Home » Economy » PolicySebi May Give Fresh Push to Loan Default Disclosure by Listed Firms, PNB फ्रॉड: लिस्‍टेड कंपनियों को एक दिन में देनी होगी लोन डिफॉल्‍ट की जानकारी

PNB फ्रॉड: लिस्‍टेड कंपनियों को एक दिन में देनी होगी लोन डिफॉल्‍ट की जानकारी, सेबी ला सकता है प्रपोजल

मार्केट रेग्‍युलेटर सेबी सेबी अपने एक 'ऑनलोल्‍ड' (लंबित) प्रपोजल को फिर से आगे बढ़ा सकता है।

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नई दिल्‍ली. पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में करीब 11,400 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के कई साल तक सामने आने के बाद मार्केट रेग्‍युलेटर सेबी सेबी अपने एक 'ऑनहोल्‍ड' (लंबित) प्रपोजल को फिर से आगे बढ़ा सकता है। इस प्रपोजल के अंतर्गत सभी लिस्‍टेड कंपनियों के लिए लोन डिफॉल्ट के मामलों की जानकारी एक दिन के भीतर सार्वजनिक करनी होगी।
 
 
- पीएनबी फ्रॉड में आरोपी अरबपति हीरा कारोबारी नीरव मोदी सीधे तौर पर किसी रजिस्टर्ड कंपनी से नहीं जुड़ा है, लेकिन उसके संबंधी और कारोबारी सहयोगी मेहुल चौकसी की गीतांजलि जेम्स एक रजिस्टर्ड कंपनी है।
- गीतांजली मार्केट प्रभावित करने वाले कुछ अन्य संदिग्ध मामलों में संलिप्त है।
 

सेबी शुरू कर चुका है जांच

- पीएनबी और गीतांजलि जेम्‍स के मामले में सेबी ने पहले ही ट्रेडिंग और डिस्‍क्‍लोजर से जुड़े मामलों पर जांच शुरू कर दी है।
- पीएनबी फ्रॉड को भारत के बैंकिंग इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा घोटाला माना जा रहा है।
- इसका मुख्‍य आरोपी नीरव मोदी जनवरी के पहले हफ्ते में ही देश छोड़ चुका है।
 
 

बैंकिंग सेक्‍टर जता चुका है आपत्ति

- पिछले हफ्ते इस फ्रॉड के सामने आने के बाद नीरव मोदी से डायरेक्‍ट या इनडायरेक्‍ट जुड़े सरकारी बैंकों समेत कई लिस्‍टेड कंपनियों, गीतांजलि जेम्स और पीएनबी में निवेशकों को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है।
- निवेशकों की सहायता देने के उद्देश्य से सेबी ने उन्हें लोन डिफॉल्ट की पूरी जानकारी देने के लिए एक फैसला  किया था। इसके अनुसार प्रपोजल था कि स्‍टॉक मार्केट में लिस्‍टेड सभी कंपनियों को उनके लोन डिफॉल्ट के मामलों का खुलासा तत्काल करना था।
- इस प्रपोजल पर बैंकिंग सेक्टर की ओर से आपत्ति जताई गई थी। बैंकिंग सेक्टर का कहना था कि इससे मार्केट में पैनिक की स्थिति बन जाएगी।
 

अब प्रपोजल को आगे बढ़ाने का प्‍लान

- सेबी के एक सीनियर अफसर ने बताया कि पीएनबी फ्रॉड सामने आने के बाद यह जरूरी हो गया है कि छोटे से छोटे लोन डिफॉल्ट की भी जानकारी समय से मिल जाए ताकि ऐसी स्थिति बनने से बचा सके।
- सेबी अब अपने इस प्रपोजल को नए सिरे से आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, उन्‍होंने बताया कि प्रपोज्‍ड फ्रेमवर्क में कंस्‍ट्रक्टिव बदलाव के रास्‍ते खुले हैं।
 
 

कैसे सामने आया PNB फ्रॉड?

- पंजाब नेशनल बैंक ने बुधवार को स्‍टॉक एक्‍सचेंज बीएसई को बताया कि उसने 1.8 अरब डॉलर (करीब 11,356 करोड़ रुपए) का संदिग्‍ध ट्रांजैक्‍शन पकड़ा है।
- यह फ्रॉड कुछ चुनिंदा अकाउंट होल्‍डर्स को फायदा पहुंचाने के लिए किए गए थे।
- बैंक के अनुसार, ऐसा लगता है कि इन ट्रांजैक्‍शन के आधार पर विदेश में कुछ बैंकों ने उन्हें (चुनिंदा अकाउंट होल्‍डर्स को) कर्ज दिया है। ये अकाउंट्स कितने थे, कितने लोगों को फायदा हुआ? इस बारे में अभी तक खुलासा नहीं हुआ है। यह मामला 2011 से जुड़ा है।
 

कैसे हुआ फ्रॉड?

- इस पूरे फ्रॉड को लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) के जरिए अंजाम दिया गया। यह एक तरह की गारंटी होती है, जिसके आधार पर दूसरे बैंक अकाउंटहोल्डर को पैसा मुहैया करा देते हैं। अब यदि अकाउंटहोल्डर डिफॉल्ट कर जाता है तो एलओयू मुहैया कराने वाले बैंक की यह जिम्मेदारी होती है कि वह संबंधित बैंक को बकाये का भुगतान करे।
- पीएनबी के कुछ अफसरों ने नीरव मोदी को गलत तरीके से लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) दी। इसी एलओयू के आधार पर मोदी और उनके सहयोगियों ने दूसरे बैंकों से विदेश में कर्ज ले लिया। पीएनबी ने भले ही दूसरे लेंडर्स के नाम का उल्लेख नहीं किया, लेकिन समझा जाता है कि पीएनबी द्वारा जारी एलओयू के आधार पर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक और एक्सिस बैंक ने भी क्रेडिट ऑफर कर दिया था।
 

घोटाले में कौन-कौन हैं आरोपी ?

- हीरा कारोबारी नीरव मोदी और गीतांजलि ग्रुप्स के मालिक मेहुल चौकसी इस घोटाले के मुख्‍य आरोपी हैं। इन दोनों ने गोकुलनाथ शेट्टी के साथ मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया।
- 280 करोड़ के फ्रॉड केस में ED ने नीरव मोदी की पत्नी आमी, भाई निशाल, मेहुल चीनूभाई चौकसी, डायमंड कंपनी के सभी पार्टनर्स, सोलर एक्सपर्ट्स, स्टेलर डायमंड और बैंक के दो अफसरों गोकुलनाथ शेट्टी (अब रिटायर्ड) और मनोज खरात के खिलाफ केस दर्ज किया है।
 
 

आगे पढ़ें... क्‍या है एलओयू?

 

क्‍या है LoU?

लेटर ऑफ अंडरटेकिंग यानी एलओयू एक तरह की गारंटी होती है, जिसे एक बैंक दूसरे बैंक को जारी करता है। जिसके आधार पर दूसरे बैंक अकाउंटहोल्‍डर को पैसा मुहैया करा देते हैं। फाइनेंस की भाषा में कहें तो एलओयू सेक्‍योर मैसेजिंग प्‍लेटफार्म स्विफ्ट के जरिए एक मैसेज के रूप में भेजा जाता है। स्विफ्ट के जरिए पैसे ट्रांसफर करने के संदेश की वैल्‍यू बैंक द्वारा दूसरे पक्ष को जारी एक डिमांड ड्रॉफ्ट के बराबर होता है। स्पिफ्ट यानी Society for Worldwide Interbank Financial Telecommunications, एक तरह का मैसेज भेजने और प्राप्‍त करने वाला नेटवर्क है जि‍सका इस्‍तेमाल दुनि‍याभर के बैंक और फाइनेंशि‍यल सेवाएं देने वाली अन्‍य संस्‍थाएं करती हैं। कुल मिलाकर यह समझें कि यदि अकांउट होल्‍डर डिफॉल्ट कर जाता है तो एलओयू मुहैया कराने वाले बैंक की यह जिम्मेदारी होती है कि वह संबंधित बैंक को बकाया पेमेंट करे। 

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