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मोदी सरकार का 5वें साल में होगा असल टेस्‍ट, महंगा क्रूड और रोजगार सबसे बड़ा चैलेंज

मोदी सरकार की पांचवे साल में होगी असल परीक्षा होगी। क्रूड और रोजगार बड़ा चैलेंज हैं।

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नई दिल्‍ली. नरेंद्र मोदी सरकार के पहले चार साल के लिए मानसून और तेल (क्रूड) लकी साबित हुआ। लेकिन, अब पांचवें साल में सरकार की असल परीक्षा होगी। सबसे बड़ा चैलेंज क्रूड की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने मोदी सरकार     के चार साल पर जारी अपनी रिपोर्ट में यह बात कही। 

रिपोर्ट के अनुसार, अर्थव्‍यवस्‍था को सही तरीके से चलाने की कोशिश में जुटी मोदी सरकार की परीक्षा पांचवें  साल में हो सकती है। क्‍योंकि सरकार के सामने कई तरह के बड़े चैलेंज हैं, जिनमें क्रूड की बढ़ती कीमतें अहम हैं। इसके अलावा सरकार के सामने रोजगार, विदेशी निवेश, मैन्‍युफैक्‍चरिंग को लेकर भी चुनौतियां, जिनकी असल परीक्षा होगी। 

 

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अर्थव्‍यवस्‍था के अहम इंडिकेटर्स ट्रैक पर

क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्‍ट डीके जोशी का कहना है कि पिछले चार में भारत की विकास दर 7.3 फीसदी रही, जो यूपीए के दौरान 10 साल में औसतन 7.6 फीसदी से कम है। हालांकि, अर्थव्‍यवस्‍था के मैक्रो इंडिकेटर्स पर सुधार दिखाई दे रहा है।

रेटिंग एजेंसी का कहना है कि सरकार ने बड़े नीतिगत कदम उठाए, जिनका असर अर्थव्‍यवस्‍था के बड़े मानकों पर दिखाई दे रहा है। राजकोषीय और चालू खाता घाटा (सीएडी) बेहतर हुआ है लेकिन पिछले साल इसमें भी विपरीत रुझान दिखाई दिया। यानी घाटा लक्ष्‍य से ज्‍यादा रहने का अनुमान है। 

 

महंगाई पर रहा कंट्रोल, लेकिन आगे की राह मुश्किल 
क्रिसिल का कहना है कि मोदी सरकार के चार साल में महंगाई के मोर्चे पर कोई दिक्‍कत नहीं हुई। अच्‍छे मानसून और सस्‍ते क्रूड के चलते कीमतों पर कंट्रोल रहा। लेकिन फिलहाल क्रूड ही सरकार के लिए चुनौती बन गया है। पिछले दिनों क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल के लेवल के पार चला गया। रिपोर्ट के अनुसार, महंगे क्रूड के चलते पेट्रोल-डीजल महंगा हो रहा है। महंगे डीजल का असर सीधे तौर पर महंगाई पर पड़ सकता है। क्रूड की कीमत में प्रति बैरल 10 डॉलर की बढ़ोत्‍तरी से वित्‍तीय घटा 0.08 फीसदी और चालू खाता घाटा 0.40 फीसदी बढ़ जाएगा। इसमें रुपए की कमजोरी ने और दिक्‍कत बढ़ा दी है। 

 

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बिजनेस सेंटिमेंट पर नहीं दिखा खास असर 
रिपोर्ट का कहना है कि बाहरी मोर्चो पर सराकर के लिए हालात प्रतिकूल रहे। ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था में संकट बढ़ा है। वैश्विक प्रतिस्‍पर्धा सूचकांक और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग सुधरने के बावजूद जमीनी स्‍तर पर बिजनेस सेंटीमेंट में बढ़ा सुधार नहीं आया है। 

 

सरकार के लिए इन मोर्चों पर रही दिक्‍कत 
क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार की कोशिश के बावजूद कृषि विकास दर कम रही, फसल की कीमतें खास नहीं बढ़ी, निर्माण गतिविधियां कम रही और ग्रामीण इलाकों में वेतन-भत्‍तों की ग्रोथ कम रही। रोजगार का मामला सरकार के लिए परेशान करने वाला रहा। निर्माण और मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर में नौकरियां खास नहीं पैदा हुईं। 

 

 

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FY19 में 7.9% ग्रोथ का अनुमान 
क्रिसिल ने वित्‍त वर्ष 2018-19 में जीडीपी ग्रोथ 7.5 फीसदी रहने का अनुमान बरकरार रखा है। उसका यह भी कहना है कि प्राइवेट सेक्‍टर के निवेश में तेजी और रिफॉर्म्‍स को जल्‍दी से जल्‍दी लागू कराया गया तो विकास दर 8 फीसदी पर पहुंच जाएगी। रिपोर्ट का कहना है कि सरकार का रिफॉर्म ट्रैक पर है और मीडियम से लॉन्‍ग टर्म में इसका फायदा दिखाई देगा। 

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