सरकार के वो 5 बड़े आर्थिक फैसले, जो 2019 में बदल देंगे आपकी जिंदगी, जानिए कैसे होगा इनका असर

केंद्र की मोदी सरकार 2014 में देश के आर्थिक हालात बदलने के वादे के साथ सत्ता में आई। केंद्र सरकार की ओर से साढ़े साल के कार्यकाल में कई बड़े आर्थिक फैसले लिए गए। सरकार ने दावा किया कि ये आर्थिक फैसले उस कड़वी दवा की तरह है, जो शुरू में थोड़ा कष्ट देगी, लेकिन वक्त बीतने के साथ इसका असर  दिखने को मिलेगा।

Money Bhaskar

Dec 31,2018 05:03:00 PM IST

नई दिल्ली. केंद्र की मोदी सरकार 2014 में देश के आर्थिक हालात बदलने के वादे के साथ सत्ता में आई। केंद्र सरकार की ओर से साढ़े साल के कार्यकाल में कई बड़े आर्थिक फैसले लिए गए। सरकार ने दावा किया कि ये आर्थिक फैसले उस कड़वी दवा की तरह है, जो शुरू में थोड़ा कष्ट देगी, लेकिन वक्त बीतने के साथ इसका असर दिखने को मिलेगा। देश की आम जनता ने मोदी सरकार के बातों पर आंख मूंदकर भरोसा किया। अब मोदी सरकार का 5 साल का कार्यकाल अपने अंतिम पड़ाव पर है। ऐसे में इन फैसलों और उनका साल 2019 में असर के बारे चर्चा चल पड़ी है। साल 2019 के शुरुआती माह में लोकसभा का आम चुनाव है। इसमें मोदी सरकार के आर्थिक फैसलों का नतीजा वोटों की शक्ल में बाहर आएगा। हालांकि इससे पहले हम ये बता रहे हैं कि लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार कौन से बड़े आर्थिक फैसले ले सकती है और उनका देश लोगों पर क्या असर होगा। साथ ही जो फैसले पहले लिए गए उनका क्या असर रहा।


यूनिवर्सल बेसिक इनकम (UBI)


मोदी सरकार लोकसभा चुनाव से पहले यूनिवर्सल बेसिक इनकम (UBI) स्कीम का ऐलान कर सकती है। इसके तहत देश के हर नागरिक के खाते में एक निश्चित रकम डाली जाएगी। इससे उन्हें बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। वित्त मंत्रालय के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक अगर सब ठीक रहा, तो वित्त मंत्री अरुण जेटली फरवरी 2019 के अंतरिम बजट में यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम का ऐलान कर सकते हैं। इसमें देश के 20 करोड़ लोगों को इस स्कीम में शामिल किया जा सकता है। मोदी सरकार इस स्कीम पर दो साल से काम कर रही है।

मध्य प्रदेश में साल 2010 से 2016 तक चले पायलट प्रॉजेक्ट में काफी सकारात्मक नतीजे आए थे। इंदौर के 8 गांवों की 6,000 की आबादी के बीच पुरुषों और महिलाओं को 500 और बच्चों को हर महीने 150 रुपये दिए गए। तेलंगाना और झारखंड में यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम के समान एक स्कीम लागू है। विश्व के कई देश अलग-अलग स्तर पर अपने नागरिकों को ये सुविधा दे रहे हैं. इनमें साइप्रस, फ्रांस, अमेरिका के कई राज्य, ब्राजील, कनाडा, डेनमार्क, फिनलैंड, जर्मनी, नीदरलैंड, आयरलैंड, लग्जमबर्ग जैस देश शामिल हैं।


उज्जवला योजना

मोदी सरकार देश की माओं को धुएं में खाना पकाने से निजात दिलाने के लिए सौभाग्य योजना शुरु की थी। इसके तहत देश के हर घर की रसोई में गैस का चूल्हा देने का वादा किया था। केंद्र सरकार ने इसके लिए दिसंबर 2019 तक की डेडलाइन तक की थी। उज्जवला योजना की शुरुआत पीएम मोदी ने 2016 में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से की थी। योजना के तहत 8 करोड़ कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया था। मई 2018 तक इस योजना के तहत साढ़े तीन करोड़ परिवारों को मुफ्त में एलपीजी कनेक्शन दिए गए। उज्जवला योजना की डेडलाइन 2019 के गणतंत्र दिवस तक तय की है। यह पीएम मोदी की सबसे सफल योजनाओं में से एक रही है। हालांकि एलपीजी सिलेंडर रिफिल करान की कीमत में आए दिन होने वाले इजाफे से विरोधियों को मौका दे दिया है। साथ ही समय पर सब्सिडी न मिलने से आम लोग परेशान हैं।


सौभाग्य योजना


मोदी सरकार ने हर घर को बिजली पहुंचाने के लिए 2017 में सौभाग्य योजना की शुरूआत की थी। इस योजना के पूरे होने की डेडलाइन मार्च 2019 रखी गयी थी, जिसे बढ़ाकर दिसंबर 2019 कर दिया गया है। इस योजना के तहत प्रतिदिन 1 लाख घरों तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना की कुल लागत 16, 320 करोड़ रुपए है। योजना पर आने वाले कुल खर्च का 40 फीसदी केंद्र सरकार उठाएगी, जबकि 10 फीसदी राज्यों को देना होगा। बाकी का 30 फीसदी बैंक लोन से पूरा होगा। इस पूरे बजट में से 14025 करोड़ रुपया ग्रामीण क्षेत्रों पर खर्च किया जाएगा। इस योजना के ऐलान के वक्त मोदी सरकार ने ऐलान किया था कि जहां तक संभव होगा हर घर तक बिजली पहुंचाई जाएगी। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो हर एक घर को सोलर लाइन दी जाएगी।


प्रधानमंत्री आवास योजना


मोदी सरकार 2019 के चुनाव को नजदीक देखते हुए अपनी योजनाओं को जल्द से जल्द लागू करने में जुटी हुई है। केंद्रीय शहरी एवं आवास मंत्रालय ने वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहरों इलाकों में एक करोड़ घरों के निर्माण करने में जुटी है। इस योजना को पूरा करने लिए 2022 की डेडलाइन तय की गई है। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सरकार इसका कुछ हिस्से को बतौर अपनी उपलब्धि दिखाना चाहती है। मंत्रालय ने कई प्रमुख कार्यक्रमों और योजनाओं का तेजी से क्रियान्वयन अनिवार्य कर दिया है।

सरकार ने 2020 तक एक करोड़ घरों को से मंजूरी देने का काम किया है।

जन धन योजना


मोदी सरकार की ओर से प्रधानमंत्री जन-धन योजना को काफी जोरशोर से शुरु किया गया था। इसके तहत सरकार हर एक व्यक्ति को बैंक खाते से जोड़ना चाहती थी। इसके तहत 33.61 करोड़ से ज्यादा लोगों के जीरो बैलेंस पर खाते खुलवाए गए। सरकार ने संसद के इसी शीतसत्र 2018 में एक सवाल के जवाब में बताया है कि इन जन-धन योजना खातों में जमा राशि करीब 85,913 करोड़ रुपये है।

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