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बजट 2018: सरकार लाएगी गोल्ड पॉलिसी, आपको होंगे ये 4 बड़े फायदे

फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने बजट 2018-19 में गोल्ड पॉलिसी लाने की घोषणा की है।

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नई दिल्ली। फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने बजट 2018-19 में गोल्ड पॉलिसी लाने की घोषणा की है। वह गोल्ड को एसेट क्लास के रूप में डेवलपमेंट करना चाहते हैं। साथ ही  गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम को बड़े बदलाव के साथ और गोल्ड का एक अलग से एक्सचेंज डेवलप करना चाहते हैं। अगर इंडस्ट्री की माने तो इससे गोल्ड खरीदने के लिए लोन मिलना आसान होगा और गोल्ड डिपोजिट स्कीम से सेविंग बढ़ेगी। साथ ही गोल्ड एक्सचेंज बनने से गोल्ड इंडस्ट्री में ट्रांसपेरेंसी आएगी।

 

मिल सकता है गोल्ड खरीदने के लिए लोन

 

जीजेएफ के चेयरमैन नितिन खंडेलवाल ने बताया कि बजट 2018-19 में सरकार ने गोल्ड को एसेट क्लास के तौर पर डेवलप करने के लिया कहा है। हालांकि, सरकार ने बजट में यह नहीं बताया कि वो कैसे गोल्ड को एसेट क्लास बनाएगी। लेकिन इंडस्ट्री को लगता है कि जैसे घर, कार खरीदने के लिए लोन मिलता है। वैसे ही सरकार गोल्ड खरीदने के लिए लोन देने का मैकेनिज्म ला सकती है। इंडस्ट्री सरकार से 22 कैरेट गोल्ड ज्वैलरी खरीदने के लिए ईएमआई शुरू करने की मांग कर रही थी। ऐसा हो सकता है कि सरकार इसी दिशा में कन्ज्यूमर के लिए पॉजिटिव पॉलिसी लेकर आए।

 

सरकार बनाएगी गोल्ड एक्सचेंज

 

नितिन खंडेलवाल ने कहा कि ये बड़ी बात है कि सरकार ने दो साल के बाद गोल्ड पॉलिसी लाए जाने की बात को स्वीकारा है। सरकार पॉलिसी फॉरमेशन, गोल्ड स्पॉट एक्सचेंज और गोल्ड डिपोजिट स्कीम पर काम करना चाहती है। हालांकि, सरकार ने अभी यह तय नहीं किया है कि गोल्ड को लेकर कोई रेग्युलेटर होगा या नहीं। बजट में गोल्ड स्पॉट एक्सचेंज बनाने पर जोर दिया गया लेकिन इसके लिए सेबी रेग्युलेट करने के लिए तैयार नहीं है। अब देखना होगा कि सरकार इस दिशा में आगे कैसे काम करेगी।

 

गोल्ड एक्सचेंज से इंडस्ट्री होगी ट्रांसपेरेंट

 

गोल्ड एक्सचेंज से इंडियन बुलियन ट्रेड ट्रांसपेरेंट बनेगा। गोल्ड एक्सचेंज बनने से बी2बी इंपोर्टेड गोल्ड और इंडियन रिफाइनरी के गोल्ड एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर बिकेंगे। एक्सचेंज बनने से होलसेलर और ज्वैलर को एक्सचेंज से गोल्ड खरीदने का नया मौका मिलेगा। ऐसा हो सकता है कि आगे सरकार कन्ज्यूमर को भी कुछ लिमिट तक गोल्ड बार और क्वाइन एक्सचेंज से खरीदने की इजाजत दे।

 

नई गोल्ड  मोनेटाइजेशन स्कीम से बढ़ेगी सेविंग

 

फाइनेंस मिनिस्टर ने गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम पर कहा कि इसे ऐसा बनाया जाएगा कि गोल्ड डिपॉजिट अकाउंट आसानी से खोले जा सकें। बुलियन इंडस्ट्री ने इसका स्वागत किया है। इंडियन बुलियन और ज्वैलर्स एसोसिएशन के सेक्रेटरी सुरेंद्र भाटिया ने बताया कि गोल्ड डिपॉजिट स्कीम से डिपोजिटर को गोल्ड खरीदकर पैसा सेव करने में मदद मिलेगी। ये एक सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान की तरह काम करेगा। वह सरकार से इस स्कीम में ज्वैलर्स को भी जोड़ने की मांग कर रहे हैं ताकि ये स्कीम सफल हो सके।

 

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आगे पढ़ें - आगे क्या है सरकार का फोकस

 

 

इंडिया से गोल्ड एक्सपोर्ट करने पर फोकस

 

इंडस्ट्री ने पॉलिसी में यह सलाह दी थी कि इंडियन कंपनियों या गोल्ड रिफाइंनरी को एक्सपोर्ट करने की इजाजत दी जाए। इसके लिए इंडियन गोल्ड स्टैंडर्ड को लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन के साथ सिंक किया जा रहा है। ताकि, वह इंडियन गोल्ड इंटरनेशनल स्टैंडर्ड को मैच कर सके। इसके लिए गोल्ड रिफाइनरी को बीआईएस के तहत जुलाई तक रजिस्टर करना होगा। ताकि, वह बीआईएस स्टैंडर्ड को पूरा कर सके।

 

इंडिया ग्लोबली गोल्ड का प्राइस तय करने में कर सकता है रोल प्ले

 

अगर इंडिया गोल्ड एक्सपोर्ट शुरू करता है तो वह गोल्ड प्राइस तय करने में ग्लोबली रोल प्ले कर सकता है। अभी तक गोल्ड का सबसे बड़ा कन्ज्यूमर होने के बावजूद वह प्राइस तय नहीं करता जबकि दिए प्राइस पर खरीदता है। अभी इंडिया में गोल्ड प्राइस इंटरनेशनल मार्केट में गोल्ड प्राइस की मूवमेंट पर तय होता है। एक्सपोर्ट मार्केट में इंडियन गोल्ड को स्थापित करने के लिए इंडिया को गोल्ड निकालने के इंटरनेशनल माइन्स की प्रेक्टिस और स्टैंडर्ड को भी फॉलो करना होगा।

 

 

 

 

 

 

 

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