देश में आरक्षण का बढ़ा दायरा लेकिन घटी नौकरियां, 2 साल में बेरोजगारी की दर पहुंची सबसे ऊंचे स्तर पर

केंद्र सरकार की ओर से आर्थिक रुप से पिछड़े सवर्णों के लिए 10 फीसदी आरक्षण की मुहर लगा दी गई है। ऐसे में यह मुद्दा जोरों पर है। इसके पक्ष और विपक्ष में बहस का दौर जारी है। लेकिन जिस एक बात पर सबसे ज्यादा चर्चा होनी चाहिए, वो है बेरोजगारी और नौकरियों की कमी। हालांकि यह विडंबना है कि यह मुद्दा बहस के दौर से बाहर है। ऐसे अगर क्या आरक्षण का सही मायने में फायदा मिल सकेगा।

Money Bhaskar

Jan 09,2019 12:57:00 PM IST

नई दिल्ली. केंद्र सरकार की ओर से आर्थिक रुप से पिछड़े सवर्णों के लिए 10 फीसदी आरक्षण की मुहर लगा दी गई है। ऐसे में यह मुद्दा जोरों पर है। इसके पक्ष और विपक्ष में बहस का दौर जारी है। लेकिन जिस एक बात पर सबसे ज्यादा चर्चा होनी चाहिए, वो है बेरोजगारी और नौकरियों की कमी। लेकिन संसद में इस मसले पर कभी बहस नहीं हुई। नौकरियों नहीं निकलेंगी तो आरक्षण देने का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।

हर साल है 81 लाख नौकरियों की जरूरत

अगर सवर्णों के लिए 10 फीसदी आरक्षण लागू हो जाता है, तो आरक्षण का दायरा 59.50 फीसदी हो जाएगा। ऐसे में हम नजर डालते है कि देश में नौकरियों की क्या हालत हैं। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी’ (सीएमआईई) की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 2 साल में देश में बेरोजगारी की सबसे ज्यादा बढ़ गई है। विश्व बैंक की ओर से भी कहा गया है बेरोजगारी पर नियंत्रण पाने के लिए भारत में साल 81 लाख नौकरियां की जरूरत है।

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