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ऐसे बन सकते हैं LPG डिस्‍ट्रीब्‍यूटर, ये है पूरी डिटेल

कई लोग हैं, जो खुद का बिजनेस करना चाहते हैं। ऐसे लोगों के लिए LPG डिस्‍ट्रीब्‍यूटरशिप फायदेमंद बिजनेस साबित हो सकता है।

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नई दिल्‍ली. देश में कई लोग ऐसे हैं, जो खुद का बिजनेस करना चाहते हैं। ऐसे लोगों के लिए एलपीजी डिस्‍ट्रीब्‍यूटरशिप एक फायदेमंद बिजनेस साबित हो सकता है। एलपीजी डिस्‍ट्रीब्‍यूटर बन आप कम लागत में अच्‍छी कमाई कर सकते हैं। आइए आपको बताते हैं कि एलपीजी डिस्‍ट्रीब्‍यूटर बनने के लिए किस योग्‍यता, बेसिक सुविधाओं और कितनी लागत की जरूरत होती है और कैसे ऑयल कंपनियां डिस्‍ट्रीब्‍यूटर का सिलेक्‍शन करती हैं। 

 

कितने साल की डिस्‍ट्रीब्‍यूटरशिप

- एचपी गैस और भारतगैस की डिस्‍ट्रीब्‍यूटरशिप शुरुआत में 10 साल की होती है। उसके बाद इसे हर 5 साल पर रिन्‍यू किया जाता है। यह डिस्‍ट्रीब्‍यूटर की परफॉर्मेंस पर निर्भर करता है। 
- इंडेन गैस की डिस्‍ट्रीब्‍यूटरशिप शुरुआत में 10 साल की होती है। उसके बाद डिस्‍ट्रीब्‍यूटरशिप एग्रीमेंट में के मुताबिक इसकी अवधि रहती है। 

 

योग्‍यता

- एलपीजी डिस्‍ट्रीब्‍यूटर बनने के लिए पहली शर्त उसका भारतीय नागरिक होना है। आदमी या औरत कोई भी डिस्‍ट्रीब्‍यूटर बन सकता है। 
- आवेदनकर्ता का कम से कम 10वीं पास होना जरूरी है। स्‍वतंत्रता सेनानी कैटेगरी वाले आवेदनकर्ता को इससे छूट है। 
- आवदेनकर्ता की उम्र 21 साल से कम और 60 साल से ज्‍यादा नहीं होनी चाहिए। 
- आवेदनकर्ता ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के इंप्‍लॉई के परिवार का सदस्‍य नहीं होना चाहिए। 
- आवेदनकर्ता पर किसी भी तरह का कानूनी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ हो। 

 

सोर्स- https://www.iocl.com/download/Brochure-for-Selection-of-LPG-Distributorship.pdf

 

आगे पढ़ें- ऐसे होता है सिलेक्‍शन

कैसे होता है सिलेक्‍शन 

देश की तीनों सरकारी कंपनियां इंडेन, भारत गैस और एचपी गैस डीलर बनाने के लिए अखबारों और अपनी वेबसाइट पर वि‍ज्ञापन और नोटि‍फि‍केशन जारी करती हैं। इसमें यह सूचना होती है कि डिस्‍ट्रीब्‍यूटरशिप 

कहां के लिए है। डिस्‍ट्रीब्‍यूटर्स 4 कैटेगरी के तहत आते हैं- शहरी, अर्दशहरी, ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रीय वितरक। एप्‍लीकेंट्स को www.lpgvitarakchayan.in पर रजिस्‍ट्रेशन कर आवेदन करना होता है। इसके 

तहत एप्‍लीकेशन फीस के साथ ऑनलाइन फॉर्म सबमिट करना होता है। आवेदनकर्ता एक आवेदन में केवल एक ही लोकेशन के लिए आवेदन कर सकता है। एक से ज्‍यादा लोकेशन के लिए अलग-अलग आवेदन करने होंगे और इसके लिए फीस भी अलग-अलग देनी होगी। इसके बाद लॉटरी के जरिए डिस्‍ट्रीब्‍यूटर चुने जाते हैं। लॉटरी से चुनाव होने के बाद जि‍न लोगों का नाम लि‍स्‍ट में आएगा उन्‍हें फि‍र आगे की 

प्रक्रि‍या पूरी करने के लि‍ए बुलाया जाता है। इसके लिए उन्‍हें ईमेल और फोन के जरिए सूचित किया जाता है। 

 

आगे पढ़ें- इतना करना होता है सिक्‍योरिटी डिपॉजिट 

कितना सिक्‍योरिटी डिपॉजिट 

सिलेक्‍शन होने के बाद आवेदनकर्ता को 7 दिन के अंदर जरूरी डॉक्‍यूमेंट्स के साथ सिक्‍योरिटी डिपॉजिट का 10 फीसदी संबंधित ऑफिस में जमा करना होता है। सिक्‍योरिटी डिपॉजिट इंट्रेस्‍ट फ्री और रिफंडेबल होता है। शहरी व अर्ध शहरी डिस्‍ट्रीब्‍यूटर्स के लिए टोटल सिक्‍योरिटी डिपॉजिट 5 लाख रुपए और ग्रामीण व दुर्गम क्षेत्रीय डिस्‍ट्रीब्‍यूटर्स के लिए 4 लाख रुपए है। हालांकि रिजर्वेशन वाली कैटेगरी के लिए डिपॉजिट का अमाउंट इस सीमा से कम है। पूरा सिक्‍योरिटी डिपॉजिट अपॅाइंटमेंट लेटर मिलने तक जमा करना होता है। 

 

आगे पढ़ें- ये चीजें है जरूरी 

किन बेसिक सुविधाओं की पड़ेगी जरूरत

- एलपीजी डिस्‍ट्रीब्‍यूटरशिप लेने के लिए चुने गए कैंडीडेट को एलपीजी सिलेंडर रखने के लिए जगह यानी गोदाम का इंतजाम करना होगा। 
- लेटर ऑफ इंटेंट में उल्लिखित समयसीमा के अंदर पेट्रोलियम एंड सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन समेत अन्‍य सांविधिक निकायों से आवश्‍यक मंजूरी लेनी होगी। 
- गोदाम ऐसी जगह पर होना चाहिए, जहां हर मौसम में एलपीजी सिलेंडर ट्रक आ-जा सके और सड़क कनेक्टिविटी उपलब्‍ध हो। अगर ऐसा नहीं है तो कैंडीडेट को एलओआई मंजूर करते वक्‍त इस बात की जिम्‍मेदारी 

लेनी होगी कि वह तय अवधि के अंदर यह व्‍यवस्‍था कर देगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो एलओआई कैंसल कर दिया जाएगा और जमा किया हुआ 10 फीसदी सिक्‍योरिटी डिपॉजिट जब्‍त कर लिया जाएगा। 
- चुने गए शहरी, अर्धशहरी और ग्रामीण वितरकों को स्‍टैंडर्ड लेआउट के मुताबिक एलपीजी शोरूम का निर्माण कराना होगा। 

 

आगे पढ़ें- फील्‍ड वेरिफिकेशन

लोकेशन ऐसे होती है अप्रूव 

एलपीजी डिस्‍ट्रीब्‍यूटरशिप के लिए लोकेशन को मंजूरी रीफिल सेल पोटेंशियल के आधार पर मिलती है। यह पोटेंशियल घरों की संख्‍या, प्रति व्‍यक्ति खपत, एलपीजी कवरेज और मौजूदा या प्रस्‍तावित पीएनजी 

कनेक्‍शंस के आधार पर तय होता है। ऑयल कंपनियां फील्‍ड वेरिफिकेशन के बाद कैंडीडेट को लेटर ऑफ इंटेंट जारी करती हैं। लेटर ऑफ इंटेंट मिलने के बाद कैंडीडेट को ट्रेनिंग दी जाती है और उसे 80 फीसदी अंकों के साथ एक प्री-कमीशनिंग क्विज या टेस्‍ट पास करना होता है। जो इतने अंक हासिल नहीं कर पाता, उसे फिर से ट्रेनिंग दी जाती है और दोबारा टेस्‍ट होता है। कमीशनिंग से पहले कैंडीडेट को लेटर ऑफ अपॉइंटमेंट जारी किया जाता है और उसे एक एग्रीमेंट करना होता है। 

 

आगे पढ़ें- कितनी हो गोदाम की क्षमता

गोदाम की क्षमता

शहरी व अर्धशहरी वितरकों के लिए एलपीजी गोदाम की क्षमता न्‍यूनतम 8000 किलो एलपीजी की होनी चाहिए। ग्रामीण वितरकों के लिए यह न्‍यूनतम 5000 किलो एलपीजी तय की गई है। वहीं दुर्गम क्षेत्रीय 

वितरकों के लिए यह क्षमता 3000 किलो एलपीजी की है। 

 

आगे पढ़ें- ओनरशिप के लिए ये हैं नियम

ओनरशिप के नियम 

- गोदाम या शोरूम आवेदनकर्ता या उसके परिवार के सदस्‍यों जैसे- माता-पिता, भाई-बहन, पत्‍नी, बच्‍चे आदि के नाम पर हो सकता है। परिवार वालों के नाम पर ओनरशिप होने पर उनकी ओर से किसी भी तरह की 

आपत्ति न होने का डिक्‍लेरेशन किया जाना जरूरी है। 
- अगर आवेदनकर्ता द्वारा ऑफर की गई गोदाम या शोरूम की लोकेशन ऑयल कंपनियों द्वारा तय किए गए नॉर्म्‍स को पूरा नहीं करती है तो आवेदनकर्ता किसी और लोकेशन को भी ऑफर कर सकता है। 

 

आगे पढ़ें- डिस्‍ट्रीब्‍यूटर नहीं कर सकता नौकरी

डिस्‍ट्रीब्‍यूटरशिप लेने वाला नहीं कर सकता नौकरी 

डिस्‍ट्रीब्‍यूटर को खुद ही अपनी एजेंसी संभालनी होगी। अगर कोई आवेदनकर्ता किसी नौकरी में है तो अपॉइंटमेंट लेटर प्राप्‍त करने से पहले उसे नौकरी छोड़नी होगी और आगे डिस्‍ट्रीब्‍यूटरशिप रहने तक वह कोई और नौकरी नहीं कर सकता। 

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