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इकोनॉमिक सर्वे: 7.5% ग्रोथ के साथ भारत बन सकता है सबसे तेज बढ़ने वाली इकोनॉमी

 

 

नई दिल्‍ली. 2018-19 में 7 से 7.5 फीसदी की ग्रोथ के साथ भारत एक बार फिर से दुनिया की सबसे तेज विकसित होने वाली इकोनॉमी बन सकता है, जो मौजूदा वित्त वर्ष की 6.75 फीसदी ग्रोथ की तुलना में काफी ज्यादा है। इकोनॉमी को बीते एक साल के दौरान किए गए रिफॉर्म्स से खासा सपोर्ट मिला और इसका असर अगले साल भी दिखेगा। हालांकि 2018-19 में क्रूड की कीमतों में तेजी जैसे कई फैक्टर चुनौती के तौर पर सामने आ सकते हैं, जिनसे महंगाई को काबू में रखना मुश्किल हो सकता है। फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली द्वारा सोमवार को लोकसभा में 2017-18 के लिए पेश किए गए इकोनॉमिक सर्वे ये बातें कही गईं। क्रूड की कीमतों में 12 फीसदी बढ़ोत्तरी का अनुमान...

 

 

- FY 2018 में जीडीपी ग्रोथ 6.75% रहने की उम्मीद

- FY 2019 में जीडीपी ग्रोथ 7 से 7.5% रहने की उम्मीद

- FY 2018 में सर्विस ग्रोथ 8.3% रहने का अनुमान

- FY 2018 में एग्रीकल्चर ग्रोथ 2.1% रहने की उम्मीद

- फाइनेंशियल ईयर 2019 में क्रूड की कीमतों में 12% बढ़ोत्तरी का अनुमान।

 

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2018-19 में 7 से 7.5 फीसदी ग्रोथ का अनुमान

इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक बीते एक साल के दौरान किए गए बड़े रिफॉर्म्स से इस वित्त वर्ष के दौरान 6.75 फीसदी की जीडीपी ग्रोथ हासिल करना संभव होगा और 2018-19 में यह बढ़कर 7 से 7.5 फीसदी के बीच रहेगी। इसके साथ ही भारत दुनिया की सबसे तेज विकसित होने वाली इकोनॉमी बन जाएगा। सर्वे में कहा गया कि रिफॉर्म्स का असर 2018-19 में भी दिखता रहेगा।

 

इंडस्ट्री सेक्टर के दम पर बदला गिरावट का ट्रेंड

सर्वे में कहा गया कि 2017-18 के दूसरे क्वार्टर के दौरान इंडस्ट्री सेक्टर की अगुआई में जीडीपी ग्रोथ में गिरावट का ट्रेंड बदलता हुआ दिखा है। कॉन्स्टैंट बेसिक प्राइस पर 2017-18 में ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) ग्रोथ 6.1 फीसदी रहने का अनुमान है, जबकि 2016-17 में यह आंकड़ा 6.6 फीसदी रहा था। इसी प्रकार 2017-18 में एग्रीकल्चर, इंडस्ट्री और सर्विसेज सेक्टर की ग्रोथ क्रमशः 2.1 फीसदी, 4.4 फीसदी और 8.3 फीसदी रहने का अनुमान है।

 

बेस्ट परफॉर्मिंग इकोनॉमी बन सकता है भारत

सर्वे में कहा गया कि बीते तीन साल के दौरान ग्लोबल ग्रोथ की तुलना में भारत की एवरेज ग्रोथ 4 फीसदी प्वाइंट ज्यादा रही है और इमर्जिंग मार्केट व डेवलपिंग इकोनॉमीज की तुलना में 3 फीसदी प्वाइंट ज्यादा रही है। इससे साफ है कि 2014-15 से से 2017-18 के बीच भारत की जीडीपी ग्रोथ एवरेज 7.3 फीसदी रही, जो दुनिया की बड़ी इकोनॉमीज की तुलना में ज्यादा है।

 

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वित्तीय घाटा फीसदी रहने का अनुमान

-अगले फाइनेंशियल ईयर में बेहतर एक्सपोर्ट के सहारे इकोनॉमी में ग्रोथ देखने को मिलेगी। मौजूदा फाइनेंशियल में डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन का टारगेट हासिल होने की उम्मीद है।

-फाइनेंशियल ईयर 2019 में वित्तीय घाटे के लक्ष्य में मामूली बढ़त संभव है। फाइनेंशियल ईयर 2019 में वित्तीय घाटे का लक्ष्य 3 फीसदी रहने का अनुमान है। जीएसटी कलेक्शन में सुधार की उम्मीद है और आगे जीएसटी रेवेन्यू में बढ़ोतरी होगी।

