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इस मुस्लिम बिजनेसमैन के चलते मोदी के नजदीक आए थे सलमान, कहतेे हैंं PM का राजदार

जफर सरेशवाला ही वह शख्‍स हैं, जिसने पीएम मोदी को अभिनेता सलमान खान से मिलवाया था...

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नई दिल्‍ली। 14 जनवरी 2014 की तारीख थी। अहमदाबाद में पतंगबाजी का एक खास कार्यक्रम था। तब गुजरात के सीएम और अब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पतंग उड़ाने  के लिए जब आए तो एकाएक लोगों में हलचल मच गई। दरअसल मोदी के साथ जो शख्‍स पतंगबाजी के कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए आया था, वह सलमान खान थे। सलमान ने उस दिन न केवल मोदी के साथ पतंग  उड़ाई, बल्कि लंच भी किया। 

 

इस दोस्‍ती के पीछे जिस शख्‍स ने काम किया था, उसका नाम जफर सरेशवाला था। जफर के चलते ही मोदी और सलमान की दोस्‍ती हुई। सरेशवाला अहमदाबाद के नामी बिजनेसमैन हैं और सलमान के पिता सलीम खान के भी बहुत करीबी माने जाते हैं। सलमान खान से उनकी खास दोस्‍ती है। यही नहीं उन्‍हें पीएम मोदी के सबसे बड़े राजदारों में गिना जाता है। आइए जानते हैं मोदी सलमान और सरेशवाला के बीच इसी कनेक्‍शन के बारे में.... 

 

 

कौन हैं जफर सरेशवाला
हाजियों की तरह लंबी दाढ़ी, बड़ी  आखें और नरम लेकिन मजबूती से अपनी बात रखने का लहजा।
पहली बार मिलने पर जफर सरेशवाला आपको ऐसे ही लगेंगे। 
जफर सरेशवाला एक गुजराती मुसलमान हैं और अहमदाबाद से उनका ताल्‍लुक है।
वह मुस्लिमों के बोहरा समुदाय से ताल्‍लुक रखते हैं, जो भारत में हजारों सालों से कारोबार से जुड़ा रहा है। 
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उनका परिवार करीब 300 सालों से इस शहर में रहता आया है।
मौजूदा समय में वह ट्रेवेल और  फाइनेंशियल सर्विस के कारोबार से जुड़े हैं।
उनकी कंपनी का नाम पारसोली कॉर्प है, जो भारत में इस्‍लामिक बैंकिंग की बड़ी संस्‍थाओं में से एक है। 
कंपनी का बिजनेस भारत के अलावा ब्रिटेन में भी फैला हुआ है। 
मोदी सरकार के सत्‍ता में आने के बाद उन्‍हें मौलाना आजाद नेशनल ऊर्दू यूनिवर्सिटी का चांसलर बनाया गया। 

 

आगे पढ़ें- सलमान को मिली सजा पर क्‍या बोले जफर

 

 

 

ये वही राजस्‍थान है जहां गाय के नाम पर इंसानों को मारने वाले छोड़ दिए जाते हैं 
सलमान को मिली सजा पर भी सरेशवाला ने विरोध किया है। एक टीवी चैनल के साथ बातचीत में जफर सरेसवाला ने कहा कि इस देश में सेंस ऑफ प्रोपोरशन (समानता की भावना) खत्म हो गया है। जफर ने कहा कि वह कोर्ट के फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते, लेकिन ये वही राजस्थान है, जहां इंसानों को मारा जाता है गाय के नाम पर, और उनको कोई सजा भी नहीं होती और गिरफ्तारी भी नहीं होती। यहां (सलमान खान के मामले में) काले हिरण को मारने पर 5 साल की सजा हो जाती है। जफर ने कहा कि इस मुल्क को सोचने की जरुरत है क्या हमारे मुल्क में सेंस ऑफ प्रोपोरशन जैसी कोई चीज है कि नहीं?

 

आगे पढ़ें- जफर के हर कार्यक्रम में पहुंचते हैं पीएम मोदी 

 

जफर के हर कार्यक्रम में पहुंचते हैं पीएम मोदी 

जफर ने गुजरात में मुस्लिम कारोबारियों के कई कार्यक्रम आयोजित कराए, उसमें गुजरात के सीएम के तौर पर नरेंद्र मोदी शिरकत करते रहे हैं।
पीएम बनने से पहले फरवरी 2014 में अहमदाबाद में जफर की ओर से आयोजित कार्यक्रम में भी मोदी ने शिरकत की थी।
यही नहीं जफर सरेशवाला की पत्‍नी के इस्‍लामिक आर्ट वर्क की प्रदर्शनी में भी मोदी के साथ देखा जा चुका है। 

 

आगे पढ़ें- मोदी के लिए लंबे समय से कर रहे हैं बैटिंग 

 


