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मोदी कर दें Ok, तो आज चांद पर इंसान भेज दें इसरो

ISRO के सीनीयर प्रोफेसर BN सुरेख के मुताबिक इंसान को अंतरिक्ष में भेजने के‍ लिए जो टेक्‍नोलॉजी चाहिए वह हमारे पास है...

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नई दिल्‍ली। अगर मोदी सरकार इजाजत दे तो भारतीय स्‍पेज एजेंसी यानी ISRO अंतरिक्ष में इंसान भेजने के लिए पूरी तरह से तैयार है। ISRO के सीनीयर प्रोफेसर BN सुरेख के मुताबिक, इंसान को अंतरिक्ष में भेजने के‍ लिए जो टेक्‍नोलॉजी चाहिए, वह हमारे पास है। हमें इंतजार है तो बस सरकार की मंजूरी का। हाल में खत्‍म हुई चौथी ORF-कल्‍पना चावला स्‍पेस डायलॉग में बोलते हुए सुरेश ने यह बात कही थी। उन्‍होंने साफ किया कि इसरो इंसान को अंतरिक्ष पर भेजने के लिए तैयार है। 

 

हैवी लिफ्ट लॉन्‍च व्‍हीकल बनाने पर काम 
प्रोफेसर सुरेश के मुताबिक, इसरो अब हैवी लिफ्ट लॉन्‍च व्‍हीकल बनाने पर काम कर रहा है। इसके जरिए हम 5 से 8 टन वजनी उपग्रह या पेलोड को अंतरिक्ष में भेजने में सक्षम है। सुरेश के मुताबिक, यह व्‍हीकल पावरफुल Cryo Engine Cluster से लैस होगा। उन्‍होंने कहा कि भविष्‍य के लिए हम मल्‍टीटॉस्टिकंग हैवी लिफ्ट लॉन्‍च व्‍हीकल बना रहे हैं, ताकि भारत रीयूजेबल व्‍हील, हैवी प्‍लेटफॉर्म और ह्यूमन स्‍पेस मिशन को अंतरिक्ष में भेज सके। छोटी सैटेलाइट्स की बढ़ती संख्‍या को देखते हुए भारत स्‍मॉल सैटेलाइट लॉन्‍च व्‍हीकल पर भी काम कर रहा है। सुरेश के मुताबिक, इसरो स्‍पेस कैप्‍सूल के मास्‍टर रिकवरी पर काम करने के अलावा दोबारा इस्‍तेमाल होने वाले लॉन्‍च व्‍हीकल डेवलप करने में लगा है, ताकि अंतरिक्ष में मिशन भेजने की कॉस्‍ट को काम किया सके।   

 

 

मात्र 450 करोड़ में इसरो ने भेजा था मंगल मिशन 
बता दें कि इसरो की साख दुनिया भर में सस्‍ते अंतरिक्ष मिशन को लेकर है। इंडिया का मंगल मिशन अपनी कम लागत की वजह से पहले से ही दुनिया भर में चर्चा रहा था। इस पर मात्र 450 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे, जो दुनिया के किसी भी देश की ओर से मंगल मिशन के खर्च की गई रकम का आधा भी नहीं था। इस बारे में पीएम मोदी का एक बयान काफी सुर्खिंयों में था, जिसमें उन्‍होंने कहा था कि हॉलीवुड जितने में फिल्‍म बाता है, उतनी में भारत मंगल पर अपना यान भेज देता है। 

 

 

सरकार का फोकस नेविगेशन और उपग्रह प्रणाली पर ज्‍यादा 
दरअसल इससे पहले भी इस बात पर सवाल उठे थे कि भारत के ह्यूमन स्‍पेस मिशन में सुस्‍ती आ गई थी। इस पर आई मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि फिलहाल अं‍तरिक्ष में इंसान को भेजना भारत की पहली प्राथमिकता नहीं है। सरकार का फोकस नेविगेशन प्रणाली के साथ हाईस्‍पीड इंटरनेट और निगरानी प्रणाली को दुरुस्‍त करने पर ज्‍यादा है। यही कारण है कि वह अं‍तरिक्ष में इंसान को भेजने को उतनी प्राथमिकता नहीं दे रही है। 

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