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खेती के लिए नहीं जाना होगा खेत में, जियो-सैमसंग की नई पहल

ड्रोन ही कर देगा सारा काम, कंप्यूटर से कर सकेंगे खेत की निगरानी

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सौरभ कुमार वर्मा

किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। खेती के लिए उन्हें खेत में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। किसान घर बैठे ही अब अपने खेत की निगरानी कर सकेंगे। रिलायंस जियो एवं सैमसंग की तकनीक इसे साकार करने जा रही है। इंडियन मोबाइल कांग्रेस में गुरुवार को जियो व सैमसंग की इस तकनीक की नुमाइश की गई। वर्ष 2020 तक इस तकनीक को पब्लिक के लिए लांच कर दिया जाएगा।

 

 

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कैसे होगी खेती

खेत पर ड्रोन को भेजा जाएगा। किसान ड्रोन के माध्यम से अपने लैपटाप या कंप्यूटर पर चेक कर सकेंगे कि उनके खेत में क्या कमी है या किस चीज की जरूरत है। ड्रोन के खेत पर चक्कर लगाने के बाद किसान को यह पता चल जाएगा कि मिट्टी की आर्द्रता कितनी है, खेत का तापमान कैसा है और खेत में किस प्रकार के उर्वरक की जरूरत है। उसके बाद किसान ड्रोन के माध्यम से उर्वरक जैसी चीजों का छिड़काव कर सकेंगे। मोबाइल कांग्रेस में इस प्रकार की खेती का लाइव डेमो दिया गया। खेत की इस नवीनतम तकनीक के लिए रिलायंस जियो एवं सैमसंग ने हाथ मिलाया है। इस माध्यम के लिए जियो की 5जी सेवा तो सैमसंग की तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

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स्मार्ट खेती के साथ स्मार्ट मैन्यूफैक्चरिंग भी

मोबाइल कांग्रेस में सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स प्रेसिडेंट एवं नेटवर्क बिजनेस के प्रमुख योंगकी किम के बताया कि कंपनी वर्ष 2019 की पहली तिमाही में बड़े पैमाने पर 5जी का ट्रायल रन शुरू करने जा रही है। उन्होंने बताया कि इस तकनीक से स्मार्ट खेती के साथ स्मार्ट मैन्यूफैक्चरिंग को अंजाम देने के साथ इसका इस्तेमाल स्मार्ट सिटी में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सैमसंग के बनाए रास्ते से 5जी की क्षमता का पूरा दोहन किया जा सकेगा जिससे भारत के साथ यहां के कारोबारियों को भी काफी लाभ होगा। किम ने बताया कि सैमसंग ने रिलायंस जियो के साथ मिलकर 4जी एलटीई को काफी एडवांस बनाया है। इस दीपावली तक यह नेटवर्क 99 फीसदी आबादी तक पहुंच जाएगी। उन्होंने बताया कि जियो-सैमसंग एलटीई नेटवर्क प्रतिदिन के डाटा ट्रैफिक के 90 फीसदी पेटाबाइट को हैंडल करता है जो कि सोशल मीडिया पर प्रतिदिन शेयर होने वाले 600 अरब फोटोग्राफ के बराबर हैं।

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