मोदी के लिए लंबे समय से कर रहे हैं बैटिंग 
- सरेशवाला पीएम मोदी के लिए पिछले 12 साल से बैटिंग करते आ रहे हैं। 
- गुजरात दंगों के बाद जब कई देशों ने पीएम मोदी पर कई तरह के बैन लगाए तो भी जफर देसी और विदेशी मीडिया में उनकी तरफदारी करते रहे। 
- इसके चलते उन्‍हें कई बार बड़ेे मुस्लिम संगठनों के मंचों पर विरोध का भी सामना करना पड़ा है। 
- जयपुर में हुई ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में उन्‍हें प्रवेश तक नहीं करने दिया गया। 
 
आगे पढ़ें- गुजरात दंगों में सब कुछ लुट गया था 

गुजरात दंगो में सब कुछ लुट गया था
जफर सरेशवाला की सफलता  उनके मजबूत इरादों को भी बयां करती है।
बताते हैं कि 2002 के गुजरात दंगों के दौरान दंगाईयो ने उनके घर और आफिस सबको तबाह कर दिया था।
भारत में इस्‍लामिक बैंकिंग का सबसे बड़ा नाम मानी जाने वाली उनकी कंप‍नी के आफिस को आग के हवाले कर दिया गया।
सारा स्‍टाफ ऑफिस छोड़कर भाग गया, कंप्यूटर से लेकर फर्नीचर तक कुछ नहीं बचा।
जफर के अनुसार उस दंगों में उन्हें 3.5 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था।
यही नहीं 1669, 1985 और 1992 के दंगों में भी परिवार को ऐसी ही नुकसान का सामना करना पड़ा था। 

 

आगे पढ़ें- हार न मानने वाला हौसला 

 

 

हार न मानने वाला हौसला 
 - जफर कहते हैं कि दंगों के बाद उनका परिवार सड़क पर आ चुका था। 
- उनके पास दो ही चारा था। या तो वह वापस ब्रिटेन चले जाते या फिर यहीं रहकर फिर से खुद को स्‍टैबलिश करते। 
- जफर ने भारत में ठहरने का फैसला किया और दंगो में खत्‍म हुए अपने बिजनेस को फिर से खड़ा किया। 
- साथ ही जिस शख्‍स को दंगों का सबसे बड़ा आरोपी बताया गया उसी के नजदीकी बन गए। 
 
आगे पढ़ें- दंगों के बाद हो गए थे मोदी के खिलाफ 

 

 

दंगों के बाद हो गए थे मोदी के खिलाफ 
 
 - 2002 के दंगों में वह ब्रिटेन में एक मेकैनिकल इंजीनियर के तौर पर काम कर रहे थे। 
- भारत में उनके दो छोटे भाई परिवार का इस्‍लामिक बैंकिंग का काम देखते थे। 
- दंगों में परिवार का जब सबकुछ बर्बाद हुआ तो मोदी के विरोधी हो गए। 
- वह उस संगठन से जुड़ गए जो मोदी के खिलाफ अंतरराष्‍ट्रीय न्‍यायालय में मुकदमा दायर करने जा रहा था। 
 
आगे पढ़ें- मोदी के एक फोन ने बदल दी सोच 

मोदी के एक फोन ने बदल दी सोच 
 
- सरेशवाला ब्रिटेन में रहते हुए मोदी के खिलाफ अभियान चला रहे थे। 
- लेकिन मोदी की एक फोन कॉल ने सरेशवाला की पूरी सोच को बदलकर रख दिया।
- वह पूरी तरह से ब्रिटेन में बसने की सोच रहे थे, लेकिन मोदी ने सरेशवाला से अपने फैसलेे पर फिर से सोचने के लिए कहा। 
- मोदी ने कहा, क्‍या वहां तुम अंग्रेजों की गुलामी ही करते रहोगेे, भारत को तुम्‍हारी जरूरत है। 
- उसके बाद वह भारत आए तब से उन्‍हें मोदी का बेहद खास मुसलमान दोस्त माना जाता है। 
 
आगे पढ़ें- भाजपा और मोदी पर क्‍या कहते हैं सरेशवाला 

 

 

मुस्लिम भाजपा से दूर नहीं रह सकते 
 
पीएम मोदी से नजदीकी पर पूछे गए सवाल के जवाब में जफर सरेशवाला का हमेशा साफ नजरिया रहा है। वह कहते हैं, ' मुस्लिम एक ऐसी पार्टी से खुद को दूर नहीं रख सकते जो लंबे समय से गुजरात में सत्‍ता मे हो और साथ ही मोदी भी हमेशा उनके लिए अछूत नहीं रह सकते।  एक रानीतिक दल और उनके पीएम पद के उम्‍मीदवार से स्‍थायी दुश्‍मनी मुस्लिम समुदाय के हालात बेहतर करने में मदद नहीं कर सकती है।'  

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