Home » Economy » Policyजनवरी 2018 से गोल्ड ज्वैलरी पर हालमार्किंग होगी अनिवार्य - Hallmarking will be compulsory in new year

गोल्ड ज्वैलरी में हालमार्किंग के लिए तैयार नहीं है इंफ्रास्ट्रक्चर, कस्टमर से लेकर ज्वेलर्स को होगी परेशानी

सरकार 1 जनवरी 2018 से गोल्ड ज्वैलरी पर हालमार्किंग अनिवार्य कर सकती है।

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नई दिल्ली। भले ही सरकार 1 जनवरी से हालमार्किंग अनिवार्य करने जा रही है लेकिन उसके लिए उसे लागू कर पाना मुश्किल होगा। ज्वैलर्स के अनुसार देश में अभी केवल 500 लैब है जो हालमार्किंग देती है। वहीं केवल 15,000 ज्वैलर्स के पास हालमार्किंग का लाइसेंस है। ऐसे में सरकार इसे जल्दबाजी में लागू करती है तो इसका नुकसान कस्टमर और इंडस्ट्री दोनों को होगा।

 

जनवरी 2018 से हालमार्किंग होगी अनिवार्य

 

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) ने हॉलमार्किंग को लेकर ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (बीआईएस) को सिफारिशें भेजी है।डब्ल्यूजीसी चरणबद्ध तरीके से हालमार्किंग लागू कराना और अनिवार्य बनाना चाहता है। सरकार ने ऐसे संकेत दिए हैं कि वह हालमार्किंग और कैरेट काउंट को अनिवार्य बनाएंगे। ये तीन चरणों में किया जाएगा जिसमें 22 शहरों में पहले हालमार्किंग अनिवार्य किया जाएगा जिसमें मुंबई, नई दल्ली, नागपुर, पटना जैसे शहर शामिल हैं। दूसरे चरण में 700 शहर और आखिर में देश के बाकी शहरों में इसे लागू किया जाएगा। सरकार 1जनवरी 2018 से 14 कैरेट, 18 कैरेट और 22 कैरेट ज्वैलरी की हॉलमार्किंग अनिवार्य कर सकती है।

 

इंडस्ट्री की डिमांड असंगठित क्षेत्र हो शामिल

 

हॉलमार्किंग को इंडिया में साल 2000 में भारत में लागू किया गया था लेकिन इसे अनिवार्य नहीं बनाया गया था। अब 17 साल के बाद भी इंडिया में अभी तक सिर्फ 15,000 ज्वैलर्स के पास हालमार्किंग का लाइसेंस है और देश में सिर्फ 500 हॉलमार्किंग टेस्ट लैब हैं। ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी ट्रेड फेडरेशन के चेयरमैन नितिन खंडेलवाल ने moneybhaskar.com को कहा कि सरकार को हॉलमार्किंग मैन्युफैक्चरिंग लेवल पर अनिवार्य बनाना चाहिए जिससे असंगठित ज्वैलर्स भी हालमार्किंग के दायरे में आ सकें। खंडेलवाल ने कहा कि देश में हालामार्किंग को लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं है जिसके कारण इसे लागू करना आसान नहीं है।

 

एसोसिएशन के साथ मिलकर किया जाए लागू

 

कूचा महाजनी ज्वैलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश सिंघल ने moneybhaskar.com को कहा कि बताया कि अभी तक छोटे शहरों और होलसेल बाजारों में ज्वैलर्स हालमार्किंग नहीं कराते। ये कदम कस्टमर और इंडस्ट्री दोनों के लिए अच्छा है लेकिन इसका गंभीरता से लागू कराना जरूरी है जिसके लिए लैब की संख्या और स्टैंडर्ड क्लीयर करने होंगे।

 

सभी कैरेट के लिए हो हॉलमार्किंग

 

दरीबा के ज्वैलर्स तरूण गुप्ता ने moneybhaskar.com को कहा कि सरकार 14 कैरेट, 18 कैरेट और 22 कैरेट ज्वैलरी की हॉलमार्किंग अनिवार्य कर रही है लेकिन इंडिया में 20 कैरेट की भी ज्वैलरी बनती है। सिफारिशों में 18 से 22 कैरेट के बीच के स्लैब के लिए भी हालमार्किंग अनिवार्य करनी होगी। अगर ऐसा नहीं होता तो इंडस्ट्री इन लूपहोल्स का फायदा उठाएगी।

 

आगे पढ़ें - क्या है डब्ल्यूजीसी की सिफारिशें.. 

डब्ल्यूजीसी ने भेजी सिफारिशें

 

डब्ल्यूजीसी के मुताबिक चीन, संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन और नीदरलैंड सहित गोल्ड की अधिक खपत करने वाले देशों में हॉलमार्किंग की जिम्मेदारी मैन्युफैक्चरर्स की होती है। इसके विपरीत भारत में इसकी जिम्मेदारी सीधे रिटेलर्स पर डाली जाती है। इस वजह से डब्ल्यूजीसी ने सुझाव दिया है कि रिटेलर्स को शॉर्ट टर्म में अनिवार्य हॉलमार्किंग के लिए जिम्मेदार बनाना चाहिए और लॉान्ग टर्म में इसे मैन्युफैक्चरिंग स्तर पर लागू करना चाहती है

 

डब्ल्यूजीसी ने माना लैब्स की संख्या है कम

 

डब्ल्यूजीसी के मुताबिक अभी इंडिया में लैब्स की संख्या कम है। खासकर छोटे शहरों में हॉलमार्किंग सेंटर्स की संख्या कम है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हालमार्किंग सेंटर्स भी ठीक तरीके से काम कर रहे हैं कि इसकी भी कोई गारन्टी नहीं है। देश में ज्वैलरी की हॉलमार्किंग को गंभीरता से लागू करने के लिए डब्ल्यूजीसी ने जुर्माने की सिफारिश की है। हालमार्किंग का पालन नहीं करने पर 5,000 से 20,000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।

 

 

 

 

 

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