बिज़नेस न्यूज़ » Economy » Policyजवानों को छू तक नहीं पाएगी AK-47 की गोली, 638 करोड़ में मिलेगा वर्ल्‍ड क्‍लास 360 डिग्री कवच

जवानों को छू तक नहीं पाएगी AK-47 की गोली, 638 करोड़ में मिलेगा वर्ल्‍ड क्‍लास 360 डिग्री कवच

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के लिए अत्‍याधुनिक बुलेट प्रूफ जैकेट को मंजूरी दे दी है।

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नई दिल्‍ली. 9 साल पहले भारतीय जवानों द्वारा उठाई गई मांग अब पूरी होने वाली है। रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के लिए अत्‍याधुनिक बुलेट प्रूफ जैकेट को मंजूरी दे दी है। इस बारे में कैपिटल प्रोक्‍योरमेंट रूट से मंत्रालय ने 1,86,138 बुलेट प्रूफ जैकेट्स की खरीद के लिए कॉन्‍ट्रैक्‍ट साइन किया है। यह जानकारी मंत्रालय ने एक बयान के जरिए दी है। 

 

कॉन्‍ट्रैक्‍ट डॉमेस्टिक प्राइवेट कंपनी SMPP प्राइवेट लिमिटेड के साथ हुआ है। इन जैकेट्स की खरीद पर सरकार 639 करोड़ रुपए खर्च करेगी। यह सौदा पूरी तरह मेक इन इंडिया के तहत हुआ है। जैकेट्स की मैन्‍युफैक्‍चरिंग के लिए भारतीय मैन्‍युफैक्‍चरर्स का भी टेस्‍ट लिया गया था, जिसमें SMPP को सफलता मिली। 

 

क्‍या होगी खासियत 

इन जैकेट्स के लड़ाई के वक्‍त कारगर रहने को लेकर कड़ा परीक्षण किया गया है और उसके बाद इस खरीद को मंजूरी दी गई है। ये बुलेट प्रूफ जैकेट्स अत्‍याधुनिक हैं और इनमें सुरक्षा का स्‍तर काफी अच्‍छा है। इनमें श्रम दक्षता को ध्‍यान में रखते हुए मॉड्यूलर पार्ट्स हैं। ये लंबी दूरी की गश्‍त से लेकर ज्‍यादा जोखिम भरे स्‍थानों में विभिन्‍न परिस्थितियों में सेना के जवानों को पूरी सुरक्षा और फ्लेक्सिबिलिटी उपलब्‍ध कराते हैं। इन जैकेट्स से सैनिकों को लड़ाई के वक्‍त 360 डिग्री सुरक्षा प्राप्‍त होगी। 

 

आगे पढ़ें- AK-47 की बुलेट तक से देगी सुरक्षा 

पुरानी राइफल से लेकर AK-47 की बुलेट तक से देगी सुरक्षा 

हर जैकेट में बैलिस्टिक फैब्रिक में बोरोन कार्बाइड सिरेमिक प्‍लेट्स लगी हुई हैं। इनका वजन लगभग 10 किलो है। बोरोन कार्बाइड सिरेमिक बैलिस्टिक प्रोटेक्‍शन के लिए सबसे हल्‍का मैटेरियल है। ये जैकेट पुरानी इंडियन आर्मी सेल्‍फ लोडिंग राइफल्‍स की 7.62x51 एम्‍युनिशन वाली रेगुलर बुलेट्स रोकने में तो सक्षम हैं ही, साथ ही 5.56x45 INSAS राउंड्स और नई तरह की हार्ड स्‍टील वाली कोर बुलेट्स जैसे AK-47 की 7.62x39 mm बुलेट्स से सुरक्षा में भी दक्ष हैं।  यहां तक कि ये नई तरह की हार्ड स्‍टील वाली कोर बुलेट्स से भी जवानों की रक्षा में सक्षम होंगी। 

 

आगे पढ़ें- 2009 में की गई थी मांग 

2009 में की गई थी जैकेट्स की मांग 

जवानों के लिए अत्‍याधुनिक बुलेट प्रूफ जैकेट्स की जरूरत को लेकर को लेकर उच्‍च स्‍तर पर चिंता प्रकट की गई थी। भारतीय सेना द्वारा 2009 में नई तरह की बुलेट प्रूफ जैकेट्स की मांग की गई थी। सेना ने 3.53 लाख से ज्‍यादा जैकट्स की जरूरत का हवाला दिया था। लेकिन विभिन्‍न कारणों के चलते इसे मंजूरी नहीं मिल पा रही थी। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में भी सीमा पर और बहुत ज्‍यादा गड़बड़ी वाले क्षेत्रों में जवानों के लिए हाई लेवल सिक्‍योरिटी की जरूरत का हवाला दिया गया था। मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि जवानों के लिए बुलेट प्रूफ जैकेट को मंजूरी मिलने से सैनिकों की सुरक्षा में तो एक लेयर जुड़ेगी ही, साथ ही उनका उनका आत्‍मविश्‍वास भी बढ़ेगा। 

 

आगे पढ़ें- इंडियन इंडस्‍ट्री को भी मिलेगा आत्‍मविश्‍वास

भारतीय इंडस्‍ट्री का भी बढ़ेगा आत्‍मविश्‍वास 

सरकार का कहना है कि डॉमेस्टिक लेवल पर बुलेट प्रूफ जैकेट सौदे से मेक इन इंडिया पहल को भी रफ्तार मिलेगी। इसके अलावा भारतीय इंडस्‍ट्री का भी इस बात को लेकर आत्‍मविश्‍वास बढ़ेगा कि वह भारतीय जवानों की सुरक्षा में सक्षम इक्विपमेंट्स की जरूरत को पूरा कर सकते हैं। 

 

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