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चुनावी घोषणाओं को पूरा करने के लिए मोदी सरकार नए वित्त वर्ष की पहली ही छमाही में लेगी बड़ा कर्ज, चुनाव आयोग से मांगी अनुमति

वित्‍त वर्ष 2019-20 की पहली छमाही में सरकार लेगी 4.42 लाख करोड़ रुपए का कर्ज, वित्‍त मंत्रालय ने किया खुलासा

In the first half of the financial year 2019-20, the government will take a loan of Rs 4.42 lakh crore

केंद्र की मोदी सरकार नए वित्त वर्ष की पहली ही छमाही में बड़ा कर्ज लेने जा रही है। वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि सरकार वित्त वर्ष 2019-20 की पहली छमाही में 4.42 लाख करोड़ रुपए का कर्ज लेगी।

नई दिल्ली. केंद्र की मोदी सरकार नए वित्त वर्ष की पहली ही छमाही में बड़ा कर्ज लेने जा रही है। वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि सरकार वित्त वर्ष 2019-20 की पहली छमाही में 4.42 लाख करोड़ रुपए का कर्ज लेगी। आम बजट के अनुसार  2019-20 के लिए सकल कर्ज 7.1 लाख करोड़ रुपए रहेगा, जो चालू वित्‍त वर्ष के अनुमानित 5.71 लाख करोड़ रुपए के कर्ज से बहुत अधिक होगा। ऐसा माना जा रहा है कि किसानों को छह हजार रुपए समेत कई चुनावी घोषणाओं को पूरा करने के लिए इस रकम की जरूरत है। 

 

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नए कर्ज से पुरानी उधारी की किस्तें भी चुकाएगी सरकार 

 

आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने 2019-20 के कर्ज कार्यक्रम के बारे में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि अप्रैल से सितंबर की अवधि में सकल कर्ज 4.42 लाख करोड़ रुपए होगा। इस दौरान शुद्ध कर्ज 3.40 लाख करोड़ रुपए रहेगा। सकल कर्ज में पुराने कर्जों की किस्तें भी शामिल होती हैं।  

 

राजकोषीय घाटा तय सीमा में ही रहेगा 

 

गर्ग ने कहा कि सरकार चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.4 प्रतिशत के दायरे में राजकोषीय घाटा को बनाए रखेगी। बजट में 2019-20 के लिए 7.10 लाख करोड़ रुपए के सकल कर्ज का लक्ष्य तय किया गया था। चालू वित्त वर्ष के लिए सकल कर्ज का अनुमान 5.71 लाख करोड़ रुपए है। सरकार अपने राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए प्रतिभूतियों और ट्रेजरी बिल के माध्‍यम से बाजार से कर्ज जुटाती है। बजट में, 2019-20 के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी के 3.4 प्रतिशत पर बनाए रखने का लक्ष्‍य तय किया गया है।

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