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हजारों करोड़ की कमाई पर आई आंच, तो मोदी सरकार पर बरसा अमेरिका, डाटा लोकलाइजेशन नॉर्म्स और ई-कॉमर्स पॉलिसी को किया टारगेट

भारत के डाटा नॉर्म्स और ई-कॉमर्स पॉलिसी की अमेरिका ने की आलोचना

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नई दिल्ली.

भारत सरकार द्वारा देश का डाटा देश में ही रखने के लिए बनाई गई नीतियां अमेरिका को नागवार गुजर रही हैं। इन नीतियों से अमेरिका इतना तिलमिलाया हुआ है कि खुलकर इनकी आलोचना कर रहा है। हाल ही में अमेरिका ने देश के डाटा लोकलाइजेशन नीतियों और ई-कॉमर्स पॉलिसी को भेदभावपूर्ण और व्यापार को नुकसान पहुंचाने वाला बताया है।

 

सरकार कर रही है नागरिकों का डाटा सुरक्षित

भारत सरकार फिलहाल नई इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स पॉलिसी तैयार कर रही है, जिसके शुरुआती ड्राफ्ट में देश का डाटा देश में ही स्टोर करने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके साथ ही भारत से दूसरे देशों में डाटा फ्लो पर रोक लगाने, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और सोर्स कोड को ट्रांसफर करने के लिए नियमों का विस्तार करने, घरेलू डिजिटल उत्पादों को प्राथमिकता देने जैसे प्रस्ताव भी इस ड्राफ्ट में शामिल हैं।

 

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अमेरिका की कमाई पर लगेगी लगाम

भारत की इन प्रस्तावित नीतियों से अमेरिका को अपने व्यापार के सिकुड़ने का डर है। इन नीतियों के चलते भारत से होने वाली अमेरिका की कमाई पर भी असर पड़ेगा। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधियों की नेशनल ट्रेड एस्टिमेट रिपोर्ट, 2019 में कहा गया है कि, भारत ने हाल ही में डाटा लोकलाइजेशन की जरूरतों के लिए कई नियम बनाए हैं, जो भारत और अमेरिका के बीच डिजिटल ट्रेड में बाधा बनेंगे। अमेरिका को डर है कि, इन नियमों के चलते डाटा-इंटेंसिव सर्विस के सप्लायर्स का कॉस्ट बढ़ जाएगा। उन्हें मजबूरन ऐसे डाटा सेंटर्स की स्थापना करनी पड़ेगी जो किसी काम के नहीं होंगे। साथ ही लोकल फर्म्स भी दुनिया की बेस्ट ग्लोबल सर्विसेज का लाभ नहीं उठा पाएंगी।

 

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RBI ने जारी किए थे निर्देश

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में निर्देश दिया था कि सभी सिस्टम प्रोवाइडर्स को को इस बात को सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके द्वारा संचालित सभी पेमेंट सिस्टम्स से जुड़ा सारा डाटा भारत में ही स्टोर किया जाएगा। आरबीआई ने पेमेंट सर्विस ऑपरेटर्स की बेहतर निगरानी के लिए यह निर्देश दिया था।

 

 

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भारतीय ई-कॉमर्स पाॅलिसी ने बढ़ाई अमेरिका की चिंता

रिपोर्ट में कहा गया है कि, जुलाई, 2018 में भारत सरकार ने Personal Data Protection Bill नाम से एक ड्राफ्ट पेश किया था। अगर इसे कानून बना दिया जाता है तो, इससे उन विदेशी कंपनियों पर काफी दबाव आ जाएगा, जो लोगों की निजी जानकारियां प्रोसेस करती हैं। भारत पहले से विदेशी निर्यात पर बहुत ज्यादा टैक्स लगाता है। इसमें फूल (60 फीसदी टैरिफ), नैचुरल रबर (70 फीसदी टैरिफ), ऑटोमोबाइल्स (60 फीसदी टैरिफ), मोटरसाइकिल (50 फीसदी टैरिफ), किशमिश और कॉफी (100 फीसदी टैरिफ) और अल्कोहॉलिक पेय पदार्थ (150 फीसदी टैरिफ) शामिल हैं। इसके अलावा भारत दोनों देशों के बीच व्यापार में कई अन्य बाधाएं खड़ीर करता है, जैसे- कई मेडिकल डिवाइसेज कम दाम पर खरीदना, ईथेनॉल के इंपोर्ट पर प्रतिबंध लगाना और खाद्य पदार्थों के पैकेजिंग साइज और लेबल तक तय करने जैसी कई अन्य बाधाएं खड़ी करता है।

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