Utility

24,712 Views
X
Trending News Alerts

ट्रेंडिंग न्यूज़ अलर्ट

बिज़नेस न्यूज़ » Economy » Policy1 लाख करोड़ रु. आएगी नेशनल हेल्‍थ प्रोटेक्‍शन स्‍कीम की लागत, सरकारी खजाने पर पड़ेगा भारी बोझ: NIPFP

1 लाख करोड़ रु. आएगी नेशनल हेल्‍थ प्रोटेक्‍शन स्‍कीम की लागत, सरकारी खजाने पर पड़ेगा भारी बोझ: NIPFP

नई दिल्‍ली. बजट में गरीबों के लिए घोषित मेगा हेल्‍थकेयर प्‍लान की लागत सालाना लगभग 1 लाख करोड़ रुपए आएगी। साथ ही इससे राज्‍यों के हेल्‍थ सेक्‍टर में अपनी पॉलिसी डिजाइन करने के अधिकार कम हो जाएंगे। यह बात नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी (NIPFP) की असिस्‍टेंट प्रोफेसर मीता चौधरी द्वारा तैयार एक रिसर्च पेपर में कही गई। इस पेपर में लगाया गया अनुमान नीति आयोग के सलाहकार आलोक कुमार द्वारा जताए गए अनुमान से 10 गुना ज्‍यादा है। पिछले सप्‍ताह अपने अनुमान में कुमार ने कहा था कि नेशनल हेल्‍थ प्रोटेक्‍शन स्‍कीम (NHPS) की लागत लगभग 10,000-12,000 करोड़ रुपए सालाना आएगी। 

 

बहुत ज्‍यादा संसाधनों की होगी जरूरत 

मीता चौधरी का रिसर्च पेपर 'द नेशनल हेल्‍थ प्रोटेक्‍शन स्‍कीम इन द यूनियन बजट 2018: इज इन द राइट डायरेक्‍शन?' नाम से है। उन्‍होंने इसमें कहा है कि NHPS को लागू करने के लिए बहुत ज्‍यादा संसाधनों की जरूरत पड़ेगी। आगे कहा कि ऐसी स्‍कीम न केवल केन्‍द्र और राज्‍यों के कोष पर भारी बोझ डालेगी, बल्कि यह राज्‍यों द्वारा इस सेक्‍टर में अपनी पॉलिसी डिजाइन करने के उनके अधिकारों को भी कम कर देगी, जबकि राज्‍यों को यह अधिकार संवैधानिक रूप से प्राप्‍त हैं। 

 

2 फीसदी प्रीमियम पर भी कम नहीं होगी लागत 

अगर किसी के लिए बीमा के अमाउंट पर प्रीमियम की दर 2 फीसदी मानी जाए तो भी यह स्‍कीम लगभग 1 लाख करोड़ रुपए सालाना की लागत वाली होगी। अगर यह मान लें कि इस बोझ का 60 फीसदी केन्‍द्र सरकार वहन करेगी और बाकी का राज्‍य तो भी केन्‍द्र को सालाना 60 हजार करोड़ रुपए के अतिरिक्‍त फंड की जरूरत होगी, जबकि स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय और आयुष मंत्रालय को कुल मिलाकर केवल 55,000 करोड़ रुपए के आस-पास आवंटन किया गया है। आगे कहा कि अगर पूरे 11,000 करोड़ रुपए शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य पर लगाए गए 1 फीसदी अतिरिक्‍त सेस से जुटाए जाएं, तो भी फंड की कमी बनी रहेगी। बता दें कि नीति आयोग के सदस्‍य और इस स्‍कीम के निर्माता विनोद कुमार कह चुके हैं कि शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य पर 1 फीसदी अतिरिक्‍त सेस इस स्‍कीम की लागत पूरी करने के लिए पर्याप्‍त है। 

 

ऐसी स्‍कीम बहुत ही खर्चीला मॉडल 

रिसर्च पेपर में यह भी कहा गया कि दुनिया में इस बात के प्रमाण मौजूद हैं कि इस तरह का इंश्‍योरेंस बेस्‍ड हेल्‍थ केयर प्रावधान सरकार की फाइनेंशियल हेल्‍थ के लिए बहुत ही खर्चीला मॉडल है। 

और देखने के लिए नीचे की स्लाइड क्लिक करें

Trending

NEXT STORY

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.