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रिटेल मार्केट में एकाधिकार के डर से ट्रेडर कर रहे हैं वॉलमार्ट- फ्लिपकार्ट डील का विरोध, सरकार के आगे रखी मांगें..

वॉलमार्ट और फ्लिपकार्ट डील के विरोध में 10 लाख ट्रेडर्स ने 1,000 जगहों पर धरना प्रदर्शन किया।

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नई दिल्ली. वॉलमार्ट और फ्लिपकार्ट डील के विरोध में 10 लाख ट्रेडर्स ने 1,000 जगहों पर धरना प्रदर्शन किया। ट्रेडर्स एसोसिएशन सरकार से वॉलमार्ट और फ्लिपकार्ट डील रद्द करने की मांग कर रहे हैं। वालमार्ट ने इंडियन ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट की 77 फीसदी हिस्सेदारी 16 अरब डॉलर में खरीदी है। अब वॉलमार्ट इंडिया में अपना बिजनेस फैलाएगा इसका ट्रेडर्स विरोध कर रहे हैं क्योंकि इससे ऑनलाइन और रिटेल में प्राइस वार और कंपिटिशन दोनों बढ़ेगा।

 

ट्रेडर्स को है एकाधिकार का डर

 

ट्रेडर्स एसोसिएशन का दावा है कि इस डील से रिटेल मार्केट में वॉलमार्ट का एकाधिकार हो जाएगा और छोटे ट्रेडर्स बिजनेस से बाहर हो जाएंगे।

 

ट्रेडर्स की ये है बड़ी डिमांड

  • बनाई जाए ई-कॉमर्स पॉलिसी

  • -कॉमर्स सेक्टर के लिए रेग्युलेटरी अथॉरिटी बनाई जाए

  • फ्लिपकार्ट और वॉलमार्ट डील को रद्द किया जाए।

  • कंपिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया फ्लिपकार्ट और वॉलमार्ट डील की जांच करे।

वॉलमार्ट का दावा 95 फीसदी सोर्सिंग करता है घरेलू मार्केट से

 

वॉलमार्ट ने एक स्टेटमेंट में कहा है कि वॉलमार्ट इंडिया में बी2बी (होलसेल में कैश एंड कैरी सिस्टम) के तहत इंडिया में काफी समय से काम कर रहा है। देश के लाखों की संख्या में छोटे किनारा ट्रेडर्स को वॉलमार्ट ने मदद की है। वह अब अपने आप को मॉडर्नाइज किया है। वॉलमार्ट डोमेस्टिक मैन्युफैक्चर, एसएमई सप्लायर, छोटे किसान और महिलाओं के बिजनेस से सोर्स करके घरेलू कारोबार की मदद कर रहा है। वॉलमार्ट 95 फीसदी स्टॉक घरेलू मार्केट से लेता है।
 

ट्रेडर्स ने किया विरोध

 

ट्रेडर्स ने किया विरोध प्रर्दशनआईटी) के जनरल सेक्रेटरी प्रवीण खंडेलवाल ने moneybhaskar.com को करीब 10 लाख ट्रेडर्स ने 1,000 जगहों पर विरोध प्रदर्शन किया। ट्रेडर्स की सरकार से यही मांग है कि सरकार वॉलमार्ट और फ्लिपकार्ट डील को रद्द कर दे।

 

जा सकते हैं कोर्ट

 

-कॉमर्स सेक्टर के लिए कोई पॉलिसी सरकार ने नहीं बनाई है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया तो वह इसके खिलाफ कोर्ट जाएंगे। सीएआईटी ने कंपिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया में इसके खिलाफ शिकायत की है। ई-कॉमर्स मार्केट पहले ही नियमों का उल्लंघन कई बार कर चुके है। वह ऑनलाइन हैवी डिस्काउंट देते हैं जो कि गलत है। इससे ऑनलाइन और ऑफलाइन कीमतों में काफी फर्क आता है और इसका नुकसान रिटेलर को होता है।


ट्रेडर्स को उम्मीद सरकार करेगी मदद

 

खंडेलवाल ने कहा कि ट्रेडर्स उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार इसे रोकने में ट्रेडर्स की मदद करेगी, ताकि छोटे कारोबारियों को मदद मिल सके। सरकार ने उनकी नहीं मानी तो वह आगे भी ऐसे विरोध प्रदर्शन करेंगे।

 

 

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