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क्या है ‘ग्रीन पटाखा’, भारत के सबसे बड़े Crackers हब शिवकाशी के मैन्यूफैक्चरर्स को भी नहीं है पता

दिल्ली के कारोबारियों ने बंद किया पटाखा कारोबार

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नई दिल्ली। देश में पटाखों के उत्पादन के लिए मशहूर तमिलनाडु स्थित शिवकाशी के पटाखा कारोबारियों को भी यह पता नहीं चल पा रहा है कि आखिर ग्रीन पटाखा (Green crackers)

क्या है। सरकार के पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारी भी अभी ग्रीन पटाखे की परिभाषा तय नहीं कर पाए हैं। हालांकि केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अधिकारी इस दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि कौन से पटाखे ग्रीन की श्रेणी में होंगे और कौन से गैर ग्रीन। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ ग्रीन पटाखे जलाने का आदेश दिया है। दिल्ली के सदर बाजार एवं जामा मस्जिद के पीछे लगने वाले पटाखा बाजार के थोक कारोबारियों को भी ग्रीन पटाखे का पता नहीं चल पा रहा है। सालों से सिर्फ पटाखे का काम करने वाले इन कारोबारियों का कहना है कि यही वजह है कि उन्होंने पटाखा बेचना बंद कर दिया है। सरकार की तरफ से ग्रीन पटाखे को लेकर गाइडलाइंस जारी होने के बाद ही फिर से पटाखे की बिक्री शुरू हो सकती है। इस साल दिवाली से पहले ग्रीन पटाखे की परिभाषा तय होना संभव नहीं दिख रहा है। एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट में तमिलनाडु फायरवर्क्स एंड एमोरसेस मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन  के महासचिव के. मरिअप्पन ने ग्रीन पटाखे पर कहा है कि ग्रीन पटाखे जैसी कोई चीज नहीं होती है। उनका कहना है कि कोर्ट के आदेश के बाद से वे लगातार मीडिया को यह बात बता रहे हैं।

 

नीरी की खोज ग्रीन पटाखा

पर्यावरण मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक सरकार अभी ग्रीन पटाखे पर रिसर्च कर रही है। सरकार की एक रिपोर्ट के मुताबिक ‘ग्रीन पटाखे' राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) की खोज है। ये पटाखे पारंपरिक पटाखों जैसे ही होते हैं पर इनके जलने से कम प्रदूषण फैलता है। नीरी एक सरकारी संस्थान है जो वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के अधीन है। नीरी ने ग्रीन पटाखों पर इस साल जनवरी में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन के उस बयान के बाद शोध शुरू किया था जिसमें उन्होंने ग्रीन पटाखे की जरूरत बताई थी।

 

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अगले साल मिलेंगे ग्रीन पटाखे

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि ग्रीन पटाखे अगले साल तक मार्केट में उपलब्ध हो जाएंगे। सीएसआईआर की 3 प्रयोगशालाओं ने मिलकर इन पटाखों को तैयार किया है और इनका परीक्षण हो चुका है। सामान्य पटाखों के मुकाबले ग्रीन पटाखों को जलाने से सूक्ष्म कणों का उत्सर्जन 30 से 40% कम होता है तो सल्फर डायऑक्साइड का उत्सर्जन 50 से 60% तक कम बताया गया। ये पारंपरिक पटाखों की तुलना में 15 से 30% तक किफायती भी हैं। इसके अलावा पटाखों की ई-लड़ियाँ भी तैयार की गयी हैं, जो बैटरी से जलेंगी। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक ये पटाखे राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी), केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीरी) और केंद्रीय इलेक्ट्रो रसायन अनुसंधान संस्थान (सिक्री) द्वारा तैयार किए गए हैं।

 

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ग्रीन पटाखों से अनजान हैं दिल्ली के पटाखा व्यापारी

दिल्ली के पटाखा व्यापारियों ने मनी भास्कर को बताया कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले तक ग्रीन पटाखों का नाम तक नहीं सुना था। सदरबाजार के एक पटाखा व्यापारी राजेन्द्र सैनी बताते हैं, ‘बाजार में ग्रीन पटाखे नहीं हैं और पुराने पटाखे हम बेच नहीं सकते हैं, इसलिए दिल्ली पुलिस के कहने के बाद हमने दुकानों पर ताला लगा दिया है। पिछले पांच दिनों से दिल्ली के जामा मस्जिद, सदर बाजार, कुतुबरोड समेत सभी जगहों की पटाखा दुकानों पर ताले लटके हैं। इनमें लाइसेंसी व अस्थाई लाइसेंसी दोनों तरह की दुकानें शामिल हैं। एक अनुमान के मुताबिक दिल्ली के थोक पटाखा बाजार से दिवाली के दौरान 500 करोड़ रुपए का कारोबार होता है।

 

 

 

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