Home » Budget 2018 » Consumerइकोनॉमिक सर्वे 2018 - FY-19 में इकोनॉमी मैनेजमेंट होगा चुनौती, क्रूड की कीमतें बन सकती हैं मुसीबत - CEA says recovery seen in economy in next fiscal but crude is concern

एक या दो राज्‍य 2 साल में शुरू कर सकते हैं यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्‍कीम, CEA ने जताया भरोसा

फाइनेंशियल ईयर 2019 में इकोनॉमी में सुधार होगा और बेहतर एक्सपोर्ट का इसमें बड़ा योगदान रहेगा।

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नई दिल्‍ली. चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर अरविंद सुब्रमण्‍यन ने उम्‍मीद जाहिर की है कि अगले 2 साल में एक या दो राज्‍य यूनिवर्सल बेसिक इनकम (UBI) व्‍यवस्‍था को लागू कर सकते हैं। इस व्‍यवस्‍था के तहत हर एक को स्‍टाइपेंड दिया जाता है चाहे वह गरीब हो या अमीर। इसमें बड़े और बच्‍चे सभी शामिल होते हैं। उन्‍होंने इकोनॉमिक सर्वे पेश होने के बाद ये बातें कहीं। 

 

उन्‍होंने कहा कि उनको भरोसा है कि अगले दो सालों में एक या दो राज्‍य यह व्‍यवस्‍था लागू कर सकते हैं। उन्‍होंने बताया कि इसमें सरकार हर व्‍यक्ति इतना पैसा देती है जिससे उसकी न्‍यूनतम जरूरतें पूरी हो सकें। वर्तमान में जारी गरीबी उन्‍मूलन स्‍कीम्‍स से वह परिणाम नहीं मिल पा रहें जिससे व्‍यवस्‍था बदलती लगे। 

 

 

सर्विस ग्रोथ में भी सुधार 
उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री और सर्विस ग्रोथ में भी सुधार होगा। हालांकि अगले फाइनेंशियल ईयर में क्रूड की बढ़ती कीमतें प्रमुख चिंता की बात हो सकती है। आने वाले दिनों में इकोनॉमी मैनेजमेंट चुनौतीपूर्ण होगा।

 

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-चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर ने कहा कि इस फाइनेंशियल ईयर में फिस्कल कंसोलिडेशन संभव नहीं हहै।
-उन्होंने कहा कि अगले साल इकोनॉमी मैनेजमेंट बेहद चुनौतीपूर्ण रहेगा। 
-चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर का कहना है कि कारोबार के लिए बेहतर हो रहे मालौल के बीच निजी निवेश में तेजी आने की उम्मीद है। 
-फिस्कल ईयर में डायरेक्ट टैक्स वसूली का भी टारगेट हासिल होने की उम्मीद है।
-फिस्कल ईयर 2018 में जीएसटी लॉन्च सरकार की बड़ी उपलब्धि रही है।
-सरकार ने जीएसटी से जुड़ी तमाम दिक्कतों को दूर की है, जिससे कारोबार में सुविधा हुई है।
-दरें बढ़ने से एक्सपोर्ट पर असर पड़ा है।

 

क्रूड की कीमतें बड़ी चिंता
चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर के अनुसार इंटरनेशनल मार्केट और इंडियन बास्केट में क्रूड की बढ़ती कीमतें प्रमुख चिंता की बात है। इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार फाइनेंशियल ईयर 2019 में क्रूड 12 फीसदी और महंगा हो सकता है। बता दें कि ब्रेंट क्रूड की कीमतें 70 से 71 डॉलर के बीच बनी हुई हैं। ऐसे में अगर 12 फीसदी कीमतें और बढ़ती हैं तो ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता हे। इसका असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ेगा। जिससे देश में महंगाई बढ़ने का खतरा और बढ़ गया है। 

 

बिगड़ सकता है महंगाई रोकने का टारगेट
सरकार ने मौजूदा फाइनेंशियल के लिए रिटेल महंगाई दर 3.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। वहीं, अगले साल भी इस पर कंट्रोल करने का लक्ष्‍य रखा गया है। लेकिन अगर पेट्रोल-डीजल की कीमतें लगातार बढ़ती हैं तो सरकार का यह अनुमान फेल हो सकता है। अभी पेट्रोल 3 साल के हाई पर और डीजल अपने रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया है। 

 

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