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Home » Economy » PolicyKarachi Bakery partially covers its signboard after mob demands name change

भारत-पाक बंटवारे के बाद सिंधी ने हैदराबाद में खोली थी ‘कराची बेकरी’, अब ढकना पड़ा साइनबोर्ड से यह शब्द

आज देशभर में फ्रूट बिस्किटस के लिए मशहूर है यह बेकरी

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नई दिल्ली। पुलवामा हमले के बाद लोगों में पाकिस्तान के प्रति आक्रोश है। कई जगहों पर काश्मीरियों के ऊपर अटैक होने की खबर आ चुकी है। अब बेंगलुरु के प्रसिद्ध 'कराची बेकरी' भी लोगों के गुस्से का निशाना बन गया। बेंगलुरु के स्थानीय निवासियों के विरोध के चलते बेकरी मालिकों को अपनी दुकान का नाम ढकना पड़ गया।

 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार रात कुछ लाेगों ने कराची बेकरी को लेकर विरोध-प्रदर्शन किया। वहां नारेबाजी शुरू कर दी और नाम बदलने की मांग करने लगे जिसके बाद कराची बेकरी के मैनेजर को साइनबोर्ड के एक हिस्से को कवर करना पड़ा है दरअसल, कुछ लोग पाकिस्तान के विरोध में कराची शब्द का विरोध कर रहे थे यह प्रदर्शन शुक्रवार को पुलवामा हमले के विरोध में किया जा रहा है। बेकरी के एक स्टाफ के मुताबिक, ना सिर्फ नाम को कवर किया बल्कि साइनबोर्ड के ऊपर सामने की खिड़की पर एक भारतीय झंडा भी लटका दिया गया है हालांकि पूरी घटना के दौरान किसी भी तरह की हिंसा नहीं हुई

 

 

 

वे 1947 के बंटवारे के वक्त भारत आए थे

 

कराची बेकरी की स्थापना खानचंद रमनानी ने की थी। वे 1947 के बंटवारे के वक्त भारत आए थे। बेकरी का पहला आउटलेट हैदराबाद में खोला गया। इसके बाद पूरे देश में इसकी ब्रांच फैल गईं। बेकरी अपने फ्रूट बिस्किटस के लिए मशहूर है।

 

कराची नाम पर आपत्ति जताने वालों को ट्रोल किया गया है

 

साेशल मीडिया पर इस मुद्दे पर यूजर्स के बीच बहस छिड़ी है। कोई इसे सही बता रहा है तो कोई इस घटना का विरोध कर रहे हैं। वहीं कराची नाम पर आपत्ति जताने वालों को ट्रोल भी किया गया है।  

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