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संसद से एक किमी की दूरी पर बसे इस मशहूर बाजार में मोदी के डिजिटल इंडिया को ठेंगा

दिल्ली के जनपथ पर लगने वाले बाजार में सिर्फ कैश में होता है कारोबार

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वर्षा पाठक

संसद से महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित दिल्ली का मशहूर बाजार जनपथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को सरेआम ठेंगा दिखा रहा है। जनपथ के इस बाजार में जिंस, बैग, जूतों टी-शर्ट जैसे आइटम दुकानों के मुकाबले सस्ते दाम पर बेचे जाते हैं, इसलिए दोपहर 2 बजे से रात 9 बजे तक ग्राहकों की भारी भीड़ रहती है। मोलभाव भी इस बाजार में खूब होते हैं। दिल्ली के बाहर से आने वाले लोग भी इस बाजार में खरीदारी करने आते हैं। लेकिन वर्षों से लगने वाले इस बाजार में सिर्फ और सिर्फ कैश पेमेंट होता है। मतलब अगर आप किसी भी प्रकार के कार्ड से इस बाजार में भुगतान करना चाहते हैं तो खरीदारी नहीं कर सकते हैं। आपकी जेब में नकद रकम होनी चाहिए। यहां पेटीएम तक से भुगतान की सुविधा नहीं है। नोटबंदी के बाद सरकार की तरफ से ऐलान किया गया था कि हर दुकान पर कार्ड पेमेंट के लिए पीओएस मशीन होगी। लेकिन जनपथ पर लगने वाले लगभग 200 दुकानदारों में किसी के पास कोई मशीन नहीं है।

 

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इसलिए नहीं होता यहां  कार्ड पैमेंट 

 

मनी भास्कर की रिपोर्टर ने पड़ताल किया तो पाया कि जनपथ में कुल 200 दुकानें हैं जिनमें सिर्फ दो दुकानों में ही कार्ड से पैमेंट करने की सुविधा थी। पांच दुकानों में पीएटीएम की सुविधा है बाकी सभी दुकानोंं में कैश से ही लेनदेन है। जनपथ मार्केट के प्रधान एम.पी शर्मा ने मनी भास्कर को बताया कि 'जनपथ मार्केट का इतिहास लगभग 150 साल पुराना है। उन्होंने बताया कि  पेमेंट के लिए पक्की रसीद देनी पड़ती है। जिनकी अपनी दुकान हैं या जिनके पास यहां दुकान लगाने का लाइसेंस है, वे तो पक्की रसीद दे सकते हैं, लेकिन जिनकी दुकान अपनी नहीं है या जिनके पास लाइसेंस नहीं है, वे पक्की रसीद नहीं दे सकते हैं। इसलिए यहां कार्ड पैमेंट की सुविधा नहीं है।

वे बताते हैं, यहां अस्थाई व्यापारी भी आते हैं, जो एक दिन कारोबार करने के बाद अगले दिन इस मार्केट में नहीं आते हैं। इसलिए यहां डिजिटल पेमेंट संभव नहीं है।

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6 फीसदी टैक्स कटता है इसलिए नहीं रखते मशीन

 

जनपथ से सटे पालिका बाजार के एक कारोबारी मो. शमीम बताते हैं, यहां आने वाले ग्राहकों में अधिकतर कॅालेज के स्टूडेंट्स होते हैं जो पॅाकेट मनी बचा कर शॅापिंग करते हैं ऐसे में वे खुद कार्ड का इस्तेमाल नहीं करते हैं। उनके पास कैश ही होता है। वहीं कार्ड से पैमेंट करने पर 6 फीसदी टैक्स कटता है। 200 रुपए के कपड़े पर अगर हम 6 फीसदी टैक्स ही भर देंगे तो क्या कमाएंगे।

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