट, बीएसपी और कांग्रेस पार्टी शामिल है।  उपराष्‍ट्रपति को नोटिस भेजने से पहले इन दलों के सांसदों ने संसद भवन में मीटिंग हुई। यहा महाभियोग के नोटिस को आखिरी रूप दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, डीएमके और तृणमूल कांगेस पहले महाभियोग प्रस्‍ताव के पक्ष में थीं, लेकिन बाद में उन्‍होंने इसे समर्थन देने से मना कर दिया। जस्टिस मिश्रा ने 27 अगस्त, 2017 को पूर्व मुख्य न्यायाधीश जे एस खेहर के सेवानिवृत्ति के बाद भारत के 45वें मुख्य न्यायाधीश बने। उनका कार्यकाल 2 अक्टूबर, 2018 को समाप्त हो रहा है। 

 

क्या होता है महाभियोग
भारत के संविधान में न्यायधीशों पर महाभियोग का उल्लेख अनुच्छेद 124(4) में मिलता है। इसके तहत सुप्रीमकोर्ट या हाईकोर्ट के किसी न्यायाधीश पर साबित कदाचार या अक्षमता के लिए महाभियोग का प्रस्ताव लाया जा सकता है। महाभियोग की कार्यवाही संसद के सदनों में ही चलती है। जिस सदन में यह प्रस्ताव रखा जाता है वह इसे जांच के लिए दूसरे सदन को भेज देता है। सदन में न्यायाधीशों पर लगे आरोपों की जांच होती है। इसके नतीजे बहुमत से पारित कर दूसरे सदन को फैसले के लिए भेज दिए जाते हैं। इस प्रस्ताव पर फिर मतदान होता है और दो तिहाई मतों से मंजूरी के बाद फैसला तय की जाती है। यह तय होता है कि अमुक न्यायाधीश पद पर बना रहेगा या उसे हटाया जाएगा।  न्यायाधीशों  के खिलाफ महाभियोग के लिए किसी भी शिकायत पर लोकसभा के 100 सांसदों या रायसभा के 50 सांसदों की स्वीकृति जरूरी है। 

 

अब तक दो बार लाया गया है महाभियोग
अगर विपक्षी पार्टियां जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग लाती हैं तो देश के न्यायिक इतिहास में वो तीसरे जज होंगे जिनके खिलाफ महाभियोग लाया जाएगा। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस वी रामास्वामी पर साल 1993 में महाभियोग लाया गया था, लेकिन यह प्रस्ताव लोकसभा में ही गिर गया था। इसके बाद कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस सौमित्र सेन को महाभियोग का सामना करना पड़ा था। उन पर साल 2011 में महाभियोग लाया गया था, लेकिन उन्होंने लोकसभा में इसका सामना करने से पहले ही पद से इस्तीफा दे दिया था।

और देखने के लिए नीचे की स्लाइड क्लिक करें

Trending

NEXT STORY

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.