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खास खबर: कर्नाटक नतीजों के संकेत-नोटबंदी और GST मुद्देे नहीं, बड़ेे रिफॉर्म 2019 के बाद

 

नई दिल्‍ली. कर्नाटक चुनाव के नतीजों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। सरकार बनाने के लिए राज्‍य में जोड़तोड़ तेज है। कांग्रेस-जेडीएस ने एक साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया है, वहीं बीजेपी के सीएम कैंडिडेट येदियुुरप्‍पा ने गवर्नर से मुलाकात कर राज्‍य की बागडोर संभालने का मौका मांगा है। अब फैसला कर्नाटक के राज्‍यपाल वजुभाई करेंगे। बहरहाल, राजनीतिक दमखम दिखाने के लिहाज से यह चुनाव जितना अहम रहा, उतना ही महत्‍वपूर्ण कुछ आर्थिक मसलों को लेकर भी दिखाई दिया। इस चुनाव के नतीजों से साफ है कि नोटबंदी और जीएसटी जैसे मुद्दे अब मोदी विरोध के लिए लगभग बेअसर हैं। अर्थशास्‍त्री मानते हैं कि कर्नाटक नतीजे का वैसे तो देश की अर्थव्‍यवस्‍था पर कोई बड़ा असर तत्‍काल नहीं पड़ने वाला, लेकिन इतना तय है कि इससे मोदी सरकार का भरोसा मजबूत होगा और वह अपने आर्थिक एजेंडे को मजबूती से आगे बढ़ाएगी। 

 

भरोसा बढ़ेगा, आर्थिक रिफॉर्म्‍स की बढ़ेगी रफ्तार 
एचडीएफसी बैंक के चीफ इकोनॉमिस्‍ट अभीक बरुआ का कहना है कि कर्नाटक नतीजे का वैसे तो सीधे तौर पर मोदी सरकार के आर्थिक एजेंडे पर कोई बड़ा असर नहीं होगा। लेकिन, कर्नाटक जीत से बीजेपी का भरोसा मजबूत होगा और अपने मौजूदा आर्थिक रिफॉर्म्‍स की रफ्तार को तेज करेगी। अभी सरकार के सामने बड़ी आर्थिक चुनौती क्रूड (कच्‍चा तेल) की बढ़ती कीमतें, कमजोर होता रुपया, विदेशी निवेश का आउटफ्लो है। क्‍या सरकार बड़े रिफॉर्म की शुरुआत करेगी, इसके जवाब में बरुआ का कहना है कि फिलहाल ऐसा नहीं लगता कि सरकार 2019 से पहले कोई बड़ा आर्थिक रिफॉर्म करने का फैसला लेगी। श्रम और भूमि अधिग्रहण जैसे बड़े रिफॉर्म की जरूरत है लेकिन येे  बेहद ही संवेदनशील मसले हैं और ऐसा लगता है कि सरकार अगले आम चुनाव के बाद ही इन पर काम करेगी। शार्ट टर्म में देखा जाए तो सरकार का फोकस माइक्रोइकोनॉमी को मैनेज करने पर रहेगा। 

 

कर्नाटक बीजेपी के लिए एक संभावना 
आर्थिक विश्‍लेषक और पूर्व सीएसओ प्रणब सेन मानते हैं कि दक्षिण भारत में कर्नाटक बीजेपी के लिए एक संभावना है। बीजेपी के सामने सबसे अहम चुनौती यह नहीं हैै कि वह कर्नाटक जीत जाए, बल्कि यह है कि वह कांग्रेस को रोक दे। क्‍योंकि अगर कांग्रेस दोबारा सरकार बना लेती है तो इसका सीधा असर बीजेपी को राजस्‍थान और मध्‍य प्रदेश जैसे महत्‍वपूर्ण राज्‍यों के चुनावों पर पड़ेगा। जहां तक, कर्नाटक की जीत-हार का मोदी सरकार के आर्थिक सुधार के एजेंडे पर असर पड़ने की बात है तो कोई खास असर नहीं होगा।  

 

विदेशी निवेश पर क्षेत्रीय राजनीति का असर नहीं 
सैम्को सिक्युरिटीज के फाउंडर एंड सीईओ जिमीत मोदी कहते हैं फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एफआईआई) और फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (एफपीआई) शेयर बाजार में वैल्युएशन देखकर खरीद-बिक्री करते हैं। अगर उनको लगता है कि भारतीय शेयर बाजार का वैल्युशन कम है तो खरीददारी करेंगे। मौजूदा समय में इमर्जिंग मार्केट में भारत महंगा है। उन्हें क्षेत्रीय राजनीति की चिंता नहीं होती है।

वहीं, आईआईएफएल के हेड ऑफ रिसर्च अभिमन्यु सोफट का मानना है कि भारत अभी भी दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश है और वह दुनिया की नजरों पर रहेगा। इस पर एफपीआई और एफआईआई की नजर रहेगी। 

 

नोटबंदी, GST को मनमोहन ने की थी मुद्दा बनाने की कोशिश 
कर्नाटक चुनाव प्रचार के दौरान 7 मई 2018 को बेंगलुरू में प्रेस कॉन्‍फ्रेंस कर पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने नोटबंदी, जीएसटी, बैंकिंग फ्रॉड जैसे आर्थिक मोर्चे पर बीजेपी को घेरने की कोशिश की थी। लेकिन, 15 मई 2018 को जब नतीजे सामने आए और बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी तो इसका मतलब साफ है कि मतदाताओं के लिए नोटबंदी और जीएसटी अब बड़ा मुद्दा नहीं है।

कर्नाटक चुनाव अभियान को नजदीक से देखने वाले जेएनयू के रिसर्च फैलो मुकेश कुमार की मानेंं तो कर्नाटक में सोशल और लोकल मुद्दे अधिक हावी रहे। दलित, लिंगायत, कन्‍नड़ फैक्‍टर, कावेरी विवाद जैसे मुद्दे लोगों को ज्‍यादा अहम रहा। 


कर्नाटक की GDP में 7.52% हिस्‍सेदारी 
कर्नाटक की आर्थिक हैसियत को अब जरा आंकड़ों में समझते हैं। सांख्यिकीय एंड क्रियान्‍वयन मंत्रालय के अनुसार, देश के सकल घरेलू उत्‍पाद (जीडीपी) में कर्नाटक की हिस्‍सेदारी 7.52 फीसदी है। इकोनॉमिक सर्वे 2017-18 के अनुसार, कर्नाटक गुड्स एंड सर्विसेज के एक्‍सपोर्ट के मामले में देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्‍य है। देश के कुल एक्‍सपोर्ट में कर्नाटक की हिस्‍सेदारी 12 फीसदी से ज्‍यादा है। सॉफ्टवेयर एक्‍सपोर्ट में यह देश का नंबर वन स्‍टेट है। अपनी सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) पॉलिसी के चलते कर्नाटक के बेंगलुरु को भारत की 'सिलिकॉन वैली' कहा गया। कर्नाटक की जीडीपी ग्रोथ 8.5 फीसदी है। वहीं, वित्त वर्ष 2017-18 में कर्नाटक की प्रति व्यक्ति आय 1.75 लाख रुपए आंकी गई, जो राष्ट्रीय औसत से 56 फीसदी अधिक है। यानी, कर्नाटक में बीजेपी-कांग्रेस की जीत-हार राजनीतिक ही नहीं आर्थिक नजरिए से भी काफी अहम होगी। कॉमर्स मिनिस्‍ट्री की ओर से जारी 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैकिंग 2017' में कर्नाटक चौथे नंबर पर रहा।   

 

 

भाजपा सबसे बड़ी पार्टी, बहुमत से 9 सीटें दूर
राज्य में कुल सीटें 224 हैं। 2 सीटों पर मतदान बाकी है। बहुमत के लिए 113 जरूरी।
पार्टी
2018 के रुझान
2013
अंतर
कांग्रेस
78
122
- 44
भाजपा
104
40
+64
जेडीएस+
38
40
-2
अन्य
02
22
-18

 

 

आगे बढ़ें... देश की कितनी जीडीपी पर बीजेपी?

 

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