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स्पेशल कैटेगरी वाले राज्यों को फिर मिल सकता है टैक्‍स शॉप्‍स, GST काउंसिल लेगी फैसला

स्पेशल कैटेगरी वाले राज्यों को जीएसटी से पहले जिस तरह की टैक्‍स रियायतें मिलती थी, वो एक बार फिर उन्‍हें दी जा सकती है।

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नई दिल्ली। स्पेशल कैटेगरी वाले राज्यों को जीएसटी से पहले जिस तरह की टैक्‍स रियायतें मिलती थी, वो एक बार फिर उन्‍हें दी जा सकती है। जीएसटी काउंसिल की अगले महीने होने वाली मीटिंग में इस मसले पर चर्चा हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, जीएसटी काउंसिल स्पेशल कैटेगरी वाले राज्यों को प्री-जीएसटी जैसे टैक्स शॉप्स फिर से दे सकती है। यह टैक्‍स रियायत किस तरह और किस फॉर्मेट में दी जाएगी, काउंसिल मीटिंग में इसका निर्धारण होगा। जीएसटी काउंसिल की अगली मीटिंग जनवरी में प्रस्‍तावित है।  

 

स्पेशल कैटेगरी राज्यों को मिल सकते हैं टैक्स शॉप्स

इस मामले से जुड़े एक सीनियर अधिकारी ने moneybhaskar.com को बताया कि जीएसटी काउंसिल स्पेशल कैटेगरी वाले राज्यों को टैक्स शॉप्स देने पर विचार कर रही है। जीएसटी काउंसिल की अगली मीटिंग में इस पर विचार किया जाएगा कि कैसे इन स्पेशल राज्यों को फिर से टैक्‍स बेनेफिट दिए जाएं। उन्‍होंने बताया कि सरकार स्पेशल कैटेगरी वाले राज्यों के टैक्स शॉप्स को जीएसटी लागू होने से पहले वाले लेवल पर लाना चाहती है।

 

इंडस्ट्री कर रही है टैक्स शॉप्स की मांग

टैक्स एक्सपर्ट एमके गांधी ने moneybhaskar.com को कहा कि जीएसटी लागू होने से पहले इन राज्यों में इंडस्ट्री लगाने पर कारोबारियों को एक्साइज ड्यूटी में रिफंड मिलता था। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में एक्साइज ड्यूटी पर रिफंड सेनवेट क्रेडिट के जरिए मिलता था। जीएसटी आने के बाद कारोबारियों को यह बेनेफिट न के बराबर मिल रहा है।

 

छोटे कारोबारी हैं परेशान

गांधी ने कहा कि पहले एक्साइज पर छूट मंथली बेसिस पर मिलती थी जो अब जीएसटी बजटरी सपोर्ट स्कीम (बीएसएस) के तहत क्वाटर्ली मिल रही है। इससे मैन्युफैक्चर का पैसा तीन महीने के लिए ब्लॉक हो रहा है। यानी टैक्स पे करने के तीन महीने बाद कारोबारी को रिफंड मिल रहा है। सरकार के टैक्स शॉप्स नहीं देने से इन राज्यों में एमएसएमई से एक्साइज पर छूट नहीं मिल रही है। अब कारोबारियों को टैक्स रिफंड भी कम फीसदी मिल रहा है। इससे मैन्युफैक्चर को नुकसान हो रहा है।

 

ये हैं स्पेशल केटेगरी राज्य

साल 1967 से 11 राज्यों को स्पेशल कैटैगरी का स्टेटस दिया गया। इस लिस्ट में अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड,  सिक्किम, त्रिपुरा, जम्मू एंड कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड शामिल हैं। इन राज्यों को स्पेशल बेनेफिट्स भी मिलते हैं।

 

आगे पढ़ें - क्या मिलते थे इन राज्यों के टैक्स बेनेफिट्स

 

इंडस्ट्री को मिलते थे ये टैक्स बेनेफिट्स

इन स्पेशल कैटेगरी वाले राज्यों में नई इंडस्ट्रियल यूनिट लगाने पर कई टैक्स रियायतें मिलती थीं। यहां इंडस्ट्री लगाने पर कैपिटल इन्वेस्टमेंट सब्सिडी, पांच साल तक इनकम टैक्स पर छूट, इंटरेस्ट सब्सिडी, इंश्योरेंस सब्सिडी, वैट टैक्स सिस्टम के समय सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी में छूट और ट्रांसपोर्ट सब्सिडी मिलती थी।


 

छूट के कारण इंडस्ट्री फैक्ट्री लगाने को रहते थी तैयार

इंडस्ट्रिलिस्ट इन सभी टैक्स छूट और इन्वेस्टमेंट सब्सिडी के कारण इन स्पेशल केटेगरी राज्यों में इन्वेस्ट और इंडस्ट्री लगाने के लिए हमेशा तैयार रहते थे। इन छूट के कारण कारोबारी पहाड़ी इलाकों मे फैक्ट्री लगाने के लिए भी तैयार रहते हैं।

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