Home » Economy » Policy2018 में मोदी ले सकते हैं ये बड़े फैसले- modi Govt may takes these 4 steps against corruption in 2018

2018 में मोदी ले सकते हैं ये 4 फैसले, नोटबंदी जैसा होगा असर

2019 में होने वाले आम चुनाव को देखते हुए सरकार करप्‍शन के खिलाफ नए साल में भी कई बड़े कदम उठा सकती है

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नई दिल्‍ली.  2017 लगभग खत्‍म होने को है। 2018 में मोदी सरकार के कदमों को लेकर कई तरह की बातें हो रही हैं। कहा जा रहा है कि 2019 में होने वाले आम चुनाव को देखते हुए सरकार करप्‍शन के खिलाफ नए साल में भी कई बड़े कदम उठा सकती है। देश पर इसका असर नोटबंदी जैसा ही होगा। फिलहाल नए साल में मोदी सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों में सबसे ज्‍यादा चर्चा बेनामी प्रॉपर्टी की हो रही है। लेकिन कहा जा रहा है कि सरकार करप्‍शन के खिलाफ बेनामी प्रॉपर्टी से आगे जाते हुए कई और भी कदम उठा सकती है। 

करप्‍शन पर बड़ा कदम था नोटबंदी 

 

दरअसल माना जा रहा है कि मोदी करप्‍शन को लेकर कड़ा संदेश देना चाहते हैं। इसका एक बड़ा कारण 2जी घोटाले पर आया हाल में कोर्ट का फैसला भी हो सकता है। कोर्ट ने इस फैसले में 2जी घोटाले से जुड़े सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। आरोप हैं कि सरकारी वकीलों से जानबूझकर ठोस सबूत पेश नहीं किए। इसी के चलते आरोपियों को बरी किया गया। ऐसे में अगले साल करप्‍शन पर कुछ कड़े कदम देखने को मिल सकते हैं। मोदी सरकार करप्‍शन के के खिलाफ पहले भी नोटबंदी जैसा बड़ा कदम उठा चुकी है। सरकार का मानना था कि इससे एक झटके में ब्‍लैक मनी मार्केट से बाहर हो जाएगी। आइए जानते हैं ऐसे ही कदमों के बारे में, जिन्‍हें मोदी सरकार नए साल में उठा सकती है। 

 

 

बेनामी प्रॉपर्टी

प्रधानमंत्री मोदी अपने भाषणों में कई बार बेनामी प्रॉपर्टी पर कदम उठाने की बात कर चुके हैं। वह कह चुके हैं कि प्रॉपर्टी को आधार से लिंक करके इसमें होने वाले भ्रष्‍टाचार को रोका जाएगा। अब चूंकि 2019 में चुनाव हैं और बेनामी प्रॉपर्टी पर कदम उठाए जाने की बात पहले से कही जा रही है तो इस बात की काफी संभावना है कि 2018 में मोदी सरकार बेनामी प्रॉपर्टी को लेकर कोई ठोस कदम उठाए क्‍योंकि सरकार के पास कोई भी कानून लागू करने के लिए केवल 2018 का ही समय बचा है। 

पार्टियों की फंडिंग 

मोदी सरकार का दूसरा बड़ा फैसला राजनीतिक दलों की फंडिंग को लेकर आ सकता है। राजनीतिक दलों के पास अपनी संपत्ति की जानकारी गोपनीय रखने का अधिकार है। हालांकि सरकार इसपर एक कदम बढ़ा चुकी है। पिछले बजट में कंपनियों की ओर से राजीतिक दलों को मिलने वाली फंडिंग को डिस्‍कोज करना जरूरी कर दिया था। माना जा रहा है कि सरकार हर डोनेशन का डिस्‍क्‍लोजर जरूरी कर सकती है। 

ऑनलाइन टैक्‍स असेसमेंट 

सरकार इस साल से इनकमटैक्‍स रिटर्न के असेसमेंट को ऑनलाइन करने जा रही है। सरकार ने इसके लिए कमेटी बनाई है। इसके जरिए टैक्‍सपेयर्स ऑनलाइन ही अपने टैक्‍स से जुड़ी क्‍वैरीज को सेटल कर सकेंगे। इसके चलते टैक्‍स रिटर्न में अधिकारियों का दखल कम होगा और करप्‍शन रोकने में मदद मिलेगी। 

स्विस बैंकों से मिलेगा डाटा

मोदी सरकार को नए साल में स्विस बैंकों से सीधा डाटा मिलने लगेगा। ऐसे में रियल टाइम में उसे स्विस बैंकों में कालाधन रखने वालों के बारे में पता चलेगा। सरकार की इस मामले में नीति साफ है। ऐसे मे काला धन रखने वालों पर कड़ी कार्रवाई से इनकार नहीं किया जा सकता है। 

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