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Home » Economy » PolicyModi Government will distribute induction cooker to all families of country after 100% Electricity

जनवरी के अंत तक हर घर में आ जाएगी बिजली, फिर सरकार देगी इंडक्शन कुकर

ग्रामीणों की गैस सिलेंडर भरवाने की चिंता दूर होगी

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नई दिल्ली। देश के हर घर में जनवरी के अंत तक बिजली की पहुंच सुनिश्चित हो जाएगी। इसके लिए सरकार द्वारा शुरू की गई सौभाग्य योजना के तहत 2.44 करोड़ परिवारों को बिजली कनेक्शन मिल चुका है। कुल लक्ष्य 2.48 करोड़ परिवारों तक बिजली पहुंचाने का है। इस काम के पूरा होते ही सरकार ग्रामीण इलाके में इंडक्शन कुकर वितरण का कार्यक्रम शुरू कर सकती है। इंडक्शन कुकर को ग्रीन फ्यूल के रूप में देखा जा रहा है। 

 

पिछले साल ही तय हो गया था कार्यक्रम

बिजली मंत्रालय का मानना है कि इससे कई प्रकार के फायदे होंगे। लकड़ी जैसे जलावन के इस्तेमाल नहीं होने से पर्यावरण को फायदा होगा, वहीं बिजली के अधिक इस्तेमाल से बिजली कंपनियों को भी फायदा होगा। देश में बिजली उत्पादन क्षमता 3.5 लाख मेगावाट से अधिक हो चली है, लेकिन बिजली की मांग उत्पादन क्षमता का 60 प्रतिशत भी नहीं है। बिजली मंत्रालय के मुताबिक, पिछले साल ही इंडक्शन कुकर के वितरण का कार्यक्रम तैयार कर लिया गया गया था। अब देश के हर घर में बिजली पहुंचने के बाद इसे शुरू किया जा सकता है। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक, गैस चूल्हा से ज्यादा कारगर इंडक्शन कुकर है क्योंकि गैस खत्म होने के बाद गांववालों को सिलेंडर भरवाने की चिंता रहती है और उन्हें शहरों में जाना पड़ता है, लेकिन बिजली से चलने वाले कुकर के इस्तेमाल में ऐसी कोई परेशानी नहीं होगी।  

हर रोज 30 हजार परिवारों को मिल रही बिजली


मंत्रालय के मुताबिक, सरकार ने प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य) का शुभारंभ सितंबर, 2017 में किया था। इसका बजट 16,320 करोड़ रुपए है। एक अधिकारी ने बताया कि सौभाग्य
योजना के तहत तय किए गए 100 प्रतिशत घरों के विद्युतीकरण के लक्ष्य को इस माह के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा। आज की तारीख तक इसके तहत 2.44 करोड़ परिवारों को बिजली कनेक्शन
उपलब्ध कराया जा चुका है। अधिकारी ने कहा कि हर रोज 30,000 परिवारों को बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। इस प्रकार बचे हुए करीब चार लाख परिवारों को इस माह के अंत तक
बिजली कनेक्शन उपलब्ध हो जाएगा। देश के 100 प्रतिशत घरों तक बिजली पहुंचाना, वर्तमान सरकार का एक अहम लक्ष्य था। हालांकि, इसे दिसंबर, 2018 की तय समयसीमा में पूरा नहीं किया जा
सका, लेकिन इसके इस माह के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। केंद्रीय बिजली मंत्री आरके सिंह की अध्यक्षता में जुलाई, 2018 में राज्यों के बिजली मंत्रियों की शिमला में बैठक हुई। तब सौभाग्य
योजना को 31 मार्च, 2019 के वास्तविक लक्ष्य की बजाय 31 दिसंबर, 2018 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।

चुनाव और माओवादी समस्या से धीमी रही रफ्तार


अधिकारी के अनुसार, कुछ राज्यों में चुनाव और माओवादी समस्या के चलते काम की रफ्तार धीमी पड़ी है। जबकि कुछ राज्यों में ठेकेदारों से जुड़े मुद्दे सामने आए। सौभाग्य की वेबसाइट के अनुसार
चार राज्यों के करीब 3.58 लाख परिवारों तक बिजली पहुंचाने का काम शेष बचा है। इसमें असम के 1,63,016, राजस्थान के 88,219, मेघालय के 86,317 और छत्तीसगढ़ के 20,293 परिवार बचे हैं।
सौभाग्य योजना का लक्ष्य शहरी और ग्रामीण इलाकों में बचे हुए हर परिवार तक बिजली कनेक्शन पहुंचाना है।

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