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हर 4 में से 1 भारतीय कस्‍टमर ऑनलाइन फाइनेंशियल फ्रॉड का हो रहा शिकार, टेलीकॉम-बैंक व रिटेल में सबसे ज्‍यादा जोखिम

भारतीयों के डिजिटली ज्‍यादा एक्टिव बनने के साथ-साथ देश में फ्रॉड का जोखिम भी बढ़ा है।

Indians face 25% higher risks to financial fraud
मुंबई. भारतीयों के डिजिटली ज्‍यादा एक्टिव बनने के साथ-साथ देश में फ्रॉड का जोखिम भी बढ़ा है। लगभग हर 4 में से 1 भारतीय कस्‍टमर ऑनलाइन फाइनेंशियल फ्रॉड का शिकार बन रहा है। यह बात ग्‍लोबल फाइनेंशियल इनफॉरमेशन कंपनी एक्‍सपीरियन की एक रिपोर्ट में कही गई। रिपोर्ट 10  APAC मार्केट- ऑस्‍ट्रेलिया, चीन, हांगकांग, भारत, इंडोनेशिया, जापान, न्‍यूजीलैंड, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम में किए गए ऑनलाइन सर्वे पर बेस्‍ड है। 
 
रिपोर्ट के मुताबिक, ऑनलाइन ट्रान्‍जैक्‍शन के दौरान 24 फीसदी भारतीयों के साथ फ्रॉड हुए। जो सेक्‍टर्स सबसे ज्‍यादा शिकार बने, उनमें टेलीकॉम (57 फीसदी मामले), बैंक (54 फीसदी मामले) और रिटेलर्स (46 फीसदी मामले) जैसे सेक्‍टर्स शामिल हैं। इसके अलावा इलेक्‍ट्रो‍निक्‍स व ट्रैवल सेक्‍टर में भी ऑनलाइन फ्रॉड की गुंजाइश दिखती है।    
 
आगे कहा गया कि भारतीय लोग बैंकों के साथ डाटा शेयर करना सबसे ज्‍यादा सुविधाजनक मानते हैं और सबसे कम भरोसा उन्‍हें ब्रांडेड रिटेलर्स पर है। साथ ही भारतीय विभिन्‍न सर्विसेज का लाभ लेने के लिए अपना पर्सनल डाटा शेयर करने से भी नहीं हिचकते हैं। ऐसा करने वालों का आंकड़ा 51 फीसदी है। 
 

देश में 6 फीसदी कंज्‍यूमर्स डाटा की सिक्‍योरिटी को लेकर सजग

रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 6 फीसदी कंज्‍यूमर्स सर्विस प्रोवाइडर्स को शेयर किए जाने वाले डाटा की सिक्‍योरिटी को लेकर सजग रहते हैं। इस मामले में सबसे ज्‍यादा जागरुक कंज्‍यूमर का आंकड़ा जापान का है, वहां 8 फीसदी कंज्‍यूमर अपने डाटा की सिक्‍योरिटी को लेकर जागरुक हैं।  
 

एशिया-पैसिफिक में सबसे ज्‍यादा डिजिटल कंजंप्‍शन भारत में

एशिया-पैसिफिक में सबसे ज्‍यादा डिजिटल कंजंप्‍शन भारत में है। लगभग 90 फीसदी उत्‍तरदाताओं का कहना था कि वे डिजिटल सर्विेसेज का इस्‍तेमाल कर रहे हैं। एक एवरेज के आधार पर 65 फीसदी डिजिटल यूजर्स ने मोबाइल पेमेंट्स को अपना लिया है क्‍योंकि वे इसे सुविधाजनक मानते हैं।   
 

गलत डाटा शेयरिंग के मामले में भारत एशिया-पैसिफिक में चौथा

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि डेमोग्राफिक्‍स के हिसाब से गलत डाटा शेयरिंग के मामले में भारत एशिया-पैसिफिक में चौथे स्‍थान पर है। यहां गलत डाटा शेयरिंग का आंकड़ा 70 फीसदी है। इस रिपोर्ट को तैयार करने में एडवायजरी फर्म IDC भी हिस्‍सेदार है।

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