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प्राइवेट नौकरी करने वालों को सरकार देगी लेबर कोड, मिलेंगी कई सुविधाएं

इसके तहत स्टाफिंग कंपनियों को मिलेगा तीन साल का नेशनल लाइसेंस

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नई दिल्ली। प्राइवेट नौकरी करने वाले कर्मचारियों के स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सरकार जल्द ही बड़ा कदम उठा सकती है। श्रम मंत्रालय देश में प्राइवेट नौकरी करने वाले लोगों की सुरक्षा आैर सेहत के लिए एक राष्ट्रीय बोर्ड गठित कर सकता है। इसके लिए मंत्रालय स्टेकहोल्डर्स से बातचीत कर रही है। साथ ही मंत्रालय नौकरियां देने वाली कंपनियों को भी नेशनल लाइसेंस दे सकता है। जल्द ही इस संबंध में मंत्रालय की तरफ से मसौदा जारी किया जाएगा। सरकार इसके तहत कर्मचारियों को लेबर कोड देने पर विचार कर रही है।

 

शीत सत्र में संसद में पेश हो सकता है कोड

ट्रेड यूनियन और कर्मचारियों के बीच इस हफ्ते होने वाली बैठक में उम्मीद है कि मजदूरों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और काम की सही परिस्थितियों के बारे में एक लेबर कोड को स्वीकृति मिल जाएगी। इसके बाद इसे संसद में पेश किया जाएगा। अगर सब सही चलता है तो संसद के शीत सत्र में ही इसे पेश कर दिया जाएगा।

 

होंगी ये सुविधाएं

इस काेड में कॉन्ट्रैक्ट पर नौकरी करने वाले कर्मी भी शामिल होंगे। कर्मचारियों की नौकरी और सभी सेक्टरों में कर्मियों को सही वर्किंग कंडीशन को रेगुलेट करने पर फोकस किया गया है। इसमें नेशनल ऑक्यूपेशनल सेफ्टी और हेल्थ एडवाइजरी बोर्ड का गठन करने का जिक्र किया गया है। यह दोनों संस्थाएं सरकार को वर्कर्स सेफ्टी के बारे में नियम और कानून बनाने में मदद करेंगी और यह भी देखेंगी कि उनका पालन ठीक से हो रहा है कि नहीं।

 

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बनाए जाएंगे नियम

फैक्ट्रियोंखदानोंनिर्माण स्थलों और अन्य जगहों पर काम करने वाले कर्मचारियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के मानक बोर्ड तय करेगा। इसमें शारीरिकरसायनिकजैविक और अन्य प्रकार के खतरों के संबंध में नियम बनाए जाएंगे जिससे किसी कर्मचारी को किसी भी तरह का शारीरिक या अन्य नुकसान न उठाना पड़े। इसमें नौकरियां देने वाली कंपनियों को राष्ट्रीय लाइसेंस देने की मांग को भी पारित किए जाने की बात कही गई है। इसके तहत स्टाफिंग कंपनियों को तीन साल के लिए लाइसेंस मिल जाएगा।

 

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मजदूर संघ ने दी स्वीकृति

 भारतीय मजदूर संघ के मुताबिक  यह एक निष्पक्ष बिल है जिसमें कुछ भी विवादित नहीं है। कर्मियों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय बाेड गठित होने से कंपनियां और मालिक अपने सभी कर्मचारियों की मूलभूत जरूरतों का ख्याल रखेंगी। यही वजह है कि भारतीय मजदूर संघ इस बिल को समर्थन दे रहा है।

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