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खास खबर: इमरजेंसी के लिए सरकार बढ़ा रही पेट्रोलियम रिजर्व, क्‍या हैं इसके मायने

नई दिल्‍ली. अमेरिका-फ्रांस और‍ ब्रिटेन की ओर से हाल में सीरिया पर किए गए हमले के बाद अंतरराष्‍ट्रीय स्तर पर समीकरण तेजी के साथ बदले हैं। अंतरराष्‍ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि आगे भी हमले जारी रहे तो अरब एक बार फिर से युद्ध की आंच में जल सकता है। ऐसे में कोई बड़ी बात नहीं है कि दुनिया एक बार फिर से क्रूड संकट से गुजरने लगे। 

हाल में आई एक और रिपोर्ट इस चिंता में घी डालने का काम करती है। इसके मुताबिक, अगर अरब में अशांति के चलते ऊर्जा संकट खड़ा हुआ तो सबसे ज्‍यादा हालत ऑस्‍ट्रेलिया की खराब होगी। उसके पास मात्र 40 दिनों का ही प्रोट्रोलियम रिजर्व है। बड़ा सवाल उठता है कि ऐसे अनचाहे संकट से निपटने के लिए आखिर भारत कितना तैयार है। आखिर भारत के पेट्रोलियम रिजर्व की क्षमता कितनी है। संकट के समय वह कितने दिनों तक बिना पेट्रोलियम इम्‍पोर्ट के अपना काम चला सकता है। मोदी सरकार ने आखिर इस दिशा में कितने कदम उठाए हैं। 

 

 

देश के पास मात्र 63 दिनों का पेट्रोलियम रिजर्व
आपातकाल के लिए पेट्रोलियम रिवर्ज की बात करें तो कई देशों की तरह ही भारत सरकार ने भी 1970 के दशक में इस मामले में सोचना शुरू किया। देश के पास मौजूदा समय में करीब 63 दिन का ऑयल रिजर्व है। 2016 में राज्‍यसभा में एक लिखित जवाब में पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यह जानकारी दी थी। इसमें 14.8 मिलियन टन (MMT) क्रूड ऑयल और 13.7 मि‍लियन टन (MMT) पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट के लिए है।  

 

 

सरकार बढ़ा रही है कि क्षमता 
फिलहाल सरकार पेट्रोलियम भंडारण की क्षमता पर लगातार काम कर रही है। 2006 में योजना आयोग की ओर से गठित एक्‍सपर्ट कमेटी ने देश में 90 दिनों का आयल रिजर्व रखने की सिफारिश  की थी। इसपर काम करते हुए इंडियन स्‍ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (ISPRL) ने 5.33 मिलियन टन की क्षमता के 3 रिजर्व डेवलप किए हैं। इसमें विशाखापत्‍तनम की क्षमता 1.33 MMT, मैंग्‍लोर की 1.5 MMT और पादुर की 2.5 MMT है। इसमें से जहां  विशाखापत्‍तनम और मैंग्‍लो सेंटर ने काम शुरू कर दिया है, जबकि पादुर सेंटर इस साल अक्‍टूबर में शुरू हो सकता है। 

 

 

12.5 MMT की क्षमता और बढ़ाने पर काम 

इसके अलावा सरकार दूसरे चरण में 12.5 MMT पेट्रोलियम एंड क्रूड के रिजर्व पर काम कर रही है। इसके तहत ओडिशा के चांदीखोल, कर्नाटक के पादुर, गुजरात के राजकोट और राजस्‍थान बीकानेर में पेट्रोलियम रिवर्ज सेंटर बनाने पर काम हो रहा है। चांदीखोल और बीकानेर रिजर्व सेंटर के लिए 2017-18 के बजट में फंड का आवंटन किया जा चुका है। अन्‍य दो सेंटर्स राजकोट और पादुर के लिए प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट तैयार हो चुकी है। इस फेज के तहत चांदीखोल में 3.75 MMT, पादुर में 2.5 MMT, राजकोट में 2.5 MMT और बीकानेर 3.75 MMT की रिजर्व की क्षमता वाले सेंटर विकसित होंगे। ये सभी सेंटर भूमिगत होंगे। 

 

सरकार कर रही दूसरे रास्‍तों पर काम 

स्‍ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व डेवलप करने के लिए अन्‍य विकल्‍पों पर काम कर रही है। इसके तहत सोलर, न्‍यूक्लियर एनर्जी और एलएनजी का इस्‍तेमाल ज्‍यादा से ज्‍यादा शुरू करना शामिल है। सरकार तेजी के साथ गेस बेस्‍ड इकोनॉमी पर जोर दे रहा है। देश की प्राइमरी एनर्जी में इस समय गैस का हिस्‍सा मात्र 6.5% है, जबकि ग्‍लोबल एवरेज करीब 24 फीसदी है। मोदी सरकार ने इसके लिए 2030 तक गैस के शेयर को 15 फीसदी पहुंचाने का लक्ष्‍य तय किया है। 

 

200 गीगा वाट्स रिन्‍यूएल एनर्जी का  प्‍लान 

सरकार सोलर और विंड पॉवर जैसी रीन्‍यूएल एनर्जी भी फोसक बढ़ा रही है। इसके तहत उसने 200 गीगावाट ग्रीन एनर्जी के प्रोडक्‍शन का लक्ष्‍य रखा है। सरकार ने इसी के तहत हाल में यूपी के मिर्जापुर में एकसोलर प्‍लांट की शुरुआत की है। मध्‍य प्रदेश के रीवा में दुनिया के बड़े सोलर प्‍लांट्स में से एक प्‍लांट लगाया जा रहा है। इस प्रोजेक्‍ट तहत 2020 तक 175 गीगावाट और अगले 2 साल में 25 गीगावाट की कैपेसिटी विकासित करने का प्‍लान है। मोदी सरकार इसके लिए टेंडर जारी कर चुकी है।   

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