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Lok Sabha Elections 2019: आपके एक वोट की कीमत है 46 रुपए, ऐसे होती है तय

वोटर को पोलिंग बूथ तक लाने में खर्च होता है मोटा पैसा

Do you know how much your vote costs?

Do you know how much your vote costs: इस साल चुनावों में 90 करोड़ लोग मतदान करने जा रहे हैं। जिस तरह से पहले लोकसभा चुनावों के मुकाबले वोटर्स की गिनती बढ़ी है, ठीक उसी तरह चुनावों का खर्च भी बढ़ा है। 2014 के चुनावों में कुल खर्च और वोटर को पोलिंग बूथ तक लाने में सबसे ज्यादा पैसा खर्च हुआ। प्रति वोटर आने वाला खर्च भी बढ़ा है। 1951-52 से लेकर 1977 तक हुए पहले छह लोकसभा चुनावों में प्रति वोटर खर्च एक रुपया भी नहीं था, जबकि 2014 के चुनावों में यह खर्च 46.4 रुपए रहा।

नई दिल्ली.

इस साल चुनावों में 90 करोड़ लोग मतदान करने जा रहे हैं। जिस तरह से पहले लोकसभा चुनावों के मुकाबले वोटर्स की गिनती बढ़ी है, ठीक उसी तरह चुनावों का खर्च भी बढ़ा है। 2014 के चुनावों में कुल खर्च और वोटर को पोलिंग बूथ तक लाने में सबसे ज्यादा पैसा खर्च हुआ। प्रति वोटर आने वाला खर्च भी बढ़ा है। 1951-52 से लेकर 1977 तक हुए पहले छह लोकसभा चुनावों में प्रति वोटर खर्च एक रुपया भी नहीं था, जबकि 2014 के चुनावों में यह खर्च 46.4 रुपए रहा।

 

 

सबसे सस्ता रहा था दूसरा लोकसभा चुनाव

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक देश में सबसे सस्ते चुनाव 1957 में हुए थे। ये देश का दूसरा लोकसभा चुनाव था, जिसमें महज 10 करोड़ रुपए का खर्च आया था।2014 में हुए चुनाव सबसे महंगे रहे। इससे पहले हुए सभी आम चुनावों के कुल खर्च का एक-तिहाई 2014 के चुनावों में खर्च किया गया। इस खर्च में मतदान केंद्र की स्थापना, पोलिंग बूथ के कर्मचारियों और मतों की गणना करने वाले लोगों का पेमेंट, मतदान केंद्र और मतगणना केंद्र पर लगने वाले अस्थायी टेलीफोन फैसिलिटी लगाने, पक्की स्याही और अमोनिया पेपर खरीदने का खर्च शामिल है।

 

अब तक चुनावों में इतना रहा है खर्च

 

वर्ष, खर्च (करोड़ रुपए में)

1951-52, 10.45

1957, 5.9

1962, 7.32

1967, 10.8

1971, 11.62

1977, 23.04

1980, 54.77

1984, 81.51

1989, 154.22

1991, 359.1

1996, 597.34

1998, 666.22

1999, 947.68

2004, 1016.09

2009, 1114.38

2014, 3870.35

 

 

ऐसे बढ़ता है प्रति वोटर खर्च

जैसे-जैसे आबादी बढ़ती है और वोट करने वाले लोगों की संख्या में इजाफा होता है, चुनाव आयोग को ज्यादा मतदान और मतगणना केंद्र स्थापित करने पड़ते हैं। यहां अधिक लोगों को तैनात किया जाता है। अधिक वोटिंग मशीनें व स्याही खरीदनी पड़ती है। ऐसे में चुनाव आयोग पर खर्च बढ़ता है। इन सब खर्चों को कुल मतदाताओं में बांटने पर प्रति वोटर खर्च आता है। देश में इस साल 90 करोड़ मतदाता मतदान करेंगे। यह आंकड़ा अमेरिका, ब्राजील और इंडोनशिया की कुल आबादी से भी ज्यादा है। यह देश दुनिया के तीसरे, चौथे और पांचवे सबसे ज्यादा आबादी वाले देश हैं।

 

 

प्रति वोटर खर्च

 

वर्ष, खर्च (रुपए में)

1951-52, 0.6

1957, 0.3

1962, 0.34

1967, 0.43

1971, 0.42

1977, 0.72

1980, 1.54

1984, 2.04

1989, 3.09

1991, 7.02

1996, 10.08

1998, 11

1999, 15.3

2004, 15.13

2009, 15.54

2014, 46.4

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