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'न्‍यू इंडिया 2022' के लिए जल्‍द आएगा डेवलपमेंट एजेंडा, एडवांस स्‍टेज में है प्रोसेस- नीति आयोग

नीति आयोग जल्‍द ही न्‍यू इंडिया 2022 के लिए डेवलपमेंट एजेंडा पेश करेगा।

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नई दिल्‍ली. नीति आयोग जल्‍द ही न्‍यू इंडिया 2022 के लिए डेवलपमेंट एजेंडा पेश करेगा। यह एजेंडा इकोनॉमिक ग्रोथ में तेजी लाने की स्‍ट्रैटेजी दर्शाएगा। यह बात नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार ने कही है। कुमार के मुताबिक, यह प्रक्रिया एडवांस स्‍टेज में है और आयोग इस एजेंडा के डॉक्‍युमेंट को अंतिम रूप देने के बाद 15 वर्षीय विजन डॉक्‍युमेंट पर काम शुरू करेगा। 

 

दरअसल नीति आयोग की योजना 3 डॉक्‍युमेंट्स पर काम करने की है। इनमें 3 वर्षीय एक्‍शन एजेंडा, 7 वर्षीय मीडियम टर्म स्‍ट्रैटेजी पेपर और 15 वर्षीय विजन डॉक्‍युमेंट शामिल है। नीति आयोग ने पिछले साल एक प्रेजेंटेशन में कहा था कि देश को 6 समस्‍याओं- गरीबी, गंदगी, भ्रष्‍टाचार, आतंकवाद, जातिवाद और सांप्रदायिकता से आजाद करने के लिए नींव 2022 तक तैयार हो जाएगी। 

 

मुनाफे वाले PSUs में इक्विटी की संभावित वैल्‍यू लगा रहे पता 

पब्लिक सेक्‍टर यूनिट्स (PSUs) के डिसइन्‍वेस्‍टमेंट से जुड़े सवाल पर कुमार ने कहा कि मुनाफा देने वाले कुछ PSUs में इक्विटी की संभावित वैल्‍यू का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए उनकी परफॉरमेंस को बेहतर बनाने और उनकी इक्विटी के हिस्‍से को मॉने‍टाइज करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि सरकार को लाभ हो सके। बता दें कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने नीति आयोग से सरकारी कंपनियों के डिसइन्‍वेस्‍टमेंट की व्‍यावहारिकता का आकलन करने को कहा था। आयोग अभी तक 40 खराब परफॉरमेंस वाली PSUs के स्‍ट्रैटेजिक डिसइन्‍वेस्‍टमेंट की सिफारिश कर चुका है। सरकार को उम्‍मीद है कि इस वित्‍त वर्ष में वह PSU के डिसइन्‍वेस्‍टमेंट से 80,000 करोड़ रुपए जुटा लेगी। 

 

बैंकों के प्राइवेटाइजेशन पर और एनालिसिस की जरूरत

पीएनबी समेत हाल ही के सभी बैंकिंग फ्रॉड का जिक्र करते हुए कुमार ने सलाह दी कि इन मामलों को पब्लिक सेक्‍टर बैंक में कॉरपोरेट गवर्नेंस देखेने वाली पीजे नायक कमेटी को देखना चाहिए। इस कमेटी ने सरकारी बैंकों में गवर्नेंस को बेहतर बनाने के कुछ उपाय भी दिए थे। इसमें बैंकों की होल्डिंग कंपनी की स्‍थापना भी शामिल है। कुमार ने कहा कि पब्लिक सेक्‍टर बैंकों के प्राइवेटाइजेशन को लेकर थोड़े और एनालिसिस की जरूरत है। 

 

पूरे देश में एक साथ चुनावों से निकलेंगे बेहतर फैसले 

कुमार ने पूरे देश में एक ही समय पर चुनाव किए जाने के प्रस्‍ताव का भी समर्थन किया। उन्‍होंने कहा कि ऐसा होने से बार-बार चुनाव होने की स्थिति में निर्णय लेने को लेकर रहने वाला दबाव कम होगा, जिससे इकोनॉमी के मामले में बेहतर फैसले लिए जा सकेंगे। आगे कहा कि एक ही समय पर पूरे देश में चुनाव के लिए सबसे महत्‍वपूर्ण वजह है कि लगातार चुनावों से वोटर्स की संख्‍या घट सकती है। इससे पूरी चुनावी और डेमोक्रेटिक प्रोसेस की विश्‍वसनीयता खत्‍म हो जाएगी। बता दें कि राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी भी संसद और राज्‍यों की विधानसभाओं के समक्ष एक ही समय पर चुनावों का  
प्रबल समर्थन कर चुके हैं।  

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