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EVM से नहीं हो सकती छेड़छाड़, पूर्व इलेक्शन कमिश्नर ने बताई थी ये बातें

हार्दिक पटेल समेत कई विरोधी नेताओं ने एक बार फिर से ईवीएम में छेड़छाड़ का आरोप लगाया है

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नई दिल्ली. गुजरात और हिमाचल में हुए विधानसभा चुनाव के परिणाम लगभग आ चुके हैं। हिमाचल में जहां 5 साल बाद भाजपा फिर से सत्‍ता में वापसी करने में कामयाब रही है, वहीं गुजरात में उसने लगातार  6ठीं बार जीत दर्ज की है। हालांकि हार्दिक पटेल समेत कई विरोधी नेताओं ने एक बार फिर से ईवीएम में छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। हालांकि चुनाव अधिकारियों का अब भी दावा है कि ईवीएम से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है। 

 

10 हजार रुपए के करीब है कीमत
पूर्व इलेक्शन कमिश्नर वी.एस.संपथ से मनी भास्‍कर ने कुछ समय पहले ईवीएम बातचीत की थी। उन्‍होंने बताया था कि ईवीएम में छेड़छाड़ के आरोप बेबुनियाद हैं। इस तरह की छेड़छाड़ उसमें नहीं की जा सकती है। जहां तक कीमत की बात है, तो एक मशीन की कीमत उनके कार्यकाल के दौरान करीब 10 हजार रुपए की आती थी।

 

आगे पढ़िए- पहली बार क्या थी कीमत

 

 

 

5500 रुपए थी कीमत
इलेक्शन कमीशन की वेबसाइट के अनुसार पहली बार 1989-90 में ईवीएम मशीन खरीदी गई थी। उस समय एक मशीन की कीमत 5500 रुपए थी। इलेक्शन कमीशन के पूर्व एडवाइजर के.जे.राव के अनुसार ईवीएम सप्लाई की जिम्मेदारी पब्लिक सेक्टर की दो कंपनियों के पास है। जिनके जरिए चुनावों में सप्लाई होती है। इलेक्शन कमीशन अपनी जरूरत के अनुसार उनके मेंटरनेंस और नई खरीदारी की जिम्मेदारी देखता है।
 
 

इन दो कंपनियों के पास है जिम्मा
राव के अनुसार ईवीएम की मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई का काम पब्ल्कि सेक्टर यूनिट्स भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड बंगलुरू और इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड हैदराबाद के पास है। जो इलेक्शन कमीशन की जरूरत के अनुसार ईवीएम की सप्लाई करती हैं।
 

 

तीन कंपोनेंट हैं अहम
ईवीएम में एक कंट्रोल यूनिट, एक बैलेटिंग यूनिट और एक बैटरी का इस्तेमाल किया जाता है। जिसके जरिए वोटिंग का प्रोसेस किया जाता है। ईवीएम में एक 6 वोल्ट की एक अल्कलाइन बैटरी लगी होती है। ऐसे में बिना इलेक्ट्रिसिटी के भी ईवीएम का इस्तेमाल किया जा सकता है। ईवीएम में एक चिप का इस्तेमाल किया जाता है। जिसे इम्पोर्ट किया जाता है। जिसे किसी भी तरह रिराइट नहीं किया जा सकता है। इलेक्शन कमीशन की वेबसाइट के अनुसार जब तक चिप को डैमेज नहीं किया जाएगा, तब तक उसे रिराइट नहीं किया जा सकता है।
 
 

इन विधान सभाओं चुनावों में पहली बार हुआ यूज
इलेक्शन कमीशन की वेबसाइट के अनुसार सबसे पहले 16 विधान सभाओं में ईवीएम का इस्तेमाल किया गया था।
मध्यप्रदेश की 5 विधान सभा क्षेत्र
राजस्थान की 5 विधान सभा क्षेत्र
दिल्ली (एनसीटी) की 6 विधान सभा क्षेत्र

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