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जून में थोक महंगाई साढ़े चार साल के टॉप पर, 5.77% पर WPI; सब्जियों-फ्यूल की महंगाई में भारी बढ़ोत्‍तरी

Wholesale Inflation - खाने-पीने की चीजों खासकर सब्जियों की महंगाई में भारी बढ़ोत्‍तरी दर्ज की गई है।

Wholesale Inflation Rises Upto 5.77% in June, Vegetables-Fuel Price on Peak

नई दिल्‍ली. थोक महंगाई दर जून में बढ़कर 5.77 फीसदी के स्‍तर पर पहुंच गई। यह साढ़े चार साल का टॉप लेवल है। महंगाई बढ़ने की अहम वजह खाने-पीने की चीजों खासकर सब्जियों और फ्यूल की कीमतों में भारी इजाफा रहा। दिसंबर 2013 के बाद से थोक महंगाई का यह शीर्ष स्‍तर है, उस समय आंकड़ा 5.88 फीसदी पर था। थोक मूल्‍य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर इससे पहले मई में 4.43 फीसदी पर थी।

 

 

सब्जियों की महंगाई 3 गुना से ज्‍यादा बढ़ी 
सरकार की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, WPI में 22.62 फीसदी की हिस्‍सेदारी रखने वाले प्राथमिक वस्‍तुओं की थोक महंगाई जून में बढ़कर 5.30 फीसदी दर्ज की गई। मई में यह 3.16 फीसदी पर थी। खाने-पीने की चीजों की महंगाई जून 2018 में 1.80 फीसदी रही, जो मई में 1.60 फीसदी थी। सब्जियों की महंगाई जून में बढ़कर 8.12 फीसदी हो गई, जो मई में 2.51 फीसदी थी।

महीने दर महीने आधार पर जून में प्‍याज की थोक महंगाई दर बढ़कर 18.25 फीसदी हो गई, जो मई में 13.20 फीसदी थी। इसी तरह आलू की थोक कीमतों में जून के दौरान 99.02 फीसदी की महंगाई दर रही, जो मई में 81.93 फीसदी थी। फलों की महंगाई डबल डिजिट से घटकर जून में 3.87 फीसदी पर आ गई, जो मई में 15.40 फीसदी पर रही थी। 

 

फ्यूल-पावर की महंगाई तेजी से बढ़ी 
आंकड़ों के अनुसार, जून में फ्यूल एंड पावर की थोक महंगाई दर बढ़कर 16.18 फीसदी हो गई, मई में यह 11.22 थी। फ्यूल और पावर की महंगाई बढ़ने की अहम वजह ग्‍लोबल क्रूड ऑयल दरों में बढ़ोत्‍तरी के चलते घरेलू बाजार में तेल की कीमतें बढ़ना रहा। थोक महंगाई सूचकांक में फ्यूल एंड पावर की हिस्‍सेदारी 13.15 फीसदी है। जून के दौरान पेट्रोल, एलपीजी और डीजल तीनों की थोक महंगाई बढ़ी, जो क्रमश: 17.45 फीसदी, 19.64 फीसदी और 21.63 फीसदी रही। 

 

मैन्‍युफैक्‍चर्ड प्रोडक्‍ट्स की महंगाई में भी इजाफा  
जून में मैन्‍युफैक्‍चर्ड प्रोडक्‍ट्स की थोक महंगाई भी बढ़कर 4.17 फीसदी के स्‍तर पर पहुंच गई। मई में यह 3.73 फीसदी के स्‍तर पर थी। थोक महंगाई सूचकांका में मैन्‍युफैक्‍चर्ड प्रोडक्‍ट्स का वेटेज सबसे ज्‍यादा 64.23 फीसदी है। 

 

खुदरा महंगाई भी 5 महीने में सबसे ज्‍यादा रही 
पिछले हफ्ते जारी हुए आंकड़ों में खुदरा महंगाई दर भी जून में बढ़कर 5 फीसदी पर पहुंच गई, जोकि पांच महीने में सबसे ज्‍यादा है। उपभोक्‍ता मूल्‍य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई मई में 4.87 फीसदी थी। वहीं, जून 2017 में खुदरा महंगाई 1.46 के स्‍तर पर दर्ज की गई थी। इस साल इससे पहले खुदरा महंगाई का टॉप लेवल जनवरी में था, जब यह 5.07 फीसदी पर दर्ज की गई थी।

 

RBI के सामने महंगाई 4% रखने का लक्ष्‍य
महंगाई में बढ़ोत्‍तरी को देखते हुए रिजर्व बैंक अगली मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्‍याज दरों पर अहम फैसला ले सकता है। रिजर्व बैंक मॉनिटरी पॉलिसी समीक्षा में खुदरा महंगाई के आंकड़ों को को मापता है। रिजर्व बैंक ने ब्‍याज दरों पर फैसला करने के लिए महंगाई का लक्ष्‍य 4 फीसदी पर तय किया है। इसमें 2 फीसदी कम या ज्‍यादा की गुंजाइश है। रिजर्व बैंक के गवर्नर की अध्‍यक्षता में मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी (एमपीसी) की बैठक इस महीने के आखिर में 30 जुलाई को शुरू होगी। यह बैठक तीन तक चलेगी। 1 अगस्‍त को तीसरी बाय मंथली मौद्रिक नीति का एलान होगा। पहले एमपीसी की बैठक दो दिन तक चलती थी लेकिन इस साल जून में हुई दूसरी बाय मंथली समीक्षा की बैठक तीन दिन की हो रही है।

 

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