गाय, भैंस, बकरी हांकने पर मिलेंगे 4 हजार रुपए प्रति माह, ट्रेंड होने पर मिलेगी पक्की नौकरी

एमपी अजब है, गजब है- युवा स्वाभिमानी योजना में बड़े शहरों में युवाओं को चराना होगा पशु। 

गाय के संरक्षण और युवाओं को रोजगार की गारंटी के वादा देकर एमपी में चुनाव जीतने वाली कांग्रेस ने एक अजब-गजब तरह की योजना शुरू की है। कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पकौड़ा तलने को भी रोजगार से जोड़ने वाले बयान का विरोध करने वाली कांग्रेस की जब एमपी में सरकार बनी तो उसने भोपाल, इंदौर, जबलपुर आदि में गाय, भैंस, बकरी, सुअर आदि ढोरों (पशु) को हांकने व चराने का भी पैसा देना का फैसला किया। इसके लिए हाल ही में शुरू की गई युवा स्वाभिमान योजना में प्रावधान रखा गया है।

money bhaskar

Mar 07,2019 03:58:00 PM IST

कुलदीप सिंगोरिया

नई दिल्ली. गाय के संरक्षण और युवाओं को रोजगार की गारंटी के वादा देकर एमपी में चुनाव जीतने वाली कांग्रेस ने एक अजब-गजब तरह की योजना शुरू की है। कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पकौड़ा तलने को भी रोजगार से जोड़ने वाले बयान का विरोध करने वाली कांग्रेस की जब एमपी में सरकार बनी तो उसने भोपाल, इंदौर, जबलपुर आदि में गाय, भैंस, बकरी, सुअर आदि ढोरों (पशु) को हांकने व चराने का भी पैसा देना का फैसला किया। इसके लिए हाल ही में शुरू की गई युवा स्वाभिमान योजना में प्रावधान रखा गया है। इस योजना में सरकार युवाओं को सिखएगी कि कैसे पशु हांकें और चराए जाते हैं। बदले में 4 हजार रुपए प्रतिमाह स्टाइपेंड भी मिलेगा। इसके बाद नगर निकायों में परीक्षा के बाद उनकी भर्ती भी की जाएगी।

भोपाल और इंदौर में 82 पद


मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस योजना का शुभारंभ किया था। इसके बाद नगरीय निकायों ने विभिन्न कामों जैसे ड्राइवर, मोटर मैकनिक, अकाउंट असिस्टेंट जैसे कई पदों पर आवेदन बुलाए थे। इसी में इंदौर में 40 और भोपाल में 42 पद पशुओं को हांकने के प्रशिक्षण के लिए रखे गए हैं।

सरकार कर रही युवाओं के साथ मजाक


नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा है कि कमलनाथ सरकार युवाओं व गाय के साथ मजाक कर रही है। क्या रोजगार का मतलब पशु चराना है? यह युवाओं के श्रम का अपमान है।

नहीं हो पाई ट्रेनिंग की व्यवस्था


शहरी युवाओं को सालभर में 100 दिन का रोजगार देने वाली युवा स्वाभिमान योजना शुरुआत से चर्चाओं में आ गई है। योजना शुरू हुए बमुश्किल एक महीना ही बीता है लेकिन 8 हजार युवा ही प्रशिक्षण के लिए उपस्थित हुए। मनरेगा की तर्ज पर तैयार इस योजना के लिए अब तक करीब सवा तीन लाख युवाओं ने पंजीयन कराया है। इनमें से 88 हजार से अधिक को काम का आवंटन कर दिया गया और बाकी सत्यापन करवा रहे हैं। इसके बावजूद काम में उपस्थिति अभी संतोषजनक नहीं है। बताया जाता है कि अब तक सभी नगरीय निकायों में प्रशिक्षण की व्यवस्था नहीं हो पाई है। 378 में से करीब 150 निकायों में ही प्रशिक्षण केंद्र बन पाए हैं। नगरीय विकास एवं आवास विभाग, तकनीकी शिक्षा विभाग के साथ मप्र एजेंसी फॉर प्रमोशन ऑफ इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी (मैप आईटी) भी इस योजना में शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि तीन विभागों के कारण भी इसके क्रियान्वयन में दिक्कत आ रही है.

यह है युवा स्वाभिमान योजना, इन कार्यों का मिलेगा प्रशिक्षण

  • 21 से 30 साल तक के युवा, जिनकी पारिवारिक आय दो लाख रुपए से कम है और वे शहरी क्षेत्र के निवासी हैं, उन्हें 100 दिन काम।
  • 43 तरह के ट्रेड हैं. इसमें पशु हांकना (ढोर चराना) ऑफिस असिस्टेंट, अकाउंटेंट सहायक, ड्राइवर, इलेक्ट्रिशियन, मैकेनिक, फोटोग्राफर, वीडियोग्राफर, कारपेंटर, प्लंबर, फायरमैन, सिक्योरिटी गार्ड जैसे काम शामिल हैं।
  • इसमें युवाओं को 10 दिन 8 घंटे की ट्रेनिंग, फिर 90 दिन तक चार घंटे काम और चार घंटे ट्रेनिंग दी जाएगी।
  • युवाओं को करीब 134 रुपए रोज के हिसाब से 100 दिन स्टाइपेंड।
  • पहली बार 10 दिन बाद, फिर 30-30 दिन में स्टाइपेंड खाते में जाएगा।
  • कार्य में 33 प्रतिशत और प्रशिक्षण में 70 फीसदी उपस्थिति पर ही भुगतान होगा। उपस्थिति के अनुसार ही भुगतान होगा।
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