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खास खबर: कर्नाटक में है साख की लड़ाई, क्‍या जीत-हार से आर्थिक एजेंडा भी बदलेगा?

 

नई दिल्‍ली. कर्नाटक के करीब 5 करोड़ मतदाता शनिवार (12 मई) को अपने मतदान के जरिए राज्‍य में बीजेपी और कांग्रेस का भविष्‍य तय कर देंगे। बीजेपी कर्नाटक जीत के साथ दक्षिण में अपनी दमदार मौजूदगी दिखाने के लिए बेताब है, तो कांग्रेस के सामने अपना एक अहम 'गढ़' बचाए रखने की चुनौती है। कर्नाटक की राजनीतिक लड़ाई में कौन जीतेगा, 15 मई को इस पर मुहर लग जाएगी। बहरहाल, कर्नाटक आर्थिक लिहाज से भी काफी अहम है। देश की जीडीपी में करीब 10 फीसदी हिस्‍सेदारी रखने वाले कर्नाटक में यदि सत्‍ता परिवर्तन होता है, क्‍या नई सरकार पिछली सरकार के एजेंडे को जारी रखेगी या उलटफेर करेगी। दूसरी ओर, यह देखना भी अहम है कि यदि पिछली सरकार दोबारा लौटती है तो पहले चुनावी वादे पूरा करने को प्राथमिकता देगी या ग्रोथ की रफ्तार को जारी रखेगी। इससे भी आगे क्‍या कर्नाटक की जीत-हार का मोदी सरकार के आर्थिक एजेंडे पर कोई असर होगा।

 

 

कर्नाटक की आर्थिक हैसियत को अब जरा आंकड़ों में समझते हैं। देश के सकल घरेलू उत्‍पाद (जीडीपी) में कर्नाटक की हिस्‍सेदारी करीब 10 फीसदी है। इकोनॉमिक सर्वे 2017-18 के अनुसार, कर्नाटक गुड्स एंड सर्विसेज के एक्‍सपोर्ट के मामले में देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्‍य है। देश के कुल एक्‍सपोर्ट में कर्नाटक की हिस्‍सेदारी 12 फीसदी से ज्‍यादा है। सॉफ्टवेयर एक्‍सपोर्ट में यह देश का नंबर वन स्‍टेट है। अपनी सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) पॉलिसी के चलते कर्नाटक के बेंगलुरु को भारत की 'सिलिकॉन वैली' कहा गया।

 

राज्‍य सरकार के अनुसार, कर्नाटक की जीडीपी ग्रोथ 8.5 फीसदी है। वहीं, वित्त वर्ष 2017-18 में कर्नाटक की प्रति व्यक्ति आय 1.75 लाख रुपए आंकी गई, जो राष्ट्रीय औसत से 56 फीसदी अधिक है। यानी, कर्नाटक में बीजेपी-कांग्रेस की जीत-हार राजनीतिक ही नहीं आर्थिक नजरिए से भी काफी अहम होगी। कॉमर्स मिनिस्‍ट्री की ओर से जारी 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैकिंग 2017' में कर्नाटक चौथे नंबर पर रहा।   

 

केंद्र के आर्थिक एजेंडे पर नहीं होगा खास असर

आर्थिक विश्‍लेषक हालांकि कर्नाटक चुनाव में राजनीतिक दलों के जीत-हार को अर्थव्‍यवस्‍था पर तत्‍काल किसी बड़े असर से इनकार कर रहे हैं। साथ ही मोदी सरकार के आर्थिक रिफॉर्म के एजेंडे पर भी कोई खास असर फौरी तौर पर पड़ेगा, वे ऐसा नहीं मानते हैं। आर्थिक विश्‍लेषक और पूर्व सीएसओ प्रणब सेन का कहना है कि दक्षिण भारत में कर्नाटक बीजेपी के लिए एक संभावना है। बीजेपी के सामने सबसे अहम चुनौती यह नहीं कि वह कर्नाटक जीत जाए बल्कि यह है कि वह कांग्रेस को जीतने से रोक दे। क्‍योंकि अगर कांग्रेस दोबारा जीत जाती है तो इसका सीधा असर बीजेपी को राजस्‍थान और मध्‍य प्रदेश जैसे महत्‍वपूर्ण राज्‍यों के चुनावों पर पड़ेगा। जहां तक, कर्नाटक की जीत-हार का मोदी सरकार के आर्थिक सुधार के एजेंडे पर असर पड़ने की बात है तो कोई खास असर नहीं होगा।  

 

