Home » Economy » Policyराजा महमूदाबाद मुहम्‍मद आमिर मुहम्‍मद खान- story of raja mahmudabad Who Compelled modi government to change the law

इस रॉयल की जिद से हारीं कई सरकारे, मजबूरी में मोदी ने बदला कानून

एनमी प्रॉपर्टी एक्‍ट पर सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा हारने के बाद सरकारों को देश का कानून बदलने पर मजबूर होना पड़ा

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नई दिल्‍ली. इंडियन रॉयल फैमिलीज का नाम आने पर या तो उनकी अमीरी और बेशुमार दौलत की चर्चा होती है या फिर उनके पुरखों की ओर से बनाई गई शानदार इमारतों की। आज हम आपको एक ऐसे रॉयल के बारे में बताते हैं, जिसकी जिद की आगे देश की सरकारों को झुकना पड़ा। यही नहीं केंद्र की मौजूदा मोदी सरकार को कानून बदलने के लिए भी मजबूर होना पड़ा है। रोचक बात यह है कि इस रॉयल ने अपनी बात मनवाने के लिए सरकार के सामने न तो प्रदर्शन किया और न ही मिन्‍नतें कीं, बस 40 साल तक संघर्ष करता रहा और मुश्किल हालातों में भी नहीं टूटा। इस रॉयल का नाम मोहम्‍मद आमिर मोहम्‍मद खान है।

 
कौन हैं आमिर मुहम्‍मद खान
मुहम्‍मद आमिर मुहम्‍मद खान का ताल्‍लुक यूपी के सीतापुर जिले से है।
इसी जिले में कभी उनके पुरखों की रियासत हुआ करती थी।
इस रियासत का नाम महमूदाबाद हुआ करता था।
महमूदाबाद रियासत अवध के नवाबों के अधीन हुआ करती थी।
आमिर मुहम्‍मद खान यहीं रहते हैं। उन्‍हें अब भी राजा महमूदाबाद कहा जाता है।

 

पिता पाकिस्‍तान जाकर बसे पर खुद यहीं रहे
आमिर मुहम्‍मद खान की फैमिली पर बंटवारे का गहरा असर पड़ा था। 
देश के बंटवारे के करीब 10 साल बाद उनका परिवार भी बंट गया।
हुआ यह कि आमिर मुहम्‍मद के पिता आमिर अहमद ने 1957 में भारत छोड़कर पाकिस्‍तान में बसने का फैसला लिया।
हालांकि आमिर ने अपनी मां रानी कनीज आबिद के साथ भारत में ही रहना पसंद किया।
पाकिस्‍तान जाने के बाद आमिर के पिता की 1973 में मौत हो गई।

 

 

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3 हजार करोड़ से ज्‍यादा की दौलत
आमिर मुहम्‍मद खान के पिता के पास बेशुमार दौलत थी।
महमूदाबाद रियासत की मौजूदा समय में उत्‍तर प्रदेश और उत्‍तराखंड में करीब 3 हजार करोड़ की संपत्ति है।
यही नहीं उनके पिता के पास इराक के कर्बला और ब्रिटेन के लंदन शहर में भी प्रॉपर्टी थी।
आजादी से पहले उन्‍हें अपनी बहुत सी संपत्ति राजनीतिक पार्टी और शिक्षण संस्‍थाओं के विकास में खर्च कर दी थी।
 
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भारत सरकार के एक फैसले ने छीन ली दौलत
कभी कभी सरकारों का एक फैसला लोगों को किस हद तक प्रभावित करता ही है इसका सबसे बड़ा उदाहरण राजा महमूदाबाद हैं।  
भारत सरकार के एक फैसले के चलते आमिर मुहम्‍मद खान की सारी दौलत छिन।
इस दौलत के छिनने की बड़ी वजह भारत सरकार की ओर से 1968 में पारित किया गया एक कानून था।
एनमी प्रॉपर्टी एक्‍ट नाम के इस कानून के मुताबिक, बंटवारे के वक्‍त या उसके बाद पाकिस्‍तान जाकर बसने वालों की भारत में संपत्ति जब्‍त करने का प्रावधान था।
इसकी मार आमिर मुहम्‍मद खान पर भी पड़ी और वह अपने ही देश में सारी दौलत खो बैठे।

 

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नहीं मानी हार

भारत सरकार की ओर से एनमी प्रॉपर्टी एक्‍ट पास किए जाने के बाद आमिर मुहम्‍मद अपनी ही जमीन से बेदखल हो गए।
लखनऊ सहित उत्‍तराखंड और यूपी में फैली महमूदाबाद रियासत की ज्‍यादातर संपत्ति को कस्‍टोडिमय डिपार्टमेंट ने हड़प लिया।
हालांकि आमिर मुहम्‍मद ने हार नहीं मानी और भारत सरकार के इस कानून के खिलाफ अदालत जाने का फैसला किया।

 

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जब खुद का संघर्ष बना सैकड़ों की उम्‍मीद
आमिर मोहम्‍मद खान ने यूं तो सिर्फ अपनी संपत्ति बचाने के लिए कोर्ट जाने का फैसला किया था।
हालांकि समय के साथ उनकी यह लड़ाई ऐसे हजारों भारतीय परिवारों की लड़ाई बन गई जिनकी संपत्ति इन कानून के चपेट में आने के बाद भारत सरकार ने हड़प ली थी।
इस लिस्‍ट में अभिनेता सैफ अली खान का मशहूर पटौदी खानदान भी शामिल रहा।
इसके चलते आमिर मोहम्‍मद खान की लड़ाई हजारों लोगों की लड़ाई में तब्‍दील हो गई।

 

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40 साल की लड़ाई और हार गई सरकारें  
अपने पिता की मौत के बाद आमिर मुहम्‍मद ने सरकार के 1973 में इस कानून के खिलाफ मुकदमा दायर किया था।
इस दौरान आई बहुत सी सरकारें उनके तर्कों के सामने ढेर हो गईं।
अदालत में सरकारें जहां एक ओर अपने कानून की दुहाई देकर मुहम्‍मद आमिर की दौलत पर अपना अधिकार बताती रहीं वहीं आमिर इस कानून को देश के नागरिक अधिकारों के खिलाफ बाताते रहे।
आखिर में जब 2005 में फैसला आया तो वह आमिर मुहम्‍मद के पक्ष में था।

 

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सुप्रीम कोर्ट क्‍या कहा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी कानून के जरिए देश के किसी भी नागरिक की संपत्ति नहीं छीनी जा सकती।
अदालत ने साफ कहा कि यह देश के नागरिक अधिकारों के खिलाफ है।
फाइनली अदालत के फैसले को सरकार को मानना पड़ा और मोहम्‍मद आमिर को लखनऊ के साथ  नैनीताल समेत अपनी बहुत सी संपत्ति वापस मिली।

 

आगे पढ़ें-घबराई सरकार ने पास किया अध्‍यादेश 

 

घबराई सरकार ने पास किया अध्‍यादेश
सुप्रीम कोर्ट की ओर से फैसला देने के बाद भारत सरकार ने 2010 में एक अध्‍यादेश पारित किया।
इसमें कहा गया कि एनमी प्रॉपर्टी एक्‍ट के तहत जब्‍त की गई संपत्ति सरकार कस्‍टोडियम डिपार्टमेंट के पास ही रहेगी, भले ही उनके वारिस भारतीय ही क्‍यों न हों।
अध्‍यादेश के मुताबिक, अगर संपत्ति को एक बार कस्‍टोडियम डिपार्टमेंट ने अटैच कर लिया तो वह उसी के पास रहेगी।
हालांकि बाद में आमिर मोहम्‍मद खान और अन्‍य रॉयल फैमिलीज के दबाव के बाद तत्‍कालीन पीएम मनमोहन सिंह ने इस अध्‍यादेश को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया।

 

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यूपीए सरकार नहीं पास करा पाई कानून  
करीब 2010 से 2015 तक इस मामले में पूरी तरह से खामोशी रही।
2010 में तत्‍कालीन यूपीए सरकार ने इस बिल को लोकसभा में पेश तो किया था, लेकिन बाद में यह संशोधन के लिए स्‍टैंडिंग कमेटी के पास भेज दिया गया।
इसके चलते वह बिल 15वीं लोकसभा के पूरे कार्यकाल के दौरान पास नहीं किया जा सका।
दरअसल यूपीए सरकार पूरे मामले में हाथ डालने से कतराती रही।

 

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मोदी सरकार ने बदल दिया कानून
  • 2014 में केंद्र की सत्‍ता में आई मोदी सरकार ने इस बिल को पास कराने का फैसला किया।
  • इस पर पिछले साल लोकसभा ने अपनी मुहर लगा दी थी।
  • हालांकि राज्‍यसभा में यह अब भी तक नहीं पास हो पाया है।
  • इसके बाद इसे स्‍टैंडिंग कमेटी के पास भेजा गया, जहां कुछ संशोधनों के बाद इसे राज्‍यसभा में पेश किया गया और यह पास हो गया।
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