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Nipah Virus: वजह, लक्षण और बचाव के उपाय

केरल के कोझिकोड में निपाह वायरस के चलते अब तक 16 मौतें हो चुकी हैं।

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नई दिल्‍ली. केरल के कोझिकोड में निपाह वायरस के चलते अब तक 16 मौतें हो चुकी हैं। यह आंकड़ा स्‍थानीय मीडिया का है, हालांकि राज्‍य सरकार की ओर से अभी 6 मौतों की पुष्टि की गई है। मरने वालों में एक ही परिवार के चार लोग और इलाज में लगी एक नर्स भी शामिल है। चार की हालत गंभीर है, वहीं 25 लोगों को निगरानी में रखा गया है। वायरस से हो रही मौतों को देखते हुए केरल हेल्‍थ डिपार्टमेंट के लिए हाई अलर्ट जारी कर दिया है। 

 

आइए आपको बताते हैं कि क्‍या है निपाह वायरस, ये कैसे फैलता है, इसके लक्षण क्‍या हैं और कैसे बचा जा सकता है-  

 

क्‍या है निपाह वायरस

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, निपाह वायरस चमगादड़ से फलों में और फलों से इंसानों और जानवरों पर हमला करता है। फ्रूट बैट नामक चमगादड़ अगर किसी फल को खा लेते हैं और उसी फल या सब्जी को कोई इंसान या जानवर खाता है तो ये वायरस फैलने लगता है। इसकी चपेट में आने वालों का डेथ रेट 74.5 फीसदी होता है। इंसान या जानवरों को इससे बचाने के लिए कोई वैक्सीन नहीं है। इससे प्रभावित शख्स को आईसीयू में रखकर इलाज करना होता है।

 

लक्षण 

निपाह वायरस हवा से नहीं बल्कि एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे में व्यक्ति में फैलता है। इन्‍फेक्‍शन होने पर वायरल फीवर होने के साथ सिरदर्द, मिचली आना, सांस लेने में तकलीफ और चक्कर आने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। ये लक्षण लगातार 1—2 हफ्ते दिखाई दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में सबसे पहले फिजिशियन से राय लें।

 

बचाव के उपाय 

निपाह वायरस के इंफेक्शन से बचनने के लिए बीमार सुअर, घोड़े, पेड़ से गिरे फल और ताड़ी से दूर रहें। कोई फल और सब्जी खरीदें तो ध्यान रखें कि ये कहीं से कटा या खुंरचा हुई न हो। साथ ही पेड़ों से गिरे फल या खुले में टंगी मटकी वाली ताड़ी का सेवन न करें।

 


पहली बार मलेशिया में पाया गया 

- 1998 में पहली बार मलेशिया के कांपुंग सुंगई निपाह में इसके मामले सामने आए थे। इसीलिए इसे निपाह वायरस नाम दिया गया। पहले इसका असर सुअरों में देखा गया।
- 2004 में यह बांग्लादेश में इस वायरस के प्रकोप के मामले सामने आए थे। बताया जा रहा है कि केरल में यह पहली बार फैला है।

 

आगे पढ़ें- भारत में कब और कहां सामने आया पहला मामला 

भारत में पहली बार पश्चिम बंगाल में फैला था इंफेक्शन

भारत में पहली बार 2001 और 2007 में निपाह वायरस का संक्रमण पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी जिले और उन क्षेत्रों के लोगों में हुआ था जो बांग्लादेश के बॉर्डर एरिया के करीब रहते थे। उस दौरान करीब 66 मामले सामने आए थे। जिसमें 45 लोगों की मौत हो गई थी। इसके अलावा 2004 में बांग्लादेश में भी इस वायरस के प्रकोप के मामले सामने आए थे।

 

आगे पढ़ें- चमगादड़ से ही फैलने की वजह 

 

चमगादड़ से ही फैलने की वजह 

चमगादड़ एकमात्र ऐसा स्तनधारी (मैमल) है जो उड़ सकता है। यह वायरस को एक से दूसरी जगह तेजी से फैलाता है। एशिया पेसिफिक सोसायटी ऑफ क्लीनिकल माइक्रोबायोलॉजी एंड इंफेक्शन के जनरल सेक्रेटरी प्रोफेसर पॉल अनंथ के मुताबिक चमगादड़ का मेटाबॉलिज्म तेज होने के कारण वायरस इनके शरीर में बिना नुकसान पहुंचाए काफी समय तक जिंदा रह सकता है। चमगादड़ का खाया हुआ फल या सब्जी खाने से इस खास तरह का फंगल इंफेक्शन भी हो सकता है जो फेफड़ों के साथ स्प्लिीन और बोनमैरों को नुकसान पहुंचाता है।

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