चुनावी वादों से ज्‍यादा सोशल मसले हावी

कर्नाटक चुनाव अभियान को नजदीक से देखने वाले जेएनयू के रिसर्च फैलो मुकेश का कहना है कि कर्नाटक की जनता में राजनीतिक दलों के चुनावी वादों से ज्‍यादा सोशल और लोकल मसले हावी हैं। दलित, लिंगायत, कन्‍नड़ फैक्‍टर, कावेरी विवाद जैसे मसले लोगों को ज्‍यादा प्रभावित किए हुए हैं। मुकेश का कहना है कि जहां तक राज्‍य में इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर की बात की जाए तो कई जगह अच्‍छा काम हुआ है और कई जगह काफी कुछ करने का स्‍कोप है। बेंगलुरु के बारे में मुकेश की राय बिलकुल साफ है वह यह कि वहां विकास दिखता है। सही मायने में वह आईटी हब है।

 

केंद्र की योजनाओं का कर्नाटक में क्‍या है हाल?

यदि पीएम मोदी और बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह का विजय रथ कर्नाटक में भी नहीं रुकता है तो यह देखना भी जरूरी है कि क्‍या केंद्र की योजनाएं भी राज्‍य में अपना रंग दिखा रही हैं। केंद्र की कुछ महत्‍वपूर्ण योजनाओं से इसका आकलन करते हैं।

 

#1. प्रधानमंत्री आवास योजना

प्रधानमंत्री आवास योजना (अर्बन) की 2 अप्रैल 2018 तक की रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक में 1276 हाउसिंग प्रोजेक्‍ट्स पर विचार किया जा चुका है, जिस पर लगभग 19,555 करोड़ रुपए का इन्‍वेस्‍टमेंट होगा। इसमें से 6060 करोड़ रुपए का सेंट्रल एसिस्‍टेंस शामिल है, जबकि अब तक केंद्र सरकार द्वारा 2304 करोड़ रुपए रिलीज किए जा चुके हैं। फाइनेंशियल प्रोग्रेस से हटकर फिजिकल प्रोग्रेस की बात करें तो अब प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 3,82,843 घर बनाए जाने की योजना तैयार हो चुकी है, इसमें से 1 लाख 19 हजार 212 घरों के कंस्‍ट्रक्‍शन का काम शुरू हो चुका है, जबकि अब तक 45493 घर बन चुके हैं। इनमें से 40968 घरों में लोगों ने रहना शुरू कर दिया। यूनियन मिनिस्‍ट्री ऑफ  हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स की इस रिपोर्ट में प्रधानमंत्री आवास योजना के अलावा राजीव आवास योजना के आंकड़े भी शामिल हैं।

 

#2. NHAI

कर्नाटक में एनएचएआई ने 2014-15 में 2 प्रोजेक्‍ट अवार्ड किए। 2015-16 में दो प्रोजेक्‍ट अवार्ड हुए, जिनकी संख्‍या 2016-17 में 6 पहुंच गई और 2017-18 में 9 प्रोजेक्‍ट अवार्ड किए गए। अभी कर्नाटक में एनएचएआई के कुल 22 प्रोजेक्‍ट चल रहे हैं और 1225 किलोमीटर लंबे हाईवे पर काम चल रहा है। जबकि मिनिस्‍ट्री ऑफ रोड एंड ट्रांसपोर्ट के 3 प्रोजेक्‍ट अवार्ड हुए, जबकि 2015-16 में 4 प्रोजेक्‍ट अवार्ड हुए, लेकिन 2016-17 में 25 प्रोजेक्‍ट अवार्ड किए गए और 2017-18 में 21 प्रोजेक्‍ट अवार्ड किए गए। इस तरह कर्नाटक में मिनिस्‍ट्री के 1244 किलोमीटर लंबे कुल 39 प्रोजेक्‍ट चल रहे हैं।

 

#3. उदय

कर्नाटक ने केंद्र की उदय स्‍कीम के तहत ऑपरेशनल पैरामीटर के लिए एमओयू तो साइन किया, लेकिन डेट के टेकओवर के लिए राज्‍य सरकार तैयार नहीं हुई जिस कारण राज्‍य की डिस्‍कॉम्‍स ने कोई बॉन्‍ड जारी नहीं किए।

 

#4. स्‍मार्ट सिटीज

कर्नाटक में 7 स्‍मार्ट सिटीज का चयन हुआ है। अलग-अलग चरणों में इन स्‍मार्ट सिटीज का सलेक्‍शन हुआ, लेकिन इनमें से बेंगलुरु और मंगलुरु को छोड़ दें तो बाकी 4 स्‍मार्ट सिटीज में काम काफी धीमे चल रहा है।

 

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