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सिक्‍का उछालकर भारत ने पाक से जीती थी यह बग्‍घी, राष्‍ट्रपति करते हैं सवारी

पूर्व राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने गणतंत्र दिवस समारोह में बग्‍घी में सवार होकर जाने की परंपरा को दोबारा शुरू किया था।

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नई दिल्ली. 26 जनवरी को होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारियां जोरों पर हैं। पूर्व राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपने कार्यकाल के दौरान इस समारोह की एक पुरानी परंपरा को दोबारा शुरू किया था। यह परंपरा थी बग्‍घी में सवार होकर समारोह में जाने की। मुखर्जी ने 2014 में बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी से बग्घी पर बैठने की दोबारा परंपरा शुरू की थी। 1950 में देश के पहले गणतंत्र दिवस समारोह में देश के पहले राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद बग्घी में ही सवार होकर समारोह में पहुंचे थे।

 

करीब 30 वर्षों से सुरक्षा कारणों के चलते इस बग्घी का इस्‍तेमाल नहीं हो रहा था। इसकी जगह राष्ट्रपति कार से सार्वजनिक समारोहों में आते थे। 2016 में भी मुखर्जी बजट सत्र के पहले दिन पारंपरिक बग्घी पर सवार होकर संसद के दोनों सदनों को संबोधित करने के लिए पहुंचे थे। 

 

यहां जिस बग्‍घी की बात हम कर रहे हैं, उस बग्‍घी का इतिहास भी काफी रोचक है। इस बग्‍घी को भारत ने बंटवांरे के बाद पाकिस्‍तान से सिक्‍का उछालकर जीता था। आइए आपको बताते हैं कि क्‍यों आई यह नौबत क्‍या है इस बग्‍घी का इतिहास- 

क्‍या है बग्‍घी का इतिहास 

आजादी से पहले इस बग्घी का इस्तेमाल भारत के वायसराय या गवर्नर जनरल किया करते थे। आजादी के बाद जब बंटवांरा हुआ तो देश के साथ-साथ अन्‍य बहुत सारी चीजें भी बंटी। गवर्मेंट जनरल बॉडीगार्ड जिसे अब प्रेसीडेंट बॉडीगार्ड कहा जाता है, का भी बंटवारा हो गया। भारत और पाकिस्‍तान के बीच इस पूरी यूनिट को 2:1 के अनुपात से बंटा गया। जब बात बग्‍घी की आई तो इस पर दोनों देशों ने अलग-अलग दावा किया। जब इस पर सहमति नहीं बनी कि बग्‍घी किसे मिले तो फिर ये तय हुआ कि सिक्‍का उछालकर इसका फैसला किया जाए।
 
आगे पढ़ें- कौन थे सिक्‍का उछालने वाले

किसने उछाला सिक्‍का 

तय हुआ कि वायसराय की अंगरक्षक टुकड़ी के तत्कालीन कमांडेंट और उनके डिप्टी के बीच सिक्का उछाला जाए। बंटे बॉडीगार्ड्स में जहां कमांडेट भारत में रहने जा रहे थे, वहीं उनके डिप्‍टी जो एक मुस्लिम थे, उन्‍होंने पाकिस्‍तान जाने का फैसला किया था। सिक्का उछालने के इस निर्णय में कमांडेंट को जीत मिली और पाकिस्तान को अपना दावा छोड़ना पड़ा।  

 

आगे पढ़ें- किस नस्‍ल के होते हैं बग्‍घी के घोड़े

भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई नस्ल के घोड़े खीचते हैं बग्घी 

राष्‍ट्रपति की इस बग्घी में इस्तेमाल होने वाले घोड़े भी विशेष नस्ल के होते हैं। इसे खींचने के लिए भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई मिक्स ब्रीड के घोड़े लाए जाते हैं। दरअसल भारतीय नस्ल के घोड़ों की ऊंचाई ज्यादा होती है, जबकि यह मिक्स ब्रीड इस बग्घी की ऊंचाई पर एकदम फिट बैठती है। यही कारण है कि इसे खींचने के लिए इन्हीं नस्ल के घोड़ों को लाया जाता है। 

 

आगे पढ़ें- पहली परेड में लगे थे 6 घोड़े 

पहली परेड में बग्घी में लगे थे 6 ऑस्ट्रेलियाई घोड़े

1950 में हुए पहले गणतंत्र दिवस समारोह में जब देश के पहले राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद बग्घी पर समारोह में पहुंचे थे, तो उस वक्‍त 6 ऑस्ट्रेलियाई घोड़े इसे खींच रहे थे। पहला गणतंत्र दिवस समारोह नई दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में हुआ था। इसका नाम अब मेजर ध्यान चंद स्टेडियम है। 

 

आगे पढ़ें- 1984 तक लगातार हो रहा था इस्‍तेमाल 

1984 तक इस बग्घी का होता था इस्‍तेमाल 

पूर्व राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी से पहले राष्ट्रपति द्वारा इस प्रसिद्ध बग्घी का इस्तेमाल 1984 तक लगातार होता था। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद से इस बग्घी का इस्तेमाल रोक दिया गया था।
आखिरी बार 1984 में तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद की ओर से सार्वजनिक समारोह के लिए इस बग्घी का इस्‍तेमाल हुआ था। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की ओर से इस बग्घी का इस्तेमाल इंडिया गेट स्थित अमर जवान ज्योति पर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए भी किया जा चुका है।

 

आगे पढ़ें- किस कार में सवारी करते हैं राष्‍ट्रपति  

विशेष मर्सिडीज बेंज S600 में चलते हैं राष्ट्रपति 

राष्ट्रपति की सवारी के लिए काले रंग की मर्सडीज बेंज S600 (W221) Pullman Guard कार का इस्तेमाल होता है। इसमें बहुत ही हाईक्लास सिक्युरिटी फीचर्स यूज किए जाते हैं। हल्के हथियारों और धमाकों के हमलों को झेलने में यह पूरी तरह सक्षम होती है। राष्ट्रपति की कार का कोई नंबर नहीं होता है। नंबर प्लेट की जगह भारत के राष्ट्रीय चिह्न अशोक स्तंभ का इस्तेमाल किया जाता है। इस कार को खास तरीके से डिजाइन किया जाता है। यही कारण है कि यह कार आम मर्सिडीज कारों से अलग होती है।

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