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रिकॉर्ड कर्ज के बोझ तले पूरी दुनिया, सबसे ज्‍यादा चीन ने बढ़ाई मुसीबत

एडवांस्‍ड और इमर्जिंग मार्केट इकोनॉमीज में इस वक्‍त सार्वजनिक कर्ज रिकॉर्ड उच्‍च स्‍तर पर है।

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वाशिंगटन. विकसित और तेजी से आगे बढ़ रहे देशों में इस वक्‍त सार्वजनिक कर्ज रिकॉर्ड उच्‍च स्‍तर पर है। कर्ज को बढ़ाने के लिए सबसे ज्‍यादा जिम्‍मेदार चीन है। यह बात इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने कही है। कर्ज के रिकॉर्ड उच्‍च स्‍तर को देखते हुए IMF ने देशों को इकोनॉमी में उतार-चढ़ाव बढ़ाने वाली पॉलिसीज से दूर रहने की सलाह दी है। IMF फिस्‍कल अफेयर्स डिपार्टमेंट के डायरेक्‍टर विटोर गैस्‍पर ने यह भी सलाह दी कि देश जोखिमों से निपटने के लिए अच्‍छे वक्‍त में मजबूत पब्लिक फाइनेंस का निर्माण करें। 

 
2016 में ग्‍लोबल कर्ज 164 लाख करोड़ डॉलर के रिकॉर्ड उच्‍च स्‍तर पर पहुंच गया था, जो कि GDP का लगभग 225 फीसदी था। गैस्‍पर ने कहा कि चूंकि विकसित देशों का ज्‍यादातर कर्ज पिछले 10 सालों से बना हुआ है, इसलिए कर्ज में हुई बढ़ोत्‍तरी के लिए उभरती इकोनॉमीज जिम्‍मेदार हैं। अकेले चीन में 2007 के बाद से कर्ज में 43 फीसदी की बढ़ोत्‍तरी हुई है। 
 

विकसित देशों में डेट टू GDP रेशियो GDP का 105%

गैस्‍पर के मुताबिक, इस वक्‍त एडवांस्‍ड और इमर्जिंग मार्केट इकोनॉमीज दोनों में सार्वजनिक कर्ज काफी उच्‍च स्‍तर पर है। एडवांस्‍ड इकोनॉमीज में औसत डेब्‍ट टू GDP रेशियो GDP के 105 फीसदी से भी ज्‍यादा है। इसलिए राष्‍ट्रों को सलाह है कि वे इकोनॉमी में उतार-चढ़ाव लाने वाली फिस्‍कल पॉलिसीज से दूर रहें। एक सवाल के जवाब में गैस्‍पर ने कहा कि पहले से कर्ज का स्‍तर बहुत ज्‍यादा है, ऐसे में अगर कर्ज में तेजी से बढ़ोत्‍तरी हुई तो फाइनेंशियल स्‍टेबिलिटी और बड़े पैमाने पर इकोनॉमिक एक्टिविटी के लिए जोखिम खड़ा हो जाएगा। यह भी वजह है कि हम इस बात पर जोर दे रहे हैं कि अच्‍छे वक्‍त में देश पब्लिक फाइनेंस के लिए कुछ ठोस इंतजाम करें ताकि जब खराब वक्‍त आए तो उसके लिए पहले से तैयारी रहे।  
 

उभरती इकोनॉमीज में इस वक्‍त कर्ज GDP का 50% 

उभरती इकोनॉमीज में कर्ज का स्‍तर औसत रूप से GDP के लगभग 50 फीसदी पर जा पहुंचा है। वहीं कम आय वाले विकासशील देशों में औसत डेट टू GDP रेशियो GDP का 44 फीसदी है। इंटरनेशनल कम्‍युनिटी द्वारा चलाए जाने वाले हैविली इनडेब्‍टेड पूअर कंट्रीज (HIPC) इनीशिएटिव और मल्‍टीलेटरल डेब्‍ट रिलीफ इनीशिएटिव (MDRI) के खत्‍म होने के बाद कर्ज इस स्‍तर पर पहुंचा है। पिछले 5 सालों में कर्ज में GDP के लगभग 13 फीसदी की बढ़ोत्‍तरी हुई है। 
 

कम आय वाले विकासशील देशों पर ज्‍यादा खतरा 

गैस्‍पर का यह भी कहना है कि हमारा कर्ज एनालिसिस दर्शाता है कि कम आय वाले 40 फीसदी विकासशील देशों पर इस वक्‍त जोखिम या तो ज्‍यादा है या फर वह पहले से ही कर्ज में डूबे हैं। वहीं पिछले 10 सालों में इंट्रेस्‍ट का बोझ भी दोगुना होकर टैक्‍स का 20 फीसदी हो गया है। 
 

आगे चलकर कम होगा डेब्‍ट टू जीडीपी रेशियो 

IMF ने यह भी अनुमान दिया है कि कई देशों में पब्लिक डेट टू GDP रेशियो में गिरावट आएगी। 2018 से 2023 के दौरान कम आय वाले विकासशील देशों का डेट रेशियो लगभग 60 फीसदी और इमर्जिंग मार्केट इकोनॉमीज में लगभग दो तिहाई घट जाएगा। एडवांस्‍ड इकोनॉमीज की बात करें तो अमेरिका को छोड़कर लगभग सभी देशों में डेब्‍ट रेशियो गिरेगा। अमेरिका में रिवाइज्‍ड टैक्‍स कोड और दो साल का बजट समझौता इकोनॉमी के रेवेन्‍यू में अतिरिक्‍त इजाफा करेगा। इनसे अगले तीन सालों में वहां के 1 लाख करोड़ से ज्‍यादा के ओवरऑल डेफिसिट में बढ़ोत्‍तरी होगी। गैस्‍पर ने आगे कहा कि 2023 में कर्ज के बढ़कर GDP का 117 फीसदी हो जाने का अनुमान है। .
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