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जितनी चलेगी आपकी गाड़ी, सरकार का उतना भरेगा खजाना

पेट्रोल-डीजल के दाम में भले ही दिन-ब-दिन तेजी आती जा रही है लेकिन लोगों को अपना व्‍हीकल होने का शौक इससे बेअसर है।

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नई दिल्‍ली. आज के टाइम में हर कोई अपनी गाड़ी खरीदना चाहता है। पेट्रोल-डीजल के दाम में भले ही दिन-ब-दिन तेजी आती जा रही है लेकिन लोगों को अपना व्‍हीकल होने का शौक इससे बेअसर है। लेकिन क्‍या आपको पता है कि आपका यह शौक सरकार के खजाने को लगतार बढ़ा रहा है। आप अपनी पेट्रोल-डीजल से चलने वाली कार का जितना ज्‍यादा इस्‍तेमाल करते हैं, सरकार का खजाना उतना ही बढ़ता जाता है। कैसे, आइए आपको बताते हैं- 

 

दरअसल पेट्रोल-डीजल की असल कीमत उतनी नहीं है, जितने का वह बिकता है। ऑयल कंपनियों के पास जब पेट्रोल-डीजल होता है, तब वह काफी सस्‍ता होता है। लेकिन पेट्रोल पंप पर पहुंचते-पहुंचते इसके दाम लगभग दोगुने हो जाते हैं। 

 

इसे एक उदाहरण से समझते हैं। इंडियन ऑयल की वेबसाइट के मुताबिक, राजधानी दिल्‍ली में 5 जनवरी 2018 को पेट्रोल की कीमत 69.99 रुपए प्रति लीटर है। कच्चे तेल की खरीद और रिफाइनरी का खर्च मिलाने के बाद कंपनी, डीलर को एक लीटर पेट्रोल 32.05 रुपये में बेचती है। उसके बाद इस कीमत पर 19.48 रुपए प्रति लीटर एक्‍साइज ड्यूटी, 3.58 एवरेज डीलर कमीशन और 14.88 रुपए प्रति लीटर दिल्‍ली के लिए तय वैट लगा। इन सबको मिला दिया जाए तो दिल्‍ली में पेट्रोल की रिटेल प्राइस 69.99 रुपए प्रति लीटर हो गई। 

 

आगे पढ़ें- टैक्‍स से दोगुनी हो जाती है कीमत

टैक्‍स से दोगुनी हो गई कीमत 

यानी पेट्रोल की मूल कीमत 32.05 रुपए थी लेकिन इस पर डीलर का कमीशन और टैक्‍स मिलाकर कीमत दोगुने से भी ज्‍यादा पहुंच गई। इसी तरह डीजल का दाम भी बढ़ जाता है। 

 

आगे पढ़ें- कौन सा टैक्‍स किसके खजाने में 

वैट राज्‍य सरकार और एक्‍साइज ड्यूटी केन्‍द्र के खजाने में होता है एड 

पेट्रेाल की जिस कीमत का उदाहरण दिया गया, उसमें एक्‍साइज ड्यूटी और वैट को जोड़ें तो यह राशि डीलर द्वारा एक लीटर पेट्रोल के लिए दी गई राशि यानी 32.05 रुपए से भी ज्‍यादा है। बता दें कि वैट से वसूली गई राशि राज्‍य सरकार और एक्‍साइज ड्यूटी केन्‍द्र सरकार के खजाने में जाती है। यानी आप जितना ज्‍यादा पेट्रोल या डीजल खर्च करते हैं, सरकार को उतना ही ज्‍यादा टैक्‍स मिलता है। 

 

आगे पढ़ें- जीएसटी से कम होंगे दाम 

GST के दायरे में आने पर गिरेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम

अगर पेट्रोल-डीजल GZST के दायरे में आ जाता है तो इसकी कीमत कम होने की संभावना है। चूंकि सरकार को पेट्रोल-डीजल से काफी ज्‍यादा रेवेन्‍यू हासिल होता है तो संभव है कि इस पर GST में सबसे ज्‍यादा 28 फीसदी टैक्‍स प्‍लस सेस लगाया जाए। तब वैट और एक्‍साइज ड्यूटी खत्‍म हो जाएगी। एक बार फिर 5 जनवरी की पेट्रोल की कीमत का उदाहरण लेते हैं। अगर GST में पेट्रोल पर 28 फीसदी टैक्‍स लगा तो यह डीलर द्वारा 1 लीटर पेट्रोल के लिए दी गई कीमत प्‍लस डीलर कमीशन यानी 5 जनवरी की कीमत 35.63 रुपए पर लगेगा। यानी 1 लीटर पेट्रोल पर टैक्‍स 9.97 रुपए होगा। ऐसा होने पर कीमत पेट्रोल की रिटेल प्राइस जो 5 जनवरी को 69.99 रुपए पड़ी, वह 24.39 रुपए कम यानी 45.6 रुपए पड़ेगी। अगर सरकार सेस भी लगाती है तो भी GST में पेट्रोल के दाम मौजूदा दाम से कम ही रहने की संभावना है। 

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