Home » Economy » Policy20 साल, 8 फीसदी, वृद्धि, भारत, यूएन एक्‍सपर्ट - India can grow at 8 pc for next 20 years: UN expert

अगले 20 साल 8% रह सकती है भारत की आर्थि‍क वि‍कास दर : यूएन एक्‍सपर्ट

भारत अगले दो दशक यानी करीब 20 साल तक 8 प्रतिशत की दर से वृद्धि कर सकता है।

20 साल, 8 फीसदी, वृद्धि, भारत, यूएन एक्‍सपर्ट - India can grow at 8 pc for next 20 years: UN expert
नई दि‍ल्‍ली. संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ आर्थिक अधिकारी ने कहा है कि‍ भारत की अर्थव्यवस्था मुख्यत: सकारात्मक है और वृद्धि के अनुकूल है। हमारे आकलन के हिसाब से भारत अगले दो दशक यानी करीब 20 साल तक 8 प्रतिशत की दर से वृद्धि कर सकता है। उन्होंने कहा कि संभावनाओं को हासिल करने के लिए देश को सुधारों के अगले चरण पर अमल करने की जरूरत है। ऐसे में भारत को सोचना होगा कि‍ लंबे समय के लिए वृद्धि को कैसे बरकरार रखा जाए। गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र ने अपनी हालिया रिपोर्ट में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2018 में 7.2 प्रतिशत और 2019 में 7.4 प्रतिशत रहने का पूर्वानुमान व्यक्त किया था। 
 
बेहतर जीवन स्तर और निवेश को करना होगाा प्रोत्साहित 
 
संयुक्त राष्ट्र में आर्थिक मामलों के अधिकारी सेबास्टियन वर्गारा ने कहा कि वृद्धि को बरकरार रखने के लि‍ए भारत को सुधारों के अगले दौर पर अमल करने की जरूरत है। उदाहरण के लिए लोगों के जीवन के स्तर को बेहतर करना और निवेश को प्रोत्साहित करना होगा। उन्होंने कहा कि सकारात्मक आर्थिक स्थितियों के बावजूद भारत की आर्थिक वृद्धि दर शुरुआती पूर्वानुमानों की तुलना में कम रहेगी। लेकि‍न कुछ कारकों ने आर्थिक स्थिति को सकारात्मक बनाया है। 
 
दूरदर्शी है भारत की वित्तीय नीति
 
उन्होंने कहा, मंहगाई को नियंत्रण में रखने में सक्षम मौद्रिक नीति ने भी इसमें योगदान दिया है। 'हमारे आकलन के हिसाब से भारत की वित्तीय नीति भी दूरदर्शी है। इसने भी आर्थिक गतिविधियों को सहारा दिया है।' वर्गारा ने सार्वजनिक निवेश और आधारभूत संरचना परियोजनाओं पर जोर देने के लिए भारत सरकार की सराहना की है। 
 
अस्थायी था नोटबंदी का असर 
 
उन्होंने कहा, 'यह शॉर्ट टर्म में वृद्धि को तेज करने में महत्वपूर्ण रहा है और मध्यम अवधि में आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित किया है।' उन्होंने कहा कि पिछले साल और इस साल किए गए नियामकीय सुधार ने भी आर्थिक वृद्धि को मजूबती दी है। उन्होंने कहा, नोटबंदी का 2017 की शुरुआत पर असर रहा। इससे तरलता में कमी आई पर वह अस्थायी थी। 
 
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