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'आपका दूध कितना सफेद है' 2 लाख किसानों को इस अभियान से जोड़ने की तैयारी

'नेशनल मिल्क डे' पर मूफॉर्म ने लांच किया अभियान

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मनी भास्कर

 

नई दिल्ली। 'आपका दूध कितना सफेद है', यह अभियान 26 नवंबर को 'नेशनल मिल्क डे' के मौके पर मूफॉर्म ने लांच किया है। इस अभियान से दूध में मिलावट की वजह से बढ़ती शंका को दूर करना एवं जागरूकता फैलाना है। मूफॉर्म डेयरी कारोबार से जुड़े 2 लाख किसानों को इस अभियान से जोड़ने जा रही है। ताकि दूध की महत्ता भी बनी रहे और किसानों की आय में बढ़ोतरी हो सके। सफेद क्रांति के जनक डॉ. कूरियन के जन्मदिन पर हर साल 26 नवंबर को नेशनल मिल्क डे मनाया जाता है।

 

मूफॉर्म के संस्थापक परम सिंह ने बताया , 'हम इस अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाएंगे। क्योंकि इन दिनों भारत में दूध की शुद्धता को लेकर काफी शंका होने लगी है।' उन्होंने बताया, 'वर्ष 2020 तक भारत में दूध की गुणवत्ता एवं मात्रा दोनों में बढ़ोतरी के लिए मूफॉर्म 2 लाख किसानों को प्रशिक्षित करने जा रही है। पंजाब के संगरूर में अब तक 4000 किसानों को प्रशिक्षित करने का काम हो चुका है और जल्द ही हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश में 9000 से अधिक किसानों को मूफॉर्म प्रशिक्षित करने जा रही है। इस काम में भारत सरकार के स्किल डेवलपमेंट काउंसिल की मदद ली जा रही है।'

 

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35 फीसदी तक बढ़ेगी किसानों की आय

 

सिंह ने बताया कि डेयरी कारोबार चलाने वाले किसानों को प्रशिक्षित करने से उनकी आय में एक साल में कम से कम 35 फीसदी तक का इजाफा होगा। उन्होंने बताया कि मूफॉर्म प्रशिक्षण के दौरान किसानों को अपने ऐप से जोड़ता है जिसके माध्यम से किसानों को उनकी मवेशियों को लेकर अलर्ट भेजे जाते हैं। इस काम में मूफॉर्म के ग्रामीण उद्यमी किसानों की मवेशियों के फोटोउनकी बीमारीरोजाना का उनका उत्पादन सारी जानकारी ऐप पर अपलोड करते हैं। इससे मवेशियों को होने वाली बीमारी के बारे में पहले ही पता चल जाता है या फिर तस्वीर के माध्यम से ही बीमारी देखकर किसानों को दवाई मुहैया करा दी जाती है। इससे वेटनरी डाक्टर को बुलाने का खर्च बच जाता है जो एक बार में कम से कम 500 रुपए तक होता है। हर 50 किसान पर मूफॉर्म एक ग्रामीण उद्यमी रखती है जिसे 10-15 रुपए मासिक तनख्वाह दी जाती है।

 

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किसानों को मिल सकेंगे लोन

 

सिंह ने बताया कि मूफॉर्म से जुड़ने वाले किसानों की मवेशियों की पूरी जानकारी ऐप पर आ जाती है। इससे एक डाटा बैंक बन जाता है। लोन देने वाली वित्तीय संस्थाओं को यह आसानी से पता लग सकता है कि किसान के पास कितनी मवेशी हैरोजाना का कितना उत्पादन हैउससे किसान कितनी कमाई करता है। ऐसे में लोन देने में आसानी होती है। उन्होंने बताया कि मूफॉर्म एक ऑस्ट्रेलियन कंपनी है जो भारत में डेयरी प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए उदय नामक कंपनी का साथ ले रही है।

 
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