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मोदी ने दुनिया में मनवाया आधार का लोहा, कहीं मिला अवार्ड तो कहीं हो रहा फॉलो

हर भारतीय नागरिक की पहली पहचान बन चुका आधार केवल भारत में ही नहीं बल्कि देश के बाहर भी पॉपुलर हो चुका है।

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नई दिल्‍ली. हर भारतीय नागरिक की पहली पहचान बन चुका आधार केवल भारत में ही नहीं बल्कि देश के बाहर भी पॉपुलर हो चुका है। पूरी दुनिया में भारत सरकार के इस इनोवेशन की चर्चा हो रही है। हाल ही में दुबई में हुए 6ठें वर्ल्‍ड गवर्मेंट समिट में भी इसने तारीफ बटोरी, वहीं दूसरी ओर पड़ोसी मुल्‍क पाकिस्‍तान भी भारत की राह पर चलते हुए अपने यहां आधार जैसी व्‍यवस्‍था लाने की तैयारी कर रहा है। 

 

समिट में जीता अवॉर्ड 

वर्ल्‍ड गवर्मेंट समिट 2018 में आधार को बेस्‍ट गवर्मेंट इमर्जिंग टेक्‍नोलॉजीस अवॉर्ड से नवाजा गया है। आधार को विश्‍व का ऐसा सबसे बड़ा बायोमेट्रिक इनेबल्‍ड आइडेंटिफिकेशन प्रोग्राम करार दिया गया है, जो इनकम टैक्‍स, पासपोर्ट सर्विस, बैंक अकाउंट्स सोशल सर्विसेज बेनिफिट्स जैसी सुविधाओं तक पहुंच उपलब्‍ध कराता है। इस अवॉर्ड के जरिए टेक्‍नोलॉजी के क्षेत्र में और देश को पूरी तरह से डिजिटल बनाने की दिशा में इनोवेशन को लेकर किए गए भारत सरकार के प्रयासों को सराहा गया है। 

 

आगे पढ़ें- उमंग भी नहीं रहा पीछे

उमंग ऐप को भी मिला अवॉर्ड

आधार के अलावा भारत सरकार के उमंग ऐप को भी समिट में एक्‍सेसि‍बल गवर्मेंट कैटेगरी में बेस्‍ट एम गवर्मेंट सर्विस अवॉर्ड दिया गया। बता दें कि उमंग ऐप यूजर्स को एक ऐसा यूनिफाइड प्‍लेटफॉर्म उपलब्ध कराता है, जिसके जरिए सरकारी विभागों और सर्विस को एक्‍सेस किया जा सकता है।  

 

आगे पढ़ें- समिट में कितने देश शामिल 

कितने देश हुए शामिल 

इस समिट में ग्‍लोबल चुनौतियों के ग्‍लोबल सॉल्‍यूशंस उपलब्‍ध कराने वाली उम्‍दा टेक्‍नोलॉजी को पुरस्‍कार दिया जाता है। इसी के तहत आधार ने अवॉर्ड हासिल किया है। इस समिट में 140 देशों ने भाग लिया। इस दौरान कई राष्‍ट्र प्रमुख, 16 इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशस के प्रतिनिधियों समेत विश्‍व के कई ग्‍लोबल डेलिगेट्स और स्‍पीकर्स शामिल हुए। भारत की बात करें तो प्रधानमंत्री मोदी इस समिट की शुरुआत में मुख्‍य अतिथि बनकर पहुंचे थे। यह समिट 13 फरवरी को समाप्‍त हो गया।  

 

आगे पढ़ें- क्‍या है पाकिस्‍तान का फैसला 

पाकिस्‍तान भी भारत की राह पर 

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने कहा है कि टैक्सपेयर बेस बढ़ाने के लिए नैशनल आइडेंटिटी डेटाबेस का इस्तेमाल करते हुए संभावित टैक्सपेयर्स की पहचान की जाएगी।  ब्‍लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब्बासी ने एक इंटरव्यू में कहा कि इस प्लान के तहत टैक्सपेयर्स की संख्या बढ़ाने का विचार है। देश की 21 करोड़ आबादी में 1 फीसदी से भी कम लोग टैक्स चुकाते हैं। लीकेज बंद करने, सही प्रॉपर्टी वैल्यूएशन को प्रोत्साहन, टैक्स रेट में कमी और माफी योजना पर विचार किया जा रहा है। अब्बासी ने कहा, 'हम कई रणनीति पर काम कर रहे हैं। आप खर्चों को छुपा नहीं सकते हैं। आपके टेलिफोन बिल्स, यूटीलिटी बिल्स, विदेशी यात्रा, क्रेडिट कार्ड खर्च सारी कहानी कहते हैं।' गौरतलब है कि भारत को सब्सिडी लीकेज बंद करने, टैक्स चोरी रोकने और भ्रष्टाचार को कम करने में आधार से काफी मदद मिली है।  

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