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2019 में ब्रिटेन को पीछे छोड़ भारत बनेगा दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था: जेटली ने जताया भरोसा

जेटली ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और ग्‍लोबल ट्रेड वार आगे चलकर मुश्किलें पैदा करेंगे।

India to become 5th largest economy next year pip Britain: Arun Jaitley
नई दिल्‍ली. वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने भरोसा जताया कि यदि मौजूदा आर्थिक विकास की रफ्तार ऐसी ही बनी रहती है तो भारत अगले साल ब्रिटेन को पीछे छोड़कर दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और ग्‍लोबल ट्रेड वार आगे चलकर मुश्किलें पैदा करेंगे। 
 
जेटली ने फेसबुक पोस्ट पर 'कांग्रेस ने ग्रामीण भारत को नारे दिए, प्रधानमंत्री मोदी ने संसाधन दिए' शीर्षक में कहा है, यदि हम अनुमानित दर से आगे बढ़ते रहे तो इस बात की काफी संभावना है कि अगले साल हम ब्रिटेन से आगे होंगे। पिछले चार साल के दौरान हम दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था रहे, अगले दशक को हम आर्थिक विस्तार के रूप में देख सकते हैं।
 
फ्रांस को पीछे छोड़ बना 6वीं बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था  
वर्ल्‍ड बैंक की एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि फ्रांस को पीछे छोड़कर भारत दुऩिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। फ्रांस सातवें नंबर पर चला गया है। अमेरिका शीर्ष पर है। उसके बाद चीन, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन का स्‍थान है। वर्ष 2017 के अंत तक भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2.597 लाख करोड़ डॉलर रहा। वही फ्रांस की जीडीपी 2.582 लाख करोड़ थी।  
   
विदेशी निवेश के लिए पसंदीदा जगह बना    
वित्‍त मंत्री जेटली ने कहा कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए भारत की रैंकिंग में अच्‍छा सुधार हुआ है और यह निवेश का एक पसंदीदा डेस्टिनेशन बना है। आज कच्चे तेल के दाम और ट्रेड वार की वजह से हमारे सामने कई चुनौतियां हैं। अप्रैल में कच्चे तेल के दाम 66 डॉलर प्रति बैरल थे, जो अब 75 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए हैं। चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7-7.5 फीसदी रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2016-17 में भारत की वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रही थी। 
 
मोदी सरकार में गरीबों का अधिकार बढ़ा 
जेटली ने कहा कि पीएम मोदी की अगुवाई में एनडीए सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि ग्रामीण भारत और कम अधिकार रखने वाले लोगों का संसाधनों पर पहला अधिकार है। यदि यह व्‍यवस्‍था अगले दशक तक इसी तरह जारी रही तो इसका भारत की ग्रामीण गरीब आबादी पर उल्‍लेखनीय असर होगा। 
 

 

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