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आधार से बैंक अकाउंट और मोबाइल लिंक कराना फिलहाल अनिवार्य नहीं, SC ने कहा-मजबूर नहीं कर सकती सरकार

सुप्रीम कोर्ट ने बैंक अकाउंट और मोबाइल फोन से आधार लिंकिंग को अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया है।

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नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट ने बैंक अकाउंट, मोबाइल सिम समेत कई सर्विसेज के लिए आधार लिंकिंग की अनिवार्यता को अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में फैसला आने तक आधार लिंक कराना अनिवार्य नहीं होगा। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्‍यक्षता वाली पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने मंगलवार को यह भी कहा कि सरकार आधार लिंकिंग के लिए मजबूर नहीं कर सकती। पीठ केंद्र सरकार की इस बायोमीट्रिक स्‍कीम और इसे प्रभावी बनाने वाले कानून (आधार एक्‍ट) की वैधता को चुनौती देने वाली पिटीशन पर अपना फैसला देने वाली है। 

 

 

सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने कहा है कि इस मामले पर संवैधानिक पीठ का फैसला आने तक यह बैंक, मोबाइल नंबर से आधार को लिंक कराना अनिवार्य नहीं होगा। कोर्ट का आधार पर पूरा फैसला आने तक सरकार किसी तरह की कोई डेडलाइन जारी नहीं कर सकेगी। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला देते हुए कहा है कि सब्सिडी के लिए आधार जरूरी रहेगा। इससे पहले, पीठ ने 7 मार्च को कहा था कि आधार कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली पिटीशंस पर 31 मार्च तक फैसला देना मुमकिन नहीं हो सकता है। पिछले साल 15 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने वेलफेयर स्‍कीम और विभिन्‍न सर्विसेज के लिए आधार लिंकिंग के अनिवार्यता की डेडलाइन 31 मार्च तक बढ़ा दी थी। 

 

बता दें, कनार्टक हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस केएस पुट्टुस्‍वामी ने 22 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि आधार आधारित पब्लिक डिस्ट्रिब्‍यूशन सिस्‍टम (पीडीएस) में खामियों के चलते कई लोगों की मौत भूख से हो गई। शीर्ष कोर्ट को इस मामले में मुआवजा पर भी जरूर सोचना चाहिए। बता दें, सरकार पीडीएस के लिए बीपीएल को राशन देती है। ऐसी कई शिकायतें आईं जिनमें आधार के बिना पीडीएस से राशन देने से मना कर दिया गया। 

 

केंद्र सरकार ने इससे पहले सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह अलग-अलग सर्विसेस और वेलफेयर स्कीम्स को आधार से लिंक करने की 31 मार्च की डेडलाइन आगे बढ़ा सकती है। केंद्र ने कहा कि चूंकि आधार से जुड़े मामले की सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई खत्म होने में अभी वक्त है, इसलिए सरकार यह डेडलाइन बढ़ा सकती है। आधार से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान बेंच सुनवाई कर रही है। बेंच की अध्यक्षता चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा कर रहे हैं। बेंच में जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अशोक भूषण हैं।

 

31 मार्च तक इनके लिए जरूरी थी आधार लिंकिंग 

1. बैंक अकाउंट

2. म्‍युचुअल फंड 
3. पोस्‍ट ऑफिस स्‍कीम्‍स 
4. इश्‍योरेंस 
5. मोबाइल सिम
6. सोशल सिक्‍योरिटी स्‍कीम्‍स 


80% बैंक अकाउंट्स, 60% मोबाइल आधार से जुड़े

अबतक देशभर के करीब 80% बैंक अकाउंट्स आधार से लिंक हो चुके हैं। यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) के एक अफसर के मुताबिक, करीब 60% मोबाइल कनेक्शन्स भी आधार से जोड़े जा चुके हैं। बता दें कि बैंक अकाउंट्स में संदिग्ध गतिविधियों और फ्रॉड जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने बैंक अकाउंट्स और पैन (PAN) को आधार से लिंक कराने के निर्देश जारी किए थे। इसके अलावा, मोबाइल सर्विसेस इस्तेमाल करने वालों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने सिम कार्ड्स को भी आधार से लिंक कराने की बात कही थी।

 

 

आगे पढ़ें... क्‍यों हो रही है आधार मामले की सुनवाई  

 


बैंक अकाउंट और मोबाइल नंबर से आधार लिंक करना जरूरी किए जाने के नियम को कोर्ट में चुनौती दी गई है। पिटीशनर्स का कहना है कि ये गैर-कानूनी और संविधान के खिलाफ है। इसमें कहा गया है कि यह नियम संविधान के आर्टिकल 14, 19 और 21 के तहत दिए गए फंडामेंटल राइट्स को खतरे में डालता है। हाल ही में 9 जजों की की कॉन्स्टीट्यूशन बेंच ने कहा था कि राइट ऑफ प्राइवेसी फंडामेंटल राइट्स के तहत आता है।

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