 

महंगाई साल के न्‍यूनतम स्‍तर पर

आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, महंगाई काबू में बनी हुई है। चालू वित्‍त वर्ष के दौरान कंज्‍यूमर प्राइस इंडेक्‍स (सीपीआई) 3.3 फीसदी रही है, जो पिछले 6 साल में सबसे न्‍यूनतम स्‍तर है।

 

एग्रीकल्‍चर ग्रोथ रहेगी 2.1%, घटेगा फूड प्रोडक्‍श्‍ान

-इकोनॉमि‍क सर्वे में एग्रीकल्‍चर पर स्‍पेशल चैप्‍टर रखा गया है, जो पि‍छली बार नहीं था। सर्वे में वर्ष 2017-18 में एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर की ग्रोथ 2.1 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है जो वर्ष 2016-17 की ग्रोथ से 2.8 फीसदी कम है। पि‍छली बार एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर की ग्रोथ 4.9 फीसदी रही थी।

-सर्वे में कहा गया कि‍ इसा बार खराब मानसून की वजह से फसलों के उत्‍पादन पर असर पड़ेगा। 22 सि‍तंबर 2017 को जारी हुए फर्स्‍ट एडवांस एस्‍टीमेट के मुताबि‍क, इस बार खरीफ फसलों का प्रोडक्‍शन 13.47 करोड़ टन रहने का अनुमान है। यह 2016-17 के मुकाबले 39 लाख टन कम है। वर्ष 2016-17 में खरीफ का प्रोडक्‍शन 13.85 करोड़ टन था।

 

इनडायरेक्‍ट टैक्‍सपेयर्स की संख्‍या 50 फीसदी बढ़ी

-इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया है कि जीएसटी ने भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था को नया नजरिया दिया है। इनडायरेक्‍ट टैक्‍सपेयर्स की संख्‍या में 50 फीसदी तक इजाफा हुआ है।

-इसी तरह से नवंबर, 2016 के बाद से इंडिविजुअल इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल करने वालों की संख्‍या 18 लाख तक बढ़ी है।

-सर्वे में कहा गया है कि टैक्‍स डिस्‍प्‍यूट के मामलों को इनकम टैक्‍स विभाग ने अदालतों में चुनौती लेकिन इस मामले में इनकम टैक्‍स विभाग की सफलता की दर 30 फीसदी ही है।

-टैक्‍स डिस्‍प्‍यूट के 66 फीसदी लंबित मामलों में सिर्फ 1.8 फीसदी वैल्‍यू स्‍टेक पर है। वहीं टैक्‍स डिस्‍प्‍यूट के 0.2 फीसदी मामलों में 55 फीसदी वैल्‍यू स्‍टेक पर है।

-सर्वे में कहा गया है कि भारत में राज्‍यों और स्‍थानीय निकायों की डायरेक्‍ट टैक्‍स कलेक्‍ट करने की पावर दूसरे देशों की तुलना में काफी कम है।

 

 

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एक्सपोर्ट में ग्रोथ बनी रहने की उम्मीद

-इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक एक्सपोर्ट ग्रोथ दो साल तक निगेटिव रहने के बाद 2016-17 में पॉजिटिव टेरिटरी में आई और इसके 2017-18 में भी तेज बने रहने की उम्मीद है।

-इसके अलावा कुछ देशों में प्रोटेक्शनिज्म की प्रवृत्ति देखने को मिली है, हालांकि अभी यह देखना बाकी है कि कैसे हालात सामने आते हैं।

-वहीं 2017-18 में अनुमान से ज्यादा इंपोर्ट होने से गुड्स और सर्विसेज के नेट एक्सपोर्ट में गिरावट देखने को मिली है।

 

5 राज्य करते हैं देश का 70 फीसदी एक्सपोर्ट

- सर्वे में बताया गया है कि महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना देश का 70 फीसदी एक्सपोर्ट करते हैं। एक्सपोर्ट परफॉर्मैंस और राज्य के स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग में काफी को-रिलेशन है। जीएसटी डेटा एक्सपोर्ट और राज्यों के रिलेशन के बारे में भी बता रहा है।

- बड़े एक्सपोर्ट हाउस की एक्सपोर्ट में हिस्सेदारी दूसरे देशों के बड़े एक्सपोर्ट हाउस के शेयर की तुलना में काफी कम है।

- कुल एक्सपोर्ट में बड़े एक्सपोर्ट हाउस की हिस्सेदारी ब्राजील में 72 फीसदी, जर्मनी में 68 फीसदी, मेक्सिको में 67 फीसदी और अमेरिका में 55 फीसदी है। वहीं, भारत में इनकी हिस्सेदारी 38 फीसदी है।

 

 

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