कालेधन पर रोक के लिए मोदी सरकार का कॉर्पोरेट स्वच्छता मिशन, झूठे पते पर चलने वाली कंपनियों की खैर नहीं

 Modi government corporate cleanliness mission to stop black money काले धन  की  उत्पत्ति  और  परिचालन  को  रोकने  के  अंतिम  लक्ष्य  को  ध्यान  में  रखते  हुए  मुखौटा  कंपनियों  के  खिलाफ  कई  सारे  कड़े  कदम  उठाने  के  बाद  भारतीय  कॉर्पोरेट  क्षेत्र  को  और  अधिक  स्वच्छ  और  निर्मल  बनाने  के  लिए  मोदी  सरकार  ने  एक  बहुत  ही  महत्वाकांक्षी  कदम  उठाया  है  जिसमे  सभी  कंपनियों  को  दो  काम  करने  होंगे।

Money Bhaskar

Mar 10,2019 06:00:00 AM IST

नई दिल्ली। काले धन की उत्पत्ति और परिचालन को रोकने के अंतिम लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए मुखौटा कंपनियों के खिलाफ कई सारे कड़े कदम उठाने के बाद भारतीय कॉर्पोरेट क्षेत्र को और अधिक स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए मोदी सरकार ने एक बहुत ही महत्वाकांक्षी कदम उठाया है जिसमे सभी कंपनियों को दो काम करने होंगे। पहला काम कंपनी के पंजीकृत कार्यालय को भौगोलिक आधार पर चिन्हित करने, कम्पनी का अस्तित्व, पंजीकृत कार्यालय के चित्र और उसके पूर्ण पते का सत्यापन करना और दूसरा काम सभी कंपनियों के डिजिटल हस्ताक्षर करने वाले निदेशकों या प्रमुख व्यक्तियों (KMP) की जाँच करने के लिए उनकी पंजीकृत कार्यालय में उपस्थिति का सत्यापन करना और इसके लिए MCA ने एक नया फॉर्म निकाला है जो कि सभी कंपनियों को MCA की वेबसाइट पर जमा करना होगा।

नकली या झूठे पते पर पंजीकृत कंपनियों की होगी पहचान


इस फॉर्म के आने से ऐसी मुखौटा कंपनियों की पहचान भी हो सकेगी जो नकली या झूठे पते पर पंजीकृत हैं और साथ ही नकली हस्ताक्षरकर्ता निदेशक भी पकड़ में आएंगे। इस नए कदम को लेने से पहले भी मोदी सरकार ने भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर की सफाई करने के लिए काफी कड़े कदम उठाये थे जिनमें मुखौटा कंपनी को बंद करना (strike off), निदेशकों की पहचान करना, निदेशकों के DIN को आधार से लिंक करना और इसके अलावा लोन और डिपॉजिट का प्रकटीकरण (disclosure) एक नए फॉर्म में करना और इसके अलावा पोंजी स्कीम पर रोक लगाना आदि । वर्तमान में लिया गया यह सरकार का एक बड़ा कदम है जो भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर को और स्वच्छ करेगा और इससे विश्व भर में Ease of Doing Business की श्रेणी में भारत की स्थिति सुधरेगी ।


सरकार ने रजिस्टर्ड ऑफिस की भौगोलिक टैगिंग शुरू करने का फैसला लिया


काले धन की जांच में लगी एजेंसियों के सामने ऐसे कई केस हुए थे जिनमें मुखौटा कंपनियों के डायरेक्टर अपनी जिम्मेदारियों से ये कह कर बच निकल जाते थे कि उन्हें तो इस बात की जानकारी ही नहीं है कि वो इस कंपनी में डायरेक्टर है और तो और, वह यह भी कहते थे कि उन्होंने तो कंपनी के पंजीकृत कार्यालय की शक्ल भी नहीं देखी है दूसरी और शेयर होल्डर की कोई क़ानूनी तौर पर कोई जिम्मेदारी नहीं होती है। वहीँ दूसरी ओर कंपनी के असली प्रमोटर और काले धन के शोधन के खिलाड़ी अपने खेल खेलते रहते थे और उनका कंपनी में कहीं कोई नाम और जिम्मेदारी नहीं थी । ऐसे में किसी न किसी की जिम्मेदारी तय हो ताकि क़ानूनी प्रक्रिया को सिरे चढ़ाया जा सके इसके लिए ही मोदी सरकार ने यह कदम बढ़ाया है जिसमें हस्ताक्षरकर्ता निदेशकों की जिम्मेदारियों को तय करने और कंपनी के रजिस्टर्ड ऑफिस की वास्तविकता का सत्यापन करने के लिए सरकार ने रजिस्टर्ड ऑफिस की भौगोलिक टैगिंग शुरू करने का फैसला लिया। जिसके लिए कंपनी (निगमन) संशोधन नियम, 2019 दिनांक 25 फरवरी 2019 को पारित किया गया है जिसमें अधिकतम 25 april 2019 तक अर्थात 60 दिनों के अंदर-अंदर ई-प्रपत्र 'सक्रिय' (सक्रिय कंपनी टैगिंग पहचान और सत्यापन) दाखिल करना होगा और यह उन सभी कंपनियों जो 31 दिसंबर 2017 या उसे पहले निगमित सभी कंपनियों पर लागू होगा। इसके अलावा, MCA की वेबसाइट के मास्टर डाटा में कंपनी के नियम अनुपालन की स्थिति (अनुपालित और गैर-अनुपालित) भी दर्शाई जाएगी जो कि फॉर्म दाखिल करने की स्थिति के अनुसार आवंटित की जाएगी ।

बिना किसी शुल्क या भुगतान के दाखिल किया जा सकेगा यह फॉर्म


MCA ने कंपनियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया है कि वे उस भवन के अंदर व बाहर के चित्र भी इस ई-फॉर्म में लगाएं जिसमें कंपनी के रजिस्टर्ड ऑफिस स्थित है। साथ ही ऑफिस में हस्ताक्षरकर्ता निदेशक या सबंधित हस्ताक्षरकर्ता KMP की उपस्थिति को सुनिश्चित करने के लिए उनका भी चित्र लेना भी अनिवार्य किया गया है जो डिजिटल हस्ताक्षर दाखिल करते समय संलग्न किया जाएगा। इसके अलावा इस फॉर्म को पेशेवर प्रैक्टिस कर रहे सीए, सीएस या सीएमए द्वारा प्रमाणित किया जाएगा जिनकी जिम्मेदारी यह भी होगी कि वो कंपनी का अस्तित्व, इसकी ई-मेल आईडी और इसके रजिस्टर्ड ऑफिस की सत्यता की जांच करें व सत्यापन के बाद ऐसे सभी रिकॉर्ड अपनी फाइलों में अपनी अभिरक्षा में रखेंगे। यह फॉर्म बिना किसी शुल्क या भुगतान के दाखिल किया जा सकेगा। यदि कंपनी ने अपने वित्तीय विवरण या वार्षिक रिटर्न दाखिल नहीं किए हैं तो ऐसी कंपनी को यह फॉर्म दाखिